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From: Deepak Das < >

From: Shriharsha Sharma < >

https://scroll.in/latest/879946/rohingya-militants-massacred-nearly-100-hindus-in-myanmar-in-august-2017-finds-amnesty

Rohingya militants massacred nearly 1000 Hindus in

Myanmar in August 2017, finds Amnesty

Accountability for the insurgents’ action is as crucial as the military crackdown that followed, the human rights group said.

Rohingya insurgents killed nearly 1000 Hindu civilians in western Myanmar in August, rights organisation Amnesty International has found. In a report on Tuesday, Amnesty said an armed group killed up to 990 Hindus, including children, in one, or possibly two, massacres.

The alleged attacks by the Arakan Rohingya Salvation Army had prompted military action in northern Rakhine state, forcing almost 7 lakh Rohingya Muslims to flee to Bangladesh in subsequent weeks. The United Nations has used the term “ethnic cleansing” to describe the military action against the community, which included widespread rapes, arson and massacres.

Masked fighters of the Rohingya outfit killed Hindus near Kha Maung Seik village, Amnesty International found. The report cites witnesses including eight Hindu women who alleged they were abducted by ARSA fighters and forced to convert to Islam.

The militant group had denied allegations of massacre of Hindus in September 2017.

“It’s hard to ignore the sheer brutality of ARSA’s actions, which have left an indelible impression on the survivors we’ve spoken to,” Tirana Hassan, Amnesty International’s crisis response director, said in a statement. “Accountability for these atrocities is every bit as crucial as it is for the crimes against humanity carried out by Myanmar’s security forces in northern Rakhine State.”

Amnesty International has called for Myanmar to grant UN investigators access to the conflict area to look into the alleged atrocities by both the Rohingya insurgent and the Army.

From: Kumar Arun < >

~~मोदी और ओबामा में फर्क नजर नहीं आता है ~~

मोदी के चलते ही बी जे पी भी प्यारा लगने लगा था
दिन रात एक कर गरीबों में एक आशा जगने लगा था

जो जिंदगी में बोट नहीं डाले ओ भी लम्बी कतारों में खड़े थे
वाजपेयी और आडवाणी को किनारे कर मोदी के लिए बढे थे

आज मोदी बड़े शान से प्रधान बने हैं
हिन्दुओं के दिल में आशा के केंद्र बने हैं

देख हालत के हिन्दुओं के पतन की सिर्फ रोना आता है
सोनिआ के आगे मोदी कुयूं झुकते यह समझ नहीं आता है

कब हिन्दुओं के अच्छे दिन, भारत-माता की आन-बाण बढ़ेगी
कब मोदी बी जे पी के हाथो से इंडिया भी हिन्दुस्थान बनेगी

डॉ. कुमार अरुण
मई २१ , २०१८

From: Vinod Kumar Gupta < >

🔕 कश्मीर में रमजान पर युद्ध-विराम ~

💥जिस कश्मीर में “भारत काफ़िर है” के नारे लगाए जाते हो वहां युद्ध-विराम का क्या औचित्य है ? अनेक आपत्तियों के उपरांत भी केंद्रीय सरकार ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ़्ती की मांग को मानते हुए रमजान माह  (अवधि लगभग 30 दिन ) में सेना को आतंकियों के विरोध में अपनी ओर से आगे बढ़ कर कोई कार्यवाही नहीं करने का निर्णय किया है। परंतु अगर आतंकवादी गोलाबारी या अन्य आतंकी गतिविधियों को जारी रखेंगे तो उस समय उसका प्रतिरोध करने को सुरक्षाबलों को छूट होगी। फिर भी यह क्यों नही सोचा गया कि जब केंद्र सरकार की कठोर नीतियों के कारण आतंकवाद पर अंकुश लगाने में सफलता मिल रही है और पिछले एक-दो वर्षों में सैकड़ों आतंकियों को मारा भी जा चुका है तो क्या ऐसे में युद्ध विराम राष्ट्रीय हित में होगा ?
💥क्या इस निर्णय के पीछे सुरक्षा बलों के सफल अभियान से आतंकियों को सुरक्षित करने का कोई षडयंत्र तो नही है ? यद्यपि वर्षो से यह स्पष्ट है कि जब भी रमजान के अवसर पर या अन्य किसी अवसर पर कश्मीर में आतंकियों के प्रति युद्धविराम किया गया तो जिहादियों ने इस छूट का अनुचित लाभ लेते हुए अपने बिखरे हुए व कमजोर पड़ गए आतंकी साथियों को पुनः संगठित किया और सबको शस्त्रों से भी सुज्जित करके सुरक्षा प्रतिष्ठानों व निर्दोष नागरिकों पर भी आक्रमण किये थे। जिसके परिणामस्वरूप ऐसे युद्धविरामों की अवधि में हमारे सैकड़ों सुरक्षाबलों के सैनिकों व सामान्य नागरिकों को भी उन आतंकियों का शिकार बनना पड़ा था। क्या ऐसे अवसरों पर जिहादियों के आक्रमणों से लहूलुहान हुए सैनिकों और नागरिकों के परिवारों की पीड़ाओं के घावों को हरा होने दें ?
💥अतः कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि जम्मू-कश्मीर में जो भी सरकार बनती है वह कभी “रमजान” के बहाने युद्ध-विराम करवाके, तो कभी “हीलिंग-टच” द्वारा और कभी मानवाधिकार की दुहाई देकर सुरक्षाबलों को हतोत्साहित करके जाने-अनजाने आतंकवादियों को ही प्रोत्साहित करती है। जिससे सदैव राष्ट्रीय हित प्रभावित होते रहे हैं।
💥परंतु रमजान में युद्ध विराम के निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि आतंकवादी एक विशेष धर्म से संबंधित होते हैं और उनका धर्म भी होता है। क्योंकि अब आप भली प्रकार समझ सकते हैं कि रमजान का महीना जो केवल इस्लाम के अनुयायियों के लिए पवित्र होता है और जिनको सुरक्षा प्रदान करने के लिए युद्धविराम घोषित हुआ है , वे कौन है ? वे सब मुसलमान है और इस्लाम मज़हब/धर्म के मानने वाले है। अतः इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि आतंकवाद का भी धर्म है और वह है “इस्लाम”।
💥क्या केंद्र सरकार पर कश्मीर की मुख्य मंत्री महबूबा मुफ़्ती का ऐसा कोई दबाव है जो राष्ट्र की सुरक्षा को चुनौती देने वाली युद्धविराम की अनुचित मांग को मानने के लिए विवश होना पड़ा ? क्या यह आत्मघाती कूटनीतिज्ञता नही है ? क्या यह अदूरदर्शी निर्णय कश्मीरी कट्टरपंथियों, अलगाववादियों व आतंकवादियों के आगे घुटने टेकने का संकेत तो नही है ? क्या इससे पाक व पाक परस्त शत्रुओं को प्रोत्साहन नही मिलेगा ? समाचारों से यह भी ज्ञात हुआ है कि केंद्र सरकार ने यह निर्णय इसलिये भी लिया है कि कश्मीर के शांतिप्रिय व अमन पसंद मुसलमान अपने धार्मिक रमजान के महीने को शांतिपूर्वक मना सकें।
💥परंतु जब 1986 से हिंदुओं की हत्याओं व आगजनी का नंगा नाच आरम्भ हुआ और हिंदुओं को वहां से भागने को विवश होना पड़ रहा था तब ये अमन पसंद मुसलमान क्यों मौन थे ? हिंदुओं को घाटी छोड़ देने की चेतावनी के साथ साथ “इस्लाम हमारा मकसद है”  “कुरान हमारा दस्तूर है”  “जिहाद हमारा रास्ता है”   “WAR TILL VICTORY” आदि नारे लिखे पोस्टर पूरी घाटी में लगाये गये। यही नही  “कश्मीर में अगर रहना है ,  अल्लाहो अकबर कहना होगा ” के नारे लगाये जाने लगे जिससे वहां का हिन्दू समाज भय से कांप उठा था।
💥इन अमानवीय अत्याचारों का घटनाक्रम 28 वर्ष पूर्व सन 1990 में लाखों कश्मीरी हिंदुओं को वहां से मार मार कर उनकी बहन-बेटियों व संम्पतियों को लूट कर भगाये जाने तक जारी रहा,  तब ये शान्तिप्रिय कश्मीरी मुसलमान कहां थे ? उस संकटकालीन स्थितियों को आज स्मरण करने से भी सामान्य ह्रदय कांपनें लगता है। इस पर भी कश्मीरी मुसलमानों को शांतिप्रिय समझना क्या उचित होगा ? क्या इन शांतिप्रिय मुसलमानों ने कभी जिहाद के दुष्परिणामों से रक्तरंजित हो रही मानवता की रक्षार्थ कोई सकारात्मक कर्तव्य निभाया है ?
💥एक विडंबना यह भी है कि इन अमन पसंद लोगों के होते कश्मीर में अनेक धार्मिक स्थलों को आतंकवादी समय -समय पर  अपनी शरण स्थली भी बना लेते है। वहां “पाकिस्तान जिन्दाबाद” व “भारतीय कुत्तो वापस जाओं” के नारे तो आम बात है साथ ही पाकिस्तानी व इस्लामिक स्टेट के झण्डे लहराए जाना भी देशद्रोही गतिविधियों का बडा स्पष्ट संकेत हैं। आतंकवादियों के सहयोगी  हज़ारों पत्थरबाजों को क्षमा करने से क्या उनके अंधविश्वासों और विश्वासों से बनी जिहादी विचारधारा को नियंत्रित किया जा सकता है ?
💥मुस्लिम युवकों की ब्रेनवॉशिंग करने वाले मुल्ला-मौलवियों व उम्मा  पर कोई अंकुश न होने के कारण जिहादी विचारधारा का विस्तार थम नही पा रहा है। इस विशेष विचारधारा के कारण ही जम्मू-कश्मीर राज्य में पिछले 70 वर्षों में अरबों-खरबों रुपयों की केंद्रीय सहायता के उपरांत भी वहां के बहुसंख्यक मुस्लिम कट्टरपंथियों में भारत के प्रति श्रद्धा का कोई भाव ही नही बन सका ?
इतिहास साक्षी है कि मानवता का संदेश देने वाला हिन्दू धर्म सदियों से इस्लामिक आक्रान्ताओं को झेल रहा है।
💥परंतु जब भी और वर्तमान में भी जिहाद के लिए विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों व अन्य समुदाय के मध्य होने वाले अनेक संघर्ष इस बात के साक्षी है कि “रमजान” में कभी भी कहीं भी काफिरों व अविश्वासियों के विरुद्ध युद्ध विराम नही किया गया। बल्कि इन मज़हबी आतंकियों में अविश्वासियों के धार्मिक त्योहारों पर व स्थलों को अपनी जिहादी मानसिकता का शिकार बनाने में सदैव प्राथमिकता रही थी और अभी भी है।
💥क्या ऐसे में युद्धविराम करके आतंकवाद पर अंकुश लगाया जा सकता है ? ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आतंकवाद पर कठोर निर्णय लेने वाली मोदी सरकार अभी इस्लामिक आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए अपनी इच्छा शक्ति की दृढ़ता का परिचय कराना नही चाहती। जबकि शत्रुओं को हर परिस्थितियों में दण्डित करके कुचलना ही राष्ट्रीय हित में होता है। इस प्रकार राष्ट्रीय हितों को तिलांजलि देने से क्या ऐसा सोचा जा सकता है कि भविष्य में स्वस्थ रणनीति बनाने में हमारे रणनीतिकार भ्रमित तो नही किये जा रहे हैं ?
💥अतः वर्तमान विपरीत परिस्थितियों में युद्धविराम का निर्णय राजनीति के हितार्थ भी अनावश्यक व दुःखद है। राजनैतिक कारणों से लिये गये ऐसे शासकीय निर्णयों से ही हिंदुओं में तेजस्विता धीरे धीरे नष्ट हो रही है और उनको निष्क्रिय किया जा रहा है। जिससे वे अपने शत्रु की शत्रुता को समझते हुए भी बार – बार कबूतर के समान आंखें बंद करने को विवश होते जा रहे हैं । जबकि बिल्ली रूपी जिहादी तो अपना काम कर ही रहे हैं। इसलिये नेताओं के साथ साथ अब सोचना तो हम सबको भी होगा कि “आतंकियों का भी धर्म होता है” तो उनसे कैसे सुरक्षित रहें ?

विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक व लेखक)
गाज़ियाबाद

From: Mohan Natarajan < >

KNOW YOUR SICKULAR HISTORIAN – GUHA

DEAR ALL

A POSTING FROM ANOTHER GROUP. PLEASE DISSEMINATE

MOHAN

A POSTING IN ANOTHER GROUP, PLEASE:

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Ramachandra Guha (@Ram Guha) tweeted at 9:59 PM on Wed, May 09, 2018:

‘As I wrote in 2015, the only credible right-wing intellectual in India is Arun Shourie; the only person on that side who has produced serious books rather than clever columns or cheeky tweets. That he was completely kept out by Modi/Shah tells us all we need to know about them’.

(https://twitter.com/Ram_Guha/status/994252996203573253?s=03)

 

Very shortly afterwards, he got a reply from@TrueIndology as follows:

True Indology (@TrueIndology) tweeted at 1:05 AM on Thu, May 10, 2018:

Since 2015, Shourie has become a scholar for Ramachandra Guha because that was when Shourie turned anti BJP. Earlier, when Shourie hadn’t turned anti BJP, the same Ramachandra Guha had abused Shourie and dismissed him as “a pamphleteer parading as historian” https://t.co/57JTu3MiXN

(https://twitter.com/TrueIndology/status/994299937390116864?s=03)

True Indology (@TrueIndology) tweeted at 1:15 AM on Thu, May 10, 2018:

 

Snippet from @Ram Guha’s essay “The use and Abuse of Gandhi” from his book “An Anthropologist Among the Marxists..” In this book, he had dismissed Shourie as “pamphleteer, woefully ill informed, bilious polemicist, baiter of minorities and comparable to white American fascists” True Indology on Twitter

 

True Indology on Twitter

“Snippet from @Ram Guha’s essay “The use and Abuse of Gandhi” from his book “An Anthropologist Among the Marxist…

 

(https://twitter.com/TrueIndology/status/994302381453012992?s=03)

The tragedy is that those who occupy the intellectual space think that the Internet Hindus are fools and will not be able to call out the hypocrisy and their changing position based on the latest situation.

Like in George Orwell’s book ‘1984’, where changing alliances involved rewriting history to wipe out the abuses of the new friend when this friend was the enemy, etc.

 

The real problem in the system is not people like Ramachandra Guha, who have a pecuniary compulsion to do what they do. It is those who accept him as an intellectual and thoughtlessly look up to him as an informed guide about what is happening in India.

 

For example, in April 2017, three American Universities (Stanford, Berkley and Georgetown) had invited him to speak to an audience, where presumably would be people (particularly students) who wish to know about what is happening at the political level in India. From the topics listed, clearly the bias was to try and put the present NDA government in bad light, and to narrate how things have seriously deteriorated since it came to power in 2014.

When those who wish to consult anyone on issues relating to India and expect to receive an unbiased narration of what is happening, it is also their duty to do due diligence about the person that they are consulting.

 

When Ramachandraji so blatantly tell lies, as above, then he is doing a great disservice to the nation and its people who have provided him with the resources to live the lifestyle he does.

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RELATED PLEASE:

If ‘propaganda’ is a symphony, Ram Guha is Beethoven

Nupur J Sharma

11 May 2018

Propagandists in India are prone to tawdry and tacky methods. There is very often no elegance in their methods. No poetry. No finesse. They lie clumsily, their hypocrisy, as bright as day, for all men to behold. The kind of propagandists who use photoshop to morph images and don’t dress their lies up just enough so they don’t get caught.

Not Ramchandra Guha. Watching him propagate is like watching poetry in motion.

The lies rolling off his tongue like airy butter cookies melting in one’s mouth, his hypocrisy, misrepresentations and half-truths, blending so effortlessly to falsely present a mirage of truth.

His nonchalant brazenness that has almost become a part of his charm, only amplified by those Harry Pinteresque glasses, albeit rimless, that give him the natural air of nerdy, intellectual superiority.

How can someone not believe a man with his salt pepper, disheveled, quintessentially “intellectual” look?

 

And therein lies the beauty of his con. Look so immaculately tousled, that every bit of lie and hypocrisy is taken at face value.

 

And lord knows, Ram Guha is a treasure trove of hypocrisy and lies.

Please read on @:

http://www.opindia.com/2018/05/if-propaganda-is-a-symphony-ram-guha-is-beethoven/

 

Reply    Reply to all         Forward

 

Udayabhanu Panickar udayabhanupanickar@yahoo.com [aryayouthgroup] <aryayouthgroup@yahoogroups.com></aryayouthgroup@yahoogroups.com>

May 12 (1 day ago)

 

to aryayouthgroup

 

This message is eligible for Automatic Cleanup! (aryayouthgroup@yahoogroups.com) Add cleanup rule | More info

 

A man who fabricates history is talking.

 

Sincerely,

Udayabhanu Panickar

aum namaH ShivAya

 

Our spiritual heritage is neither a cult; a creed, a dogma; nor a one-way single path to heaven. It is multiple lane Super highway for mOKSham, which is the merger of jeevAtHman with paramAThman. It is not even just a religion as such; nor is it just a way of life. It is the complete and comprehensive collection of divine knowledge of the Absolute Truth, which, when learned and practiced; can lead people to the experience of the Absolute and the Ultimate Bliss. It is a continuously evolving and absorbing science; The Science of the Absolute, a flexible body of Divine knowledge centered on the quest of the jeevAtHman (for the English-speaking world, we may refer this as ‘soul’) for its’ birthright, ‘the divine realization’. In addition, it makes provisions for all jeevAtHman in this quest. Yet, it remains immeasurable as it safeguards the very purpose of all life everywhere and in all things. We may call It ‘SanAthana Dharma’, but never categorize it just as a religion, or just as a way of life. It is much Greater and Spiritual than both. The wise called it “The Science of Spirituality”, The Science of the Absolute”, “The Science of the Self” or “The Science of the Soul”. It is braHMavidya. We may call it AdhyAtmavidya, not a religion. ShivOham, ShivOham, ShivOham.

 

 

 

Vishwas Pitke <> wrotes:

The Crusades
have finally started as predicted!
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The  first countries to ban Islam:
See how the world is acting fast on the  threat posed by Islam and its barbaric Sharia Law.
Japan has  always refused Muslims to live permanently in their country and they  cannot own any real estate or any type of business, and have banned any  worship of Islam. Any Muslim tourist caught spreading the word of Islam will be deported immediately, including all family members.
Cuba rejects plans for first mosque.
 
The African nation of Angola and several other nations have officially banned Islam.
 
Record number of Muslims,  (over 2,000)  deported from Norway as a way of fighting crime.  Since these Muslim criminals have been deported, crime has dropped by a  staggering 72%. Prison Officials are reporting that nearly half of their jail cells are now vacant, Courtrooms nearly empty, Police now  free to attend to other matters, mainly traffic offenses to keep their  roads and highways safe and assisting the public in as many ways as  they can.
 
In Germany alone in the last year there were 81  violent attacks targeting mosques.
 
Austrian police arrested 13 men targeting suspected jihad recruiters.
 
A Chinese court sends 22 Muslim Imams to jail  for 16 to 20 years for spreading Islam hatred and have executed eighteen Jihadists;  China campaigns against Separatism (disallowing  Islamist to have  their own separate state). Muslim prayers banned in government  buildings and schools in Xinjiang (Western China). Hundreds of Muslim families prepared to leave China for their own safety and return back to their own Middle Eastern countries.
 
Muslim refugees  beginning to realize that they are not welcome in Christian countries  because of their violent ways and the continuing wars in Syria and Iraq whipped up by the hideous IS who are murdering young children and using  mothers and daughters as sex slaves.
 
British Home Secretary  prepares to introduce ‘Anti-social Behavior Order’ for extremists and  strip dual nationals of their Citizenship. Deportation laws also being prepared.
 
The Czech Republic blatantly refuses Islam in their  country, regarding it as evil.
 
Alabama – A new controversial amendment that will ban the recognition of “foreign laws which would  include Sharia law”.
 
The Polish Defense League issues a warning  to Muslims. 16 States have all Introduced Legislation to Ban Sharia Law.
 
Many Muslims in Northern Ireland have announced  plans to leave the country to avoid anti-Islamic violence by Irish  locals. The Announcement comes after an attack on groups of Muslims in  the city of Belfast, Groups of Irish locals went berserk and bashed  teenage Muslim gangs who were referring to young Irish girls as sluts  and should be all gang raped, according to Islam and ”Sharia  Law”. Even hospital staff were reluctant to treat the battered Muslim Patients, the majority were given the Band-Aid treatment and  sent home with staff muttering ”Good Riddance”.
North  Carolina bans Islamic “Sharia Law” in the State, regarding it now as a  criminal offence.
 
Dutch MP’s call for removal of all mosques in  the Netherlands. One Member of the Dutch Parliament said: “We want to clean Netherlands of Islam”.  Dutch MP Machiel De Graaf spoke on  behalf of the Party for Freedom when he said, “All mosques in the  Netherlands should be shut down. Without Islam, the Netherlands would  be a wonderful safe country to live in, as it was before the arrival of  Muslim refugees”.

From: Vivek Arya < >

जिन्नाह को महान बताने वालों! कुछ तो शर्म करो!
डॉ विवेक आर्य
रावलपिंडी के समीप हिन्दुओं का एक छोटा सा गांव था। 500 के लगभग व्यसक होंगे। बाकि बच्चे, बुड्ढे। गांव के सरपंच रामलाल एक विशाल बरगद के नीचे बैठे थे। तभी मोहन भागता हुआ आया। बोला सरपंच जी, सरपंच जो। सरपंच जी कहा ,”क्या हुआ मोहन ? ” सरपंच जी मुझे पता लगा है यहाँ से 8 कोस दूर हिन्दुओं ने अपना गांव खाली करना शुरू कर दिया है। सिख भाई भी उनके साथ अमृतसर जाने की तैयारी कर रहे है। सरपंच जी ने एक लम्बी साँस ली और कहा,” मैंने कल ही रेडियो पर सुना था। महात्मा गाँधी जी  ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान का विभाजन मेरी लाश पर होगा। क्या तुम्हें उनकी बात पर भरोसा नहीं है?” मोहन बोला,” सुना तो मैंने भी है कि जवाहर लाला नेहरू जी ने कहा है कि हिन्दुओं आश्वस्त रहो। भारत के कभी टुकड़े नहीं होंगे। तुम लोग लाहौर और रावलपिंडी में आराम से रहो। पर जिस गांव की मैं बात कर रहा हूँ। उस गांव पर पिछली रात को चारों और के मुसलमान दंगाइयों ने इकट्ठे होकर हमला कर दिया। उनकी संपत्ति लूट ली। दुकानों में आग लगा दी। मैंने तो यह भी सुना की किसी गरीब हिन्दू की लड़की को भी उठा कर ले गए। भय के कारण उन्होंने आज ही पलायन करना शुरू कर दिया हैं।”  सरपंच जी बोले,”देखो मोहन। हम यहाँ पर सदियों से रहते आये हैं। एक साथ ईद और दिवाली बनाते आये है। नवरात्र के व्रत और रोज़े रखते आये है। हमें डरने की कोई जरुरत नहीं है। तुम आश्वस्त रहो। ” मोहन सरपंच जी की बात सुनकर चुप हो गया मगर उसके मन में रह रहकर यह मलाल आता रहा कि सरपंच जी को कम से कम गांव के हिन्दुओं को इकट्ठा कर सावधान अवश्य करना चाहिए था। अभी दो दिन ही बीते थे। चारों ओर के गांवों के मुसलमान चौधरी इकट्ठे होकर सरपंच से मिलने आये और बोले। हमें मुस्लिम अमन कमेटी के लिए चंदा भेजना है। आप लोग चंदा दो। न नुकर करते हुए भी सरपंच ने गांव से पचास हज़ार रुपया इकठ्ठा करवा दिया। दो दिन बाद फिर आ गए। बोले की ओर दो। सरपंच ने कहा कि अभी तो दिया था। बोले की, “कम पड़ गया और दो। तुमने सुना नहीं 8 कोस दूर हिन्दुओं के गांव का क्या हश्र हुआ है। तुम्हें अपनी सुरक्षा चाहिए या नहीं?” सरपंच ने इस बार भय से सत्तर हज़ार इकट्ठे कर के दिए। दो दिन बाद बलूच रेजिमेंट की लोरी आई और हिन्दुओं को इकठ्ठा कर सभी हथियार यहाँ तक की लाठी, तलवार सब जमा कर ले गई। बोली की यह दंगों से बचाने के लिए किया है।  क़ुराने पाक की कसम खाकर रक्षा का वायदा भी कर गई। नवें दिन गांव को मुसलमान दंगाइयों ने घेर लिया। सरपंच को अचरज हुआ जब उसने देखा कि जो हथियार बलूच रेजिमेंट उनके गांव से जब्त कर ले गई थी। वही हथियार उन दंगाइयों के हाथ में हैं। दंगाइयों ने घरों में आग लगा दी।संपत्ति लूट ली। अनेकों को मौत के घाट उतार दिया गया।  हिन्दुओं की माताओं और बहनों की उन्हीं की आँखों के सामने बेइज्जती की गई। सैकड़ों हिन्दू औरतों को नंगा कर उनका जुलुस निकाला। हिन्दू पुरुष मन मन में यही विनती कर रहे थे कि ऐसा देखने से पहले उन्हें मौत क्यों न आ गई। पर बेचारे  क्या करते। गाँधी और नेहरू ने जूठे आश्वासन जो दिए थे। गांव के कुछ बचे लोग अँधेरे का लाभ उठाकर खेतों में भाग कर छुप गए। न जाने कैसे वह रात बिताई। अगले दिन अपने ही घर वालों की लाशे कुएं में डाल कर अटारी के लिए रेल पकड़नी थी। इसलिए किसी को सुध न थी। आगे क्या होगा। कैसे जियेंगे। कहाँ रहेंगे। यह कहानी कोई एक घर की नहीं थी। यह तो लाहौर, डेरा गाजी खां, झेलम, सियालकोट, कोहाट, मुलतान हर जगह एक ही कहानी थी। कहानी क्या साक्षात् नर पिशाचों का नंगा नाच था।
तत्कालीन कांग्रेस के अध्यक्ष आचार्य कृपलानी के शब्दों में इस कहानी को पढ़िए
“आठ मास हुए आपने मुझे कांग्रेस का अध्यक्ष चुना था। महात्मा गाँधी ने एक प्रार्थना सभा के भाषण में कहा था कि मुझे फूलों का मुकुट नहीं पहनाया जा रहा है। बल्कि काँटों की सेज पर सुलाया जा रहा है। उनका कहना बिलकुल ठीक है।  उनकी घोषणा होने के दो दिन बाद मुझे नोआखली जाना पड़ा। वहां से बिहार और अभी मैं पंजाब होकर आया हूँ।  नोआखली में जो देखा वह मेरे लिए नया अनुभव था। लेकिन बिहार में जो मैंने देखा वह और भी नया और पंजाब में जो देखा वह और भी अधिक था। मनुष्य मनुष्य नहीं रहा। स्त्रियां बच्चों को साथ लेकर इज्जत बचाने के लिए कुओं में कूद पड़ीं। उनको बाद में उससे बचाया गया। पूजा के एक स्थान में पचास स्त्रियों को इकठ्ठा करके उनके घर के लोगों ने उनको मार दिया। एक स्थान में 370 स्त्रियों और बच्चों ने अपने को आग को भेंट कर दिया है।-आचार्य कृपलानी”
(सन्दर्भ- श्यामजी पराशर, पाकिस्तान का विष वृक्ष, नवंबर,1947 संस्करण, राष्ट्रनिर्माण ग्रन्थ माला, दिल्ली, पृष्ठ 42)
महात्मा गाँधी और नेहरू जो पहले कहते थे कि पाकिस्तान हमारी लाश पर बनेगा अब कहने लगे कि हमने देश का विभाजन डरकर नहीं किया। जो खून खराबा हर तरफ हो रहा है, उसी को रोकने के लिए किया। जब हमने देखा कि हम किसी तरह भी मुसलमानों को मना नहीं सकते तब ऐसा किया गया। देश को तो 1942 में ही आज़ाद हो जाना था। अंग्रेजों ने देश छोड़ने से पहले मुस्लिम लीग को आगे कर दिया। जिन्नाह ने मांगे रखनी शुरू कर दी। मैं न मानूं की रट लगाए जिन्नाह तानाशाह की स्थिति अर्जित कर कायदे आज़म बन गया। बात बात पर वाक आउट की धमकी देता था। कभी कहता विभाजन कमेटी में सिखों को मत लो। अगर लिया तो मैं बहिष्कार कर दूंगा। कभी कहता सभी सब-कमेटियों का प्रधान किसी मुसलमान को बनाओ। नहीं तो मैं उठ कर चला जाऊंगा। कांग्रेस के लिए जिन्नाह के साथ जीना मुश्किल, जिन्नाह के बिना जीना मुश्किल। फिर जिन्नाह ने दबाव बनाने के लिए अपने गुर्गे सोहरवर्दी के माध्यम से नोआखली और कोलकाता के दंगे करवाए। सीमांत प्रान्त में दंगे करवाए। मेरठ, पानीपत, सहारनपुर, दिल्ली सारा देश जल उठा। आखिर कांग्रेस को विभाजन स्वीकार करना पड़ा। मुसलमानों को उनका देश मिल गया। हिन्दुओं को क्या मिला? एक हिन्दू राष्ट्र के स्थान पर एक सेक्युलर राष्ट्र। जिसमें बहुसंख्यक हिन्दुओं के अधिकारों से ज्यादा अल्पसंख्यक मुसलमानों के अधिकार हैं। पाकिस्तान में बचे हिन्दुओं के अधिकारों की कोई चर्चा नहीं छेड़ता। उसी कांग्रेस का 1947 में विस्थापित एक प्रधानमंत्री आज कहता है कि देश के संसाधनों पर उन्हीं अल्संख्यक मुसलमानों का अधिकार है। हिन्दू धर्मरक्षा के लिए अपने पूर्वजों की धरती छोड़ आये। अमानुषिक यातनायें सही। चित्तोड़ के जौहर के समान ललनाओं की जिन्दा चिताएं जली। राजसी ठाठ ठुकराकर दर दर के भिखारी बने। अपने बेगाने हो गए। यह सब जिन्नाह की जिद्द के चलते हुआ।
और आज मेरे देश के कुछ राजनेता यह कहते है कि जिन्नाह महान था। वह अंग्रेजों से लड़ा था।
अरे धिक्कार है तुमको जो तुम अपना इतिहास भूल गए। उन अकथनीय अत्याचारों को भूल गए। उन बलिदानों को भूल गए। अपने ही हाथों से अपनी बेटियों के काटे गए सरों को भूल गए। जिन्नाह को महान बताते हो। कुछ तो शर्म करो।
(यह लेख उन अज्ञात लाखों हिन्दु पूर्वजों को समर्पित है जिन्होंने धर्मरक्षा हेतु अपने पूर्वजों की भूमि को पंजाब और बंगाल में त्याग दिया। मगर अपने पूर्वजों के धर्म को नहीं छोड़ा। )