Feeds:
Posts
Comments

“मुसलमानों का अनावश्यक विरोध”

महोदय/महोदया,

 

जब यह सर्वविदित ही है कि अनेक साक्ष्यों के आधार पर अयोध्या स्थित “श्री राम जन्मभूमि मंदिर” सिद्ध हो चूका है । फिर भी इस्लामिक कट्टरपंथियों की दूषित व घ्रणित प्रवृति के कारण यह विवाद अभी सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है । अतः अभी संभावित सकारात्मक निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी ।

ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश का सुझाव कि “अयोध्या मंदिर विवाद को आपस में सुलझा लिया जाय” क्या स्वीकार्य होगा ? समझदार व सभ्य समाज विवादों को हल करने के शान्तिपूर्ण विकल्प ढूंढते है, परंतु जिस समाज का दर्शन पृथक संस्कृति को ही नकारता हो और अपनी घृणित सोच से उनके मान बिंदुओं को खंडित करके उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना ही हो तो कोई क्या करें ?

इन जिहाद पिपासुओं की मानसिकता मंदिर जैसे धार्मिक विवादो पर कभी भी मध्यम मार्ग नहीं अपनायेगी ? हम कब तक मुस्लिम पोषित राजनीति से आत्मस्वाभिमान को ठेस पहुँचा कर जिहादियों के सपने पूरे करने के लिये अपने अस्तित्व को ही संकट में डालते रहेंगे ? कब तक बहुसंख्यकों की सरकार अल्पसंख्यको की अनुचित मांगों को मान कर बहुसंख्यकों का उत्पीड़न करती रहेंगी ?

याद करो जब 1985 में एक मुस्लिम तलाकशुदा बुजूर्ग महिला शाहबानो बेगम को जीवन निर्वाह के लिये धन देने को उसके पति को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था । तब मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में आकर कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने1986 में संसद द्वारा विधेयक पास करके कानून बनाया और मुसलमानों को अपनी तलाक़ शुदा पत्नी को खर्चा देने की बाध्यता से मुक्त कर दिया था।

अतः इस प्रकरण को ध्यान में रखते हुए केंद्र की राष्ट्रवादी सरकार को अपनी प्रबल इच्छाशक्ति से करोड़ों हिन्दुओं की आस्थाओं के प्रतीक “भगवान श्री राम” का अयोध्या में भव्य मंदिर बनवाने के लिए आवश्यक विधेयक लाकर समस्त विवादों को पूर्ण विराम लगाना होगा।

भवदीय

विनोद कुमार सर्वोदय

ग़ाज़ियाबाद

(Much more important than building the Rama Temple is to make the constitution pro-Vedic, and make Hindustan a Vedic State, not secular (because the Vedic dharma and culture are inherently tolerant of all the tolerant religions and ideologies. – Skanda987)

 

 

 

From: Pramod Agrawal < > wrote:

मुस्लिम बादशाओं के हिंदुओं पर अत्याचार और हत्याएं और मंदिरों को लूटना और तोडना ——-

क्या कभी वामपंथी और कोंग्रस इतिहासकारों ने आपको ये बताया ?

👇🏽

१. सन् 1018 में मुस्लिम तुर्कीयों का आक्रमण और मुस्लिम अब्दुल कासिम महमुद(महमुद गजनी) के द्वारा 50 हजार हिन्दुओं का कत्ल, हजारो स्त्रियों के साथ दुराचार व लगभग १ हजार मन्दिरो को नष्ट करना ।

२. सन् 1024 मे महमुद गजनी का पुन: आक्रमण और 50 हजार हिन्दुओं का कत्ल, सोमनाथ मन्दिर की लुट, और मन्दिर को तोड़ देना ।

३. सन् 1193 मे मुहमद गौरी का आक्रमण और 1 लाख हिन्दुओं का कत्ल ।

४. सन् 1196 कुतुब अल दीन ऐबक का आक्रमण और 1 लाख से ज्यादा हिन्दुओं का कत्ल ।

५. सन् 1197 मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी का अाक्रमण करके नालन्दा विश्वविधालय को धव्स्त करना और 10 हजार हिन्दु और बौद्धष्ठो का कत्ल ।

६. गयासुद्दीन बलबन का आक्रमण और मेवात के 1 लाख राजपुतो का कत्ल करना ।

७. सन् 1323 मे मुहम्मद बिन तुगलक के द्वारा 12 हजार हिन्दुओं का कत्ल ।

८. सन् 1353 मे फिरोज शाह तुगलक के द्वारा 1 लाख 80 हजार हिन्दुओं का कत्ल ।

९. सन् 1366 में बहमनी सल्तनत के द्वारा 5 लाख हिन्दुओं का कत्ल, गर्भवती स्त्रियों का पेट काटना, और हिन्दु महिलाओं के साथ दुराचार ।

१०. सन् 1398 तैमुर का भारत पर आक्रमण करके 45 लाख हिन्दुओं का हरियाणा मे कत्ल करना ।

११. सन् 1398 मे तैमुर द्वारा पर भटनेर के किले पर आक्रमण करके सम्पुर्ण आबादी का सफाया।

१२. सन् 1398 मे ही तैमुर द्वारा गाजियाबाद के निकट लगभग 1 लाख स्त्रियों और बच्चो का दुराचार के बाद कत्ल करना । ।

१३. सन् 1398 मे तैमुर द्वारा दिल्ली मे 1.5 लाख हिन्दु समेत अन्य धर्मो के लोगो का कत्ल ।

१४. सन् 1399 में तैमुर मेरठ में द्वारा 3 लाख हिन्दुओं का कत्ल, और लाखो स्त्रियों के साथ दुराचार ।

१५. मार्च 1527 खानवा के युद्ध मे बाबर की सेना द्वारा 20 हजार हिन्दुओं की हत्या, जिसमे से 10 हजार राजपुत सैनिक बलिदान हुये ।

१६. सन् 1560 मे अकबर द्वारा नरसिंहपुर जिले मे 48 हजार हिन्दुओं की हत्या, मुख्यत: राजपुत मारे गये ।

१७. सन् 1565 मे दक्कन के सुलतान द्वारा 1 लाख से अधिक हिन्दुओं का नरसंहार और सभी मुख्य मन्दिरो को ध्वस्त करना ।

१८. सन् 1568 अकबर द्वारा किये गये आक्रमण मे चितौड़ केे 30 हजार राजपुतो का नरसंहार, और 8 हजार स्त्रियों का हरम मे जाने से बचने के लिये स्वयं को समापत कर लेना ।

१९. सन् 1618 से 1707 के मध्य मुगल साम्रज्य और ओरंगजेब के द्वारा 46 लाख हिन्दुओं की हत्या, लगभग 15 लाख ब्राहम्ण की हत्या काशी, हरिद्वार व अन्य स्थानो पर ।

२०. सन् 1738 से लेकर 1740 के मध्य नादिर शाह( फारसीयो द्वारा) के द्वारा 3 लाख हिन्दुओं की हत्या ।

२१. सन् १७६१ मे अफगानो के आक्रमण पर मराठो के साथ युद्ध मे 70 हजार मराठों का बलिदान होना, और 22 हजार मराठा स्त्रियों और बच्चों को गुलाम बनाना।

(बाबरी मस्जिद विवाद और वामपंथी फरेब)

———

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ने विवादित स्थल पर मंदिर होने के शोधपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्षों की पुष्टि तो की ही थी, साथ ही साथ मस्जिद-कमिटी की ओर से गवाह के तौर पर वामपंथी इतिहासकार इरफ़ान हबीब की अगुवाई में पेश हुए देश के तमाम वामपंथी इतिहासकारों के फरेब को भी न्यायालय ने उजागर किया था l न्यायालय को ये टिप्पणी करनी पडी थी कि इन इतिहासकारों ने अपने रवैये से उलझाव, विवाद, और सम्प्रदायों में तनाव पैदा करने की कोशिश की और इनका विषय-ज्ञान छिछला है l क्रॉस एग्जामिनेशन में पकड़े गए इनके फरेबों के दृष्टांत आपको हैरत में डाल देंगे :-

(1) वामपंथी इतिहासकार प्रोफ़ेसर मंडल ने ये स्वीकारा कि खुदाई का वर्णन करती उनकी पुस्तक दरअसल उन्होंने बिना अयोध्या गए ही (मामले को भटकाने के लिए) लिख दी थी l

(2) वामपंथी इतिहासकार सुशील श्रीवास्तव ने ये स्वीकार किया कि प्रमाण के तौर पर पेश की गयी उनकी पुस्तक में संदर्भ के तौर पर दिए पुस्तकों का उल्लेख उन्होंने बिना पढ़े ही कर दिया है l

(3) जेएनयू की इतिहास-प्रोफ़ेसर सुप्रिया वर्मा ने ये स्वीकार किया कि उन्होंने खुदाई से संदर्भित ‘राडार सर्वे’ की रिपोर्ट को पढ़े बगैर ही रिपोर्ट के गलत होने की गवाही दे दी थी l

(4) अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर जया मेनन ने ये स्वीकारा कि वे तो खुदाई स्थल पर गयी ही नहीं थी लेकिन ये (झूठी) गवाही दे दी थी कि मंदिर के खंभे बाद में वहां रखे गए थे l

(5) ‘एक्सपर्ट’ के तौर पर उपस्थित वामपंथी सुविरा जायसवाल जब क्रोस एग्जामिनेशन में पकड़ी गयीं तब उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें मुद्दे पर कोई ‘एक्सपर्ट’ ज्ञान नहीं है; जो भी है वो सिर्फ ‘अखबारी खबरों’ के आधार पर ही है l

(6) पुरात्व्वेत्ता वामपंथी शीरीन रत्नाकर ने सवाल-जवाब में ये स्वीकारा कि दरअसल उन्हें कोई “फील्ड-नॉलेज” है ही नहीं l

(7) “एक्सपर्ट” प्रोफ़ेसर मंडल ने ये भी स्वीकारा था, “मुझे बाबर के विषय में इसके अलावा – कि वो सोलहवीं सदी का एक शासक था – और कुछ ज्ञान नहीं है l न्यायधीश ने ये सुन कर कहा था कि इनके ये बयान विषय सम्बंधित इनके छिछले ज्ञान को प्रदर्शित करते है l

(8) वामपंथी सूरजभान मध्यकालीन इतिहासकार के तौर पर गवाही दे रहे थे पर क्रॉस एग्जामिनेशन में ये तथ्य सामने आया कि वे तो इतिहासकार थे ही नहीं, मात्र पुरातत्ववेत्ता थे l

(9) सूरजभान ने ये भी स्वीकारा कि डी एन झा और आर एस शर्मा के साथ लिखी उनकी पुस्तिका “हिस्टोरियंस रिपोर्ट टू द नेशन” दरअसलद खुदाई की रपट पढ़े बगैर ही (मंदिर संबंधी प्रमाणों को झुठलाने के) दबाव में केवल छै हफ्ते में ही लिख दी गयी थी l

(10) वामपंथी शिरीन मौसवी ने क्रॉस एग्जामिनेशन में ये स्वीकार किया कि उन्होंने झूठ कहा था कि राम-जन्मस्थली का ज़िक्र मध्यकालीन इतिहास में नहीं है l

दृष्टान्तों की सूची और लम्बी है l पर विडंबना तो ये है कि लाज हया को ताक पर रख कर वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने इन्हीं फरेबी वामपंथी इतिहासकारों व अन्य वामपंथियों का नेतृत्व करते हुए न्यायालय के इसी फैसले के खिलाफ लम्बे लम्बे पर्चे भी लिख डाले थे l पर शर्म इन्हें आती है क्या ?

(सन्दर्भ: Allahabad High court verdict dated 30 September 2010 )

From: Mohan Natarajan < >

 

14 years ago on this day 24 Kashmiri Pandits were massacred

in Nadimarg Kashmir, here’s their story

By Hemant Bijapurkar

Posted on March 23, 2017

 

It was the night of 23rd March 2003. At about 10:30 PM at night masked terrorists entered Nadimarg, a sleepy village in Pulwama District of Jammu and Kashmir and massacred 24 Kashmiri Pandits including men, women and toddlers.

Now 14 years later we revisit the dastardly incident and remember just one aspect of one of the biggest injustices heaped on the citizens of this country since independence. We were aided in this story by the tweets of Journalist Rahul Pandita who provided information which the establishment has tried to hard to stifle.

In 2003 the village of Nadimarg was home to only some 52 Kashmiri Pandits spread across 4 extended families, with others having already fled the valley during the 1990 exodus of their community. In the days leading up to the massacre, on 21st and 22nd March the assailants which comprised of members of a terrorist group and some youths from a nearby village scouted Nadimarg to ascertain the location of the Kashmiri Pandits.

And on that fateful night of the 23rd, they came with guns. As Rahul narrates, Pandits were taken to a courtyard, made to kneel down and shot in their heads. The assailants didn’t even spare toddlers.

The police later provided a token security to the surviving Pandits in the desperate hope that they stayed on. Not because they wished for the Pandits to remain in their motherland but because they wanted to ensure that the ashes of the victims were disposed of in Kashmir. They feared their making way to Jammu and then possibly getting paraded on the streets could have become an instigator for communal riots.

Mohan Bhatt one of the survivors of this attack recounted how he had managed to save himself by hanging on a roof wedge. His parents, sister and uncle weren’t so fortunate. To further aggravate his pain, the very next day he caught a man from his own village selling his dead mother’s Dejharu, a piece of jewelry sacred to Kashmiri Pandits.

Mohan revealed another shocking detail when he claimed that the terrorists were even accompanied by a few policemen. Even reports from 2003 were suggestive of an investigation against 9 police officers for being complicit in the crime. There were also reports of two terrorists involved in the attack visiting the nearby police picket for months before the attack. But almost all the facts still lie behind a veil of secrecy.

The motive? The assailants reportedly wanted to celebrate Pakistan Resolution Day which also falls on 23rd March or wanted to extol revenge for the post Godhra riots in Gujarat. We might never know as the local police hasn’t made any effort to reveal the identity of the killers let alone punish them.

Most of the above details are a result of a ground zero investigation by Kashmiri Pandit Sangarsh Samiti (KPSS) an organization formed by a group of Pandits who have stayed back in the valley. The president of KPSS Sanjay K Tikoo called it a well-planned attempt and also alleged that nobody has been for the heinous attack.

It has been fourteen years since the attack took place and battling the haunting memory of that fateful night, the Pandits from Nadimarg still await justice.

 

From: Pramod Agrawal < >

 

आपने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का नाम तो सुना होगा,

 

ट्रिपल तलाक इत्यादि के मौके पार इसका नाम कई बार टीवी पर आया, मीडिया में आया असल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक NGO है जिसका मुख्य दफ्तर दिल्लीमें है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आज हमारी संसद और यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट को भी कई मौकों पर धमकी देता है भारत के खिलाफ जंग की धमकी, जिहाद की धमकी, हिंसा की धमकी इत्यादिऔर अब जो हम आपको इस संस्था के बारे में बताने जा रहे है, कदाचित आपको ये जानकारियां कहीं मिले ही न, ये संगठन कब बना किसने बनायावैसे आपके मन में आता होगा की चूँकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है तो इसे मुसलमानो ने ही बनाया होगापर अब जानिए इसकी सच्चाई .

 

1971 आते आते इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता बहुत घटने लगी थी, 1975 में इंदिरा गाँधी ने आपतकाल भी लगाया था, इंदिरा गाँधी को ये देश जैसे विरासत में जवाहर लाल नेहरू से मिला था, इंदिरा इसे अपनी जागीर समझती थी, घटती लोकप्रियता, और विपक्ष की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान होकर इंदिरा गाँधी ने सेक्युलर भारत में मुसलमानो के तुष्टिकरण के लिए स्वयं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की 1971 में स्थापना कीये भी.

 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए इंदिरा गाँधी के विशेष नियम भी बनाया, इस संस्था का आज तक कभी ऑडिट नहीं हुआ है, जबकि अन्य NGO का होता है पर इसे विशेष छूट मिली हुई हैये . अरब के देशों से कितना पैसा पाती है, उस पैसे का क्या करती है, किसीको कुछ नहीं पता .

 

91% मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक के खिलाफ है, फिर भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट को हिंसा तक की धमकी देता है, आपको जानकरआश्चर्य होगा की 95% मुसलमान महिलाओ को तो ये भी नहीं पता की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड असल में है क्या.

 

इस NGO में केवल कट्टरपंथी मुस्लिम ही है, नरेंद्र मोदी के सर पर फतवा देने वाला इमाम बरकाती भी इस NGO का सदस्य है, जिहादी किस्म के ही लोग इस संस्था में हैं, इस संस्था में 1 भी महिला नहीं है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानो का नहीं बल्कि इंदिरा गाँधी का बनाया हुआ है .

 

From: Pramod Agrawal < >

 

Castes in Muslims and Christians

 

Christianity ….One Christ, One Bible Religion…

 

But the Latin Catholic will not enter Syrian Catholic Church.

These two will not enter Marthoma Church .

These three will not enter Pentecost Church .

These four will not enter Salvation Army Church .

These five will no enter Seventh Day Adventist Church .

These six will not enter Orthodox Church.

These seven will not enter Jacobite church.

Like this there are 146 castes in Kerala alone for Christianity,

each will never share their churches for fellow Christians!

 

Now Muslims..! One Allah, One Quran, One Nebi….! Great unity?

 

Among Muslims, Shia and Sunni kill each other in all the Muslim countries.

The religious riot in most Muslim countries is always between these two sects.

The Shia will not go to Sunni Mosque.

These two will not go to Ahamadiya Mosque.

These three will not go to Sufi Mosque.

These four will not go to Mujahiddin mosque.

Like this it appears there are 13 castes in Muslims.

 

Killing / bombing/conquering/ massacring/. .. each other !

The American attack on Iraq was fully supported by all the Muslim countries surrounding Iraq !

One Allah, One Quran, One Nebi….????

 

Hindus –

 

They have 1,280 Religious Books, 10,000 Commentaries, more than one lakh sub-commentaries for these foundation books, innumerable presentations of one God, variety of Aacharyas, thousands of Rishies, hundreds of languages.

 

Still they all go to all other TEMPLES and they are peaceful and tolerant, and seek unity with others by inviting them to worship with them whatever God they wish to pray for!

 

Hindus never quarreled one another for the last ten thousand years in the name of religion.

BE VERY PROUD TO BE A HINDU

(but please do not tolerate intolerant religions or ideologies per the Vedic dharma. – skanda987)

 

::::: Name of the Sects in Islam and their Basic Beliefs :::::

 

  1. Jarudiah:

Followers of Abu’l-Jarud. They believe Holy Prophet (pbuh) designated Al-Isa as the Imam by his characteristics but not by name.

 

  1. Sulamania:

Followers of Sulaiman ibn-Jarir al-Zaidi. They believed Imamat was a matter of Jaririya conference and could be confirmed by two best Muslims.

 

  1. Butriyah:

They did not dispute the Khilafat of Uthman (ra), neither they attack him nor Hurariyah praise him.

 

  1. Yaqubiyya:

They accepted the Khilafat of Abu Bakr (ra) and Umar (ra), but did not reject those who rejected these Khulifaa. They also believed that Muslim commiters of Major sins will be in hell forever.

 

  1. Hanafiyah:

Followers of the Imammate of Muhammad ibn-al-Hanifah. They believe that Allah might have had a beginning.

 

  1. Karibiyah:

They believed that Imam Muhammad ibn-al-Hanifah is not dead and is the Imam Ghaib (in disappearance) and the expected Mahdi.

 

  1. Kamiliyah:

Followers of Abu-Kamil. They believed companions to be heretic because they forsook their allegiance to Ali (ra) and condemn Ali (ra) for ceasing to fight them. They believed in the returning of the dead before the Day of Resurrection and that Satan is right in preferring fire to clay.

 

  1. Muhammadiyyah:

Followers of Muhammad ibn-Abdullah ibn-al-Hassan. They do not believe/Mughairiyah that Imam Muhammad ibn-Abdullah died and that he is the Imam Ghaib and awaited Mahdi.

 

  1. Baqiriyah:

Followers of Muhammad ibn-Ali al-Baqir. They believe him to be the Imam Ghaib and expected Mahdi.

 

  1. Nadisiyah:

They believe that those who consider themselves better than anyone else are Kafirs (disbelievers).

 

  1. Sha’iyah:

They believe that the one who has recited La Ilaha Il-Allah (there is none worthy of worship except Allah), whatever she or he does, will never be punished.

 

  1. Ammaliyah:

They believe that faith for one is what he/she sincerely practices.

 

  1. Ismailiyah:

They believe in the continuity of Imammate among the descendants of Ismail ibn-Ja’far.

 

  1. Musawiyah:

They believe Musa ibn-Ja’far to be the Imam Ghaib and expected Mahdi / Mamturah.

 

  1. Mubarakiyah:

They believe in the continuity of Imammate among the descendants of Muhammad ibn-Ismail ibn-Ja’far.

 

  1. Kathiyah:

They believe that expected Mehdi will be twelveth Imam among the /Ithn Áshariya descendants of the Áli ibn-abi-Talib. (The Twelvers).

 

  1. Hashamiya:

They Predicate a body to Allah and also allege Prophet (pbuh) of disobedience/ Taraqibiyah to Allah

 

  1. Zarariyah:

They believe that Allah did not live nor had any attributes till He created for Himself life and His attributes.

 

  1. Younasiyah:

Followers of Younas ibn-Ábd-al-Rahman al-Kummi. They believe that Allah is borne by the bearers of His Throne, though He is stronger than they are.

 

  1. Shaitaniyah/Shireekiyah:

They believed in the view that deeds of servants of Allah are substances; and a servant of Allah can really produce a substance.

 

  1. Azraqaih:

Followers of Nafi ibn-al-Azraq. They do not believe in the good dreams and visions and claim that all forms of revelations have ended.

 

  1. Najadat:

Followers of Najdah ibn-Ámir al-Hanafi. They abolished the punishment of drinking wine also they believed that sinners of this sect would not be treated in hellfire but some other place before allowed in Paradise.

 

  1. Sufriyah:

Followers of Ziyad ibn-al-Asfar. They believed that sinners are in fact polytheists.

 

  1. Ajaridah:

Followers of Abd-al-Karim ibn-Ajrad. They believed that a child should be called to Islam after it has attained maturity. Also they believed booty of war to be unlawful till the owner is killed.

 

  1. Khazimiyah:

They believe Allah loves men of all faiths even if one has been a disbeliever most of his life.

 

  1. Shuaibiyah/Hujjatiyah:

They believed that what Allah desires does happen no matter what and what does not happen it means Allah desires it not.

 

  1. Khalafiyah:

Followers of Khalaf. They do not believe in fighting except under the leadership of an Imam.

 

  1. Ma’lumiyah/Majhuliah:

They believed that whoever did not recognise Allah by His names was ignorant of Him and anyone ignorant of Him was a disbeliever.

 

  1. Saltiyah:

Followers of Salt ibn-Usman. They believed in the conversion of adults only and if father has converted to Islam children were considered disbelievers till they reach maturity.

 

  1. Hamziyah:

Followers of Hamza ibn-Akrak. They believe that children of polytheists are condemned to hell.

 

  1. Tha’libiyah:

Followers of Tha’labah ibn-Mashkan. They believe that parents remain guardians over their children of any age until children make it clear to parents that they are turning away from truth.

 

  1. Ma’badiyah:

They did not believe in taking or giving alms from or to slaves.

 

  1. Akhnasiyah:

They do not believe in waging a war except in defence or when the opponent is known personally.

 

  1. Shaibaniyah/Mashbiyah:

Followers of Shaiban ibn-Salamah al-Khariji. They believe that Allah resembles His creatures.

 

  1. Rashidiyah:

They believe that land watered by springs, canals or flowing rivers should pay half the Zakat (tithe), while land watered by rain only should pay he full Zakat.

 

  1. Mukarramiyah/tehmiyah:

Followers of abu-Mukarram. They believe that ignorance constitutes as disbelief. Also that Allah enmity or friendship depends upon the state of a persons’ belief at his death.

 

  1. Abadiyah/Afáliyah:

They consider Abdullah ibn-Ibad as their Imam. They believe in doing good deeds without the intention of pleasing Allah.

 

  1. Hafsiyah:

Consider Hafs ibn-abi-l-mikdam as their Imam. They believe that only knowing Allah frees one from polytheism.

 

  1. Harithiya:

Followers of Harith ibn-Mazid al-Ibadi. They believe that the ability precedes the deeds.

 

  1. Ashab Ta’áh:

They believe that Allah can send a prophet without giving him any sign to prove his prophecy.

 

  1. Shabibiyah/Salihiyah:

Followers of Shabib ibn-Yazid al-Shaibani. They believe in the Imamate of a woman named Ghazalah.

 

  1. Wasiliyah:

Followers of Wasil ibn-‘Ata al-Ghazza. They believe that does who commit major sins will be punished in hell but still remain believers.

 

  1. Ámriyah:

Followers of Amir ibn-Ubaid ibn-Bab. They reject the legal testimony of people from supporters of either side of the battle of Camel.

 

  1. Hudhailiyah/Faniya:

Followers of abu-al-Hudhail Muhammad ibn-al-Hudhail. They believe that both Hell and Paradise will perish and that preordination of Allah can cease, at which time Allah will no longer be omnipotent.

 

  1. Nazzamiyah:

Followers of abu-Ishaq Ibrahim ibn-Saiyar. They do not believe in the miraculous nature of the Holy Quran nor do they believe in the miracles of the Holy Prophet (pbuh) like splitting the moon.

 

  1. Mu’ammariyah:

They believe that Allah neither creates life nor death but it is an act of the nature of living body.

 

  1. Bashriyah:

Followers of Bashr ibn-al-Mu’tamir. They believe that Allah may forgive a man his sins and may change His mind about this forgiveness and punish him if he is disobedient again.

 

  1. Hishamiyah:

Followers of Hisham ibn-ämr al-Futi. They believe that if a Muslim community come to consensus it needs an Imam and if it rebels and kills its Imam, no one should be chosen an Imam during a rebellion.

 

  1. Murdariyah:

Followers of Isa ibn-Sabih. They believe that staying in close communication with the Sultan (ruler) makes one unbeliever.

 

  1. Ja’friyah:

Followers of Ja’far ibn-Harb and Ja’far ibn-Mubashshir. They believe that drinking raw wine is not punishable and that punishment of hell could be inferred by a mental process.

 

  1. Iskafiyah:

Followers of Muhammad ibn-Abdallah al-Iskafi. They believe that Allah has power to oppress children and madman but not those who have their full senses.

 

  1. Thamamiyah:

Followers of Thamamah ibn-Ashras al-Numairi. They believe that he whom Allah does not compel to know Him, is not compelled to know and is classed with animals who are not responsible.

 

  1. Jahiziayh:

Followers of ‘Ámr ibn-Bahr al-Jahiz. They believe that Allah is able to create a thing but unable to annihilate it.

 

  1. Shahhamiyah/Sifatiyah:

Followers of abu-Yaqub al-Shahham. They believe that everything determined is determined by two determiners, one the creator and the other acquirer.

 

  1. Khaiyatiyah/Makhluqiyah:

Followers of abu-al-Husain al-Khaiyat. They believe that everything non-existent is a body before it appears, like man before it is born is a body in non-existence. Also that every attribute becomes existent when it makes its appearance.

 

  1. Ka’biyah:

Followers of abu-qasim Abdullah ibn-Ahmed ibn-Mahmud al-Banahi known as al-Ka’bi. They believe that Allah does not see Himself nor anyone else except in the sense that He knows himself and others.

 

  1. Jubbaiyah:

Followers of abu-‘Ali al-Jubbai. They believe that Allah obeys His servants when he fulfils their wish.

 

  1. Bahshamiyah:

Followers of abu-Hashim. They believe that one, who desires to do a bad deed, though may not do it, commit infidelity and deserve punishment.

 

  1. Ibriyah:

They believe that Holy Prophet (pbuh) was a wise man but not a prophet.

 

  1. Zanadiqiyah:

They believe that the incident Miraj was a vision of the Holy prophet (pbuh) and that we can see Allah in this world.

 

  1. Qabariyya:

They do not believe in the punishment of grave.

 

  1. Hujjatiya:

They do not believe in the punishment for deeds on the grounds.

 

  1. Fikriyya:

They believe that doing Dhikr and Fikr (Remembering and thinking about Allah) is better than worship.

 

  1. ‘Aliviyah/Ajariyah:

They believe that Hazrat Ali shared Prophethood with Mohammad (pbuh)

 

  1. Tanasikhiya:

They believe in the re-incarnation of soul.

 

  1. Rajiýah:

They believe that Hazrat Ali ibn-abi-Talib will return to this world.

 

  1. Ahadiyah:

They believe in the Fardh (obligations) in faith but deny the Sunnah.

 

  1. Radeediyah:

They believe that this world will live forever.

 

  1. Satbiriyah:

They do not believe in the acceptance of repentance.

 

  1. Lafziyah:

They believe that Quran is not the word of God but only its meaning and essence is the word of God. Words of Quran are just the words of the narrator.

 

  1. Ashariyah:

They believe that Qiyas (taking a guess) is wrong and amounts to disbelief.

 

  1. Bada’iyah:

They believe that obedience to Ameer is obligatory no matter what he commands.

 

*Islamic Encyclopaedia published by Munshi Mehboob ‘Alim’ (editor Newspaper Paisa, Lahore, Pakistan). Page 570-572.

 

*Al-Farq Bain Al Firaq, by Abu Mansur ‘abd-al-Kahir ibn-Tahir al-Baghdadi, Translated into English by Kate Chambers Seelye, (AMS Press, NewYork 1996)

 

*Kitab Lajawaab Masmay ba-Mazhab al-Islam by Hakeem Maulvi Muhammad Najam al-Ghani Rampuri, 1st edition, (Munshi Nau Lakshoor Lakhnau 1924).

 

From Pramod Agrawal < >

 

शरीर के 7 चक्र बनाते हैं चमकदार,

आप भी कर सकते हैं उन्हें सक्रिय

 

  1. मूलाधार चक्र:

 

यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाला यह ‘आधार चक्र’ है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।

 

मंत्र : लं

चक्र जगाने की विधि : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है- यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।

 

प्रभाव :  इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।

 

  1. स्वाधिष्ठान चक्र-

 

यह वह चक्र है, जो लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर स्थित है जिसकी 6 पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है तो आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।

 

मंत्र : वं

कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।

 

प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश

होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हों तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।

 

  1. मणिपुर चक्र :

 

नाभि के मूल में स्थित यह शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो 10 कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।

 

मंत्र : रं

कैसे जाग्रत करें : आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।

 

प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं।

आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।

 

  1. अनाहत चक्र-

 

हृदयस्थल में स्थित द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही अनाहत चक्र है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं। आप चित्रकार, कवि, कहानीकार, इंजीनियर आदि हो सकते हैं।

 

मंत्र : यं  कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।

 

प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता है। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।

 

  1. विशुद्ध चक्र-

 

कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां विशुद्ध चक्र है और जो 16 पंखुरियों वाला है। सामान्य तौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होंगे।

 

मंत्र : हं   कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

 

प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर 16 कलाओं और 16 विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

 

  1. आज्ञाचक्र :

 

भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में आज्ञा चक्र है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। इसे बौद्धिक सिद्धि कहते हैं।

 

मंत्र : उ

कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

 

प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति सिद्धपुरुष बन जाता है।

 

  1. सहस्रार चक्र :

 

सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।

 

मंत्र : ॐ

कैसे जाग्रत करें :  मूलाधार से होते हुए ही सहस्रार तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।

 

प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही मोक्ष का द्वार है।

From Pramod Agrawal < >

 

Scottish Diplomacy  (Slightly re-worded, and last item added by skanda987)
Jeff Foxworthy on Muslims:  1. If one refines heroin for a living,

but one has a moral objection to liquor.  One may be a Muslim  2. If one owns a £3,000 machine gun and £5,000 rocket launcher,

but one can’t afford shoes, One may be a Muslim  3. If one has more wives than teeth,  One may be a Muslim  4. If one wipes one’s butt with one’s bare hand,

but considers bacon unclean, One may be a Muslim  5. If one thinks vests come in two styles:

Bullet-proof and suicide,  One may be a Muslim  6. If one can’t think of anyone against whom

one hasn’t declared Jihad,  One may be a Muslim  7. If one considers television dangerous,

but routinely carries explosives in one’s clothing,  One may be a Muslim  8. If one was amazed to discover that cell phones

have uses other than setting off roadside bombs, One may be a Muslim 9. If one treats women not as human but a private property

and think every man should own at least four,  One may be a Muslim  10. If one find this offensive or racist

and doesn’t forward it,  One may be a Muslim

 

  1. If one joins a gang to rape non-Muslim females of any age in public and in daylight,

and kills one’s daughter, sister, or mother because she was found to have an affair with another man,

One may be a Muslim