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Archive for the ‘Articles’ Category

Saratchandra Panda < > wrote:

Sir,

This refers to the report, “Hindu Rashtra will entail new Pak demand, jihad” published in The Pioneer of 11.05 2017.

This report raises a few questions and comments:

Maulana Nurur Rehman Barkati, the Shahi Imam of Kolkata’s Tipu Sultan Mosque and one of the biggest champions of Mamata Banerjee’s policy of minority appeasement, threatened jihad should India be declared a Hindu Rashtra and azaan and Quran were banned.

  1. On what basis the Maulana assumed that azaan and the Quran would be banned in the event of India be declared a Hindu Rashtra? This reminds the 1946 Karachi speech of MA Jinnah who reportedly said that if there would be no Pakistan, Muslims would not be allowed to pray in mosques, forced to eat vegetarian food and wear loin cloth (alluding to Mahatma Gandhi). These were blatant lies. The Maulana is indulging similar lies after 70 years.
  2. Regarding jihad, it started in right earnest in India from 712 A D when Muhammad Bin Kasim invaded Sind. It peaked when Jinnah declared the Day of Direct Action on 16 August, 1946 in which at least 10,000 Hindus were butchered by Muslim League goons in a matter of few days. And these riots led to the formation of Pakistan in August 1947. Then, the newly formed Pakistan had 3 crore Hindus and the truncated India had 4 crore Muslims constituting about 25% and 10% of population respectively. Now, the whole world knows that jihad is nothing but gangsterism, fiendish violence against those innocent fellow human beings who do not toe their line of thinking. I would like to ask the Maulana if jihad conforms to civilized behavior and conduct?
  3. Has he commented on the decimation of Hindu/Sikh/Buddhist population in Pakistan and Bangladesh and the expulsion of Hindus from Kashmir? If he has no objection of Pakistan and Bangladesh becoming Islamic states, why should he object of India becoming a Hindu Rashtra?
  4. He brings good conduct certificate to the Mamata Banerjee government from imams of Middle East countries. So, his heart is there and not in India where he is living and wants to break it further. This is clearly seditious and poses a challenge for the chief minister to take against him if she believes in the integrity of the country.

Submitted for publication.

= = =

(Skanda987’s comment: The CM is a Muslims and has no interest in Hindu dharma or nation.  The root cause of the problem is the existence of anti-Vedic forcibly invaded intolerant and barbaric Islam. It needs to be purged out of Bhaarat by making Bhaarat a Vedic State (not secular) where Islam will be illegal.  The Hindustani Muslims will have a choice to quit Islam under Ghar Waapasi program, or move out of Hindustan.  There is no other choice that will save Hindustan for Hindus.  At the same time, the Hindus need to know dharma correctly, and live per dharma correctly.  That will stop any malpractice of dharma, such as caste by birth, untouchability, dowry, corruption, etc. You cannot make the barbarians (the asuras) understand with civil talks.  – Skanda987)

 

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From: Pramod Agrawal < >

कुछ लोग सोचते हैं की सूफि बड़े शांतिप्रिय होते हैं, असल में सूफीवाद धर्मान्तरण की बुनियाद है !

किसी भी दैनिक अख़बार को उठा कर देखिये आपको पढ़ने को मिलेगा की आज हिंदी फिल्मों का कोई प्रसिद्द अभिनेता या अभिनेत्री अजमेर में गरीब नवाज़ अथवा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर चादर चढ़ा कर अपनी फिल्म के हिट होने की मन्नत मांगने के लिए गया। 

भारतीय समाज में भी एक विशेष आदत हैं, वह हैं अँधा अनुसरण करने की। 

क्रिकेट स्टार, फिल्म अभिनेता, बड़े उद्योगपति जो कुछ भी करे भी उसका अँधा अनुसरण करना चाहिए चाहे बुद्धि उसकी अनुमति दे चाहे न दे.अज्ञानवश लोग दरगाहों पर जाने को हिन्दू मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे का प्रतिक मान लेते हैं , लेकिन उनको पता नहीं कि सूफीवाद भी कट्टर सुन्नी इस्लाम एक ऐसा संप्रदाय है ,जो बिना युद्ध और जिहाद के हिन्दुओं को मुसलमान बनाने में लगा रहता है । 

भारत -पाक में सूफियों के चार फिरके हैं , पूरे भारत में इनकी दरगाहें फैली हुई हैं ,जहां अपनी मन्नत पूरी कराने के लालच में हिन्दू भी जाते हैं 
1-चिश्तिया ( چشتی‎ )
2-कादिरिया ( القادريه,)
3-सुहरावर्दिया سهروردية‎)
4-नक्शबंदी ( نقشبندية‎ )

इन सभी का उद्देश्य हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराना और दुनिया में ” निज़ामे मुस्तफा -نظام مصطفى‎ ” स्थापित करना है . जिस समय भारत की आजादी का आंदोलन चल रहा था सूफी ” तबलीगी जमात – تبلیغی جماعت” बनाकर गुप्त रूप से हिन्दुओं का धर्म परवर्तन कराकर मुस्लिम जनसंख्या बढ़ने का षडयंत्र चला रहे थे . 

दिल्ली के एक कोने में निजामुद्दीन औलिया की दरगाह हैं। 1947से पहले इस दरगाह के हाकिम का नाम था ख्वाजा हसन निजामी था।(1878-1955)

आज के मुस्लिम लेखक निज़ामी की प्रशंसा उनके उर्दू साहित्य को देन अथवा बहादुर शाह ज़फर द्वारा 1857 के संघर्ष पर लिखी गई पुस्तक को पुन: प्रकाशित करने के लिए करते हैं। परन्तु निज़ामी के जीवन का एक और पहलु था। वह गुप्त जिहादी था धार्मिक मतान्धता के विष से ग्रसित निज़ामी ने हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के लिए 1920 के दशक में एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम था दाइये इस्लाम-دايءاسلام ” इस पुस्तक को इतने गुप्त तरीके से छापा गया था की इसका प्रथम संस्करण का प्रकाशित हुआ और कब समाप्त हुआ इसका मालूम ही नहीं चला। इसके द्वितीय संस्करण की प्रतियाँ अफ्रीका तक पहुँच गई थी। इस पुस्तक में उस समय के 21 करोड़ हिन्दुओं में से 1 करोड़ हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था।

एक आर्य सज्जन को उसकी यह प्रति अफ्रीका में प्राप्त हुई जिसे उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी को भेज दिया। स्वामी ने इस पुस्तक को पढ़ कर उसके प्रतिउत्तर में पुस्तक लिखी जिसका नाम था “खतरे का घंटा”। इस पुस्तक के कुछ सन्दर्भों के दर्शन करने मात्र से ही लेखक की मानसिकता का बोध हमें आसानी से मिल जायेगा की किस हद तक जाकर हिन्दुओं को मुस्लमान बनाने के लिए मुस्लिम समाज के हर सदस्य को प्रोत्साहित किया गया था जिससे न केवल धार्मिक द्वेष के फैलने की आशंका थी अपितु दंगे तक भड़कने के पूरे असार थे। आइये इस पुस्तक के कुछ अंशों का अवलोकन करते हैं।

1- फकीरों के कर्तव्य – जीवित पीरों की दुआ से बे औलादों के औलाद होना या बच्चों का जीवित रहना या बिमारियों का दूर होना या दौलत की वृद्धि या मन की मुरादों का पूरा होना, बददुआओं का भय आदि से हिन्दू लोग फकीरों के पास जाते हैं बड़ी श्रद्धा रखते हैं। मुस्लमान फकीरों को ऐसे छोटे छोटे वाक्य याद कराये जावे,जिन्हें वे हिन्दुओं के यहाँ भीख मांगते समय बोले और जिनके सुनने से हिन्दुओं पर इस्लाम की अच्छाई और हिन्दुओं की बुराई प्रगट हो।

2- गाँव और कस्बों में ऐसा जुलुस निकालना जिनसे हिन्दू लोगों में उनका प्रभाव पड़े और फिर उस प्रभाव द्वारा मुसलमान बनाने का कार्य किया जावे।

3-गाने बजाने वालों को ऐसे ऐसे गाने याद कराना और ऐसे ऐसे नये नये गाने तैयार करना जिनसे मुसलमानों में बराबरी के बर्ताव के बातें और मुसलमानों की करामाते प्रगट हो।

4- गिरोह के साथ नमाज ऐसी जगह पढ़ना जहाँ उनको दूसरे धर्म के लोग अच्छी तरह देख सके और उनकी शक्ति देख कर इस्लाम से आकर्षित हो जाएँ।

5-. ईसाईयों और आर्यों के केन्द्रों या उनके लीडरों के यहाँ से उनके खानसामों, बहरों, कहारों चिट्ठीरसारो, कम्पाउन्डरों,भीख मांगने वाले फकीरों, झाड़ू देने वाले स्त्री या पुरुषों, धोबियों, नाइयों, मजदूरों, सिलावतों और खिदमतगारों आदि के द्वारा ख़बरें और भेद मुसलमानों को प्राप्त करनी चाहिए।

6- सज्जादा नशीन अर्थात दरगाह में काम करने वाले लोगों को मुस्लमान बनाने का कार्य करे।

7- ताबीज और गंडे देने वाले जो हिन्दू उनके पास आते हैं उनको इस्लाम की खूबियाँ बतावे और मुस्लमान बनने की दावत दे।

8-. देहाती स्कूलों के मुस्लिम अध्यापक अपने से पढने वालों को और उनके माता पिता को इस्लाम की खूबियाँ बतावे और मुस्लमान बनने की दावत दे।

9- नवाब रामपुर, टोंक, हैदराबाद , भोपाल, बहावलपुर और जूनागढ आदि को , उनके ओहदेदारों , जमींदारों , नम्बरदार, जैलदार आदि को अपने यहाँ पर काम करने वालो को और उनके बच्चों को इस्लाम की खूबियाँ बतावे और मुस्लमान बनने की दावत दे।

10. माली, किसान,बागबान आदि को आलिम लोग इस्लाम के मसले सिखाएँ क्यूंकि साधारण और गरीब लोगों में दीन की सेवा करने का जोश अधिक रहता हैं।

11- दस्तगार जैसे सोने,चांदी,लकड़ी, मिटटी, कपड़े आदि का काम करने वालों को अलीम इस्लाम के मसलों से आगाह करे जिससे वे औरों को इस्लाम ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित करे।

12- फेरी करने वाले घरों में जाकर इस्लाम के खूबियों बताये , दूकानदार दुकान पर बैठे बैठे सामान खरीदने वाले ग्राहक को इस्लाम की खूबियाँ बताये।

13- पटवारी, पोस्ट मास्टर, देहात में पुलिस ऑफिसर, डॉक्टर , मिल कारखानों में बड़े औहदों पर काम करने वाले मुस्लमान इस्लाम का बड़ा काम अपने नीचे काम करने वाले लोगों में इस्लाम का प्रचार कर कर हैं सकते हैं।

14 राजनैतिक लीडर, संपादक , कवि , लेखक आदि को इस्लाम की रक्षा एह वृद्धि का काम अपने हाथ में लेना चाहिये।

15-. स्वांग करने वाले, मुजरा करने वाले, रण्डियों को , गाने वाले कव्वालों को, भीख मांगने वालो को सभी भी इस्लाम की खूबियों को गाना चाहिये।

यहाँ पर सारांश में निज़ामी की पुस्तक के कुछ अंशों को लिखा गया हैं। पाठकों को भली प्रकार से निज़ामी के विचारों के दर्शन हो गये होंगे।

1947 के पहले यह सब कार्य जोरो पर था , हिन्दू समाज के विरोध करने पर दंगे भड़क जाते थे, अपनी राजनितिक एकता , कांग्रेस की नीतियों और अंग्रेजों द्वारा प्रोत्साहन देने से दिनों दिन हिन्दुओं की जनसँख्या कम होती गई जिसका अंत पाकिस्तान के रूप में निकला।

अब पाठक यह सोचे की आज भी यही सब गतिविधियाँ सुचारू रूप से चालू हैं केवल मात्र स्वरुप बदल गया हैं। हिंदी फिल्मों के अभिनेता,क्रिकेटर आदि ने कव्वालों , गायकों आदि का स्थान ले लिया हैं और वे जब भी निजामुद्दीन की दरगाह पर माथा टेकते हैं तो मीडिया में यह खबर ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाती हैं। उनको देखकर हिन्दू समाज भी भेड़चाल चलते हुए उनके पीछे पीछे उनका अनुसरण करने लगता हैं।

देश भर में हिन्दू समाज द्वारा साईं संध्या को आयोजित किया जाता हैं जिसमे अपने आपको सूफी गायक कहने वाला कव्वाल हमसर हयात निज़ामी बड़ी शान से बुलाया जाता हैं। बहुत कम लोग यह जानते हैं की कव्वाल हमसर हयात निज़ामी के दादा ख्वाजा हसन निज़ामी के कव्वाल थे और अपने हाकिम के लिए ठीक वैसा ही प्रचार इस्लाम का करते थे जैसा निज़ामी की किताब में लिखा हैं। 

कहते हैं की समझदार को ईशारा ही काफी होता हैं यहाँ तो सप्रमाण निजामुद्दीन की दरगाह के हाकिम ख्वाजा हसन निजामी और उनकी पुस्तक दाइये इस्लाम पर प्रकाश डाला गया हैं।

ताकि हिन्दू भविष्य में किसी औलिया पीर या साईँ की कब्रों पर जाकर लाशों की पूजा करने की वैसी भूल नहीं करें, जिस से देश का विभाजन हुआ था, जिसका फल हिन्दू आज भी भोग रहे है, बताइए अभी नहीं तो हिन्दू समाज कब इतिहास और अपनी गलतियों से सीखेगा?

 

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From: Vivek Arya < >

इस्लामिक साम्राज्यवाद एवं उसका विस्तार : एक विश्लेषण
डॉ विवेक आर्य
रिपब्लिक टीवी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जब से ज़ाकिर नाइक मलेशिया गया है तब से वहां के मुसलमान गैर मुसलमानों की धार्मिक मान्यताओं का विरोध करने लगे हैं।  पहले सभी भाई चारे से रहते थे और आपस में उनके सम्बन्ध सौहार्द थे। मैं अर्नब गोस्वामी के इस वक्तव्य को सत्य तो मानता हूँ परन्तु अपूर्ण भी मानता हूँ। क्यूंकि ज़ाकिर नाइक तो इस्लामिक साम्राज्यवाद का केवल एक पात्र है। एशिया क्या पूरे विश्व में यह साम्राज्यवाद का विस्तार पूरे 1200 वर्षों से निरंतर चल रहा है। भारतीय महाद्वीप को ही लीजिये। हिन्दू बहुल भारत में कहने को मुसलमान अल्पसंख्यक है। मगर भारत के अतिरिक्त पाकिस्तान और बंगलादेश के मुसलमानों की आबादी को भी जोड़ लिया जाये तो हर दो हिन्दू के बदले एक मुसलमान का आंकड़ा बनता है।
इस्लामिक साम्राज्यवाद के विस्तार को समझने के लिए हमें कुछ तथ्यों को जानना आवश्यक है।
2005 में समाजशास्त्री डा. पीटर हैमंड ने गहरे शोध के बाद इस्लाम धर्म के मानने वालों की दुनियाभर में प्रवृत्ति पर एक पुस्तक लिखी, जिसका शीर्षक है ‘स्लेवरी, टैररिज्म एंड इस्लाम-द हिस्टोरिकल रूट्स एंड कंटेम्पररी थ्रैट’। इसके साथ ही ‘द हज’के लेखक लियोन यूरिस ने भी इस विषय पर अपनी पुस्तक में विस्तार से प्रकाश डाला है। जो तथ्य निकल करआए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि चिंताजनक हैं।
उपरोक्त शोध ग्रंथों के अनुसार जब तक मुसलमानों की जनसंख्या किसी देश-प्रदेश क्षेत्र में लगभग 2 प्रतिशत के आसपास होती है, तब वे एकदम शांतिप्रिय, कानूनपसंद अल्पसंख्यक बन कर रहते हैं और किसी को विशेष शिकायत का मौका नहीं देते। जैसे अमरीका में वे (0.6 प्रतिशत) हैं, आस्ट्रेलिया में 1.5, कनाडा में 1.9, चीन में 1.8, इटली में 1.5 और नॉर्वे में मुसलमानों की संख्या 1.8 प्रतिशत है। इसलिए यहां मुसलमानों से किसी को कोई परेशानी नहीं है। इसे आप इस्लामिक साम्राज्यवाद का प्रथम चरण कह सकते है।
जब मुसलमानों की जनसंख्या 2 से 5 प्रतिशत के बीच तक पहुंच जाती है, तब वे अन्य धर्मावलंबियों में अपना धर्मप्रचार शुरू कर देते हैं। जैसा कि डेनमार्क, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन और थाईलैंड में जहां क्रमश: 2, 3.7, 2.7, 4 और 4.6 प्रतिशत मुसलमान हैं। इसे आप इस्लामिक साम्राज्यवाद का द्वितीय चरण कह सकते है।
जब मुसलमानों की जनसंख्या किसी देश या क्षेत्र में 5 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है, तब वे अपने अनुपात के हिसाब से अन्य धर्मावलंबियों पर दबाव बढ़ाने लगते हैं और अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करने लगते हैं। उदाहरण के लिए वे सरकारों और शॉपिंग मॉल पर ‘हलाल’ का मांस रखने का दबाव बनाने लगते हैं, वे कहते हैं कि ‘हलाल’ का मांस न खाने से उनकी धार्मिक मान्यताएं प्रभावित होती हैं। इस कदम से कई पश्चिमी देशों में खाद्य वस्तुओं के बाजार में मुसलमानों की तगड़ी पैठ बन गई है। उन्होंने कई देशों के सुपरमार्कीट के मालिकों पर दबाव डालकर उनके यहां ‘हलाल’ का मांस रखने को बाध्य किया। दुकानदार भी धंधे को देखते हुए उनका कहा मान लेते हैं।
इस तरह अधिक जनसंख्या होने का फैक्टर यहां से मजबूत होना शुरू हो जाता है, जिन देशों में ऐसा हो चुका है, वे फ्रांस, फिलीपींस, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो हैं। इन देशों में मुसलमानों की संख्या क्रमश: 5 से 8 फीसदी तक है। इस स्थिति पर पहुंचकर मुसलमान उन देशों की सरकारों पर यह दबाव बनाने लगते हैं कि उन्हें उनके क्षेत्रों में शरीयत कानून (इस्लामिक कानून) के मुताबिक चलने दिया जाए। दरअसल, उनका अंतिम लक्ष्य तो यही है कि समूचा विश्व शरीयत कानून के हिसाब से चले। इसे आप इस्लामिक साम्राज्यवाद का तृतीय चरण कह सकते है।
जब मुस्लिम जनसंख्या किसी देश में 10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तब वे उस देश, प्रदेश, राज्य, क्षेत्र विशेष में कानून-व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा करना शुरू कर देते हैं, शिकायतें करना शुरू कर देते हैं, उनकी ‘आॢथक परिस्थिति’ का रोना लेकर बैठ जाते हैं, छोटी-छोटी बातों को सहिष्णुता से लेने की बजाय दंगे, तोड़-फोड़ आदि पर उतर आते हैं, चाहे वह फ्रांस के दंगे हों डेनमार्क का कार्टून विवाद हो या फिर एम्सटर्डम में कारों का जलाना हो, हरेक विवादको समझबूझ, बातचीत से खत्म करने की बजाय खामख्वाह और गहरा किया जाता है। ऐसा गुयाना (मुसलमान 10 प्रतिशत), इसराईल (16 प्रतिशत), केन्या (11 प्रतिशत), रूस (15 प्रतिशत) में हो चुका है। इसे आप इस्लामिक साम्राज्यवाद का चतुर्थ चरण कह सकते है।
जब किसी क्षेत्र में मुसलमानों की संख्या 20 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है तब विभिन्न ‘सैनिक शाखाएं’ जेहाद के नारे लगाने लगती हैं, असहिष्णुता और धार्मिक हत्याओं का दौर शुरू हो जाता है, जैसा इथियोपिया (मुसलमान 32.8 प्रतिशत) और भारत (मुसलमान 22 प्रतिशत) में अक्सर देखा जाता है। मुसलमानों की जनसंख्या के 40 प्रतिशत के स्तर से ऊपर पहुंच जाने पर बड़ी संख्या में सामूहिक हत्याएं, आतंकवादी कार्रवाइयां आदि चलने लगती हैं। जैसा बोस्निया (मुसलमान 40 प्रतिशत), चाड (मुसलमान 54.2 प्रतिशत) और लेबनान (मुसलमान 59 प्रतिशत) में देखा गया है। शोधकत्र्ता और लेखक डा. पीटर हैमंड बताते हैं कि जब किसी देश में मुसलमानों की जनसंख्या 60 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है, तब अन्य धर्मावलंबियों का ‘जातीय सफाया’ शुरू किया जाता है (उदाहरण भारत का कश्मीर), जबरिया मुस्लिम बनाना, अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल तोडऩा, जजिया जैसा कोई अन्य कर वसूलना आदि किया जाता है। जैसे अल्बानिया (मुसलमान 70 प्रतिशत), कतर (मुसलमान 78 प्रतिशत) व सूडान (मुसलमान 75 प्रतिशत) में देखा गया है। इसे आप इस्लामिक साम्राज्यवाद का पांचवा चरण कह सकते है।
किसी देश में जब मुसलमान बाकी आबादी का 80 प्रतिशत हो जाते हैं, तो उस देश में सत्ता या शासन प्रायोजित जातीय सफाई की जाती है। अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों को उनके मूल नागरिक अधिकारों से भी वंचित कर दिया जाता है। सभी प्रकार के हथकंडे अपनाकर जनसंख्या को 100 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाता है। जैसे बंगलादेश (मुसलमान 83 प्रतिशत), मिस्र (90 प्रतिशत), गाजापट्टी (98 प्रतिशत), ईरान (98 प्रतिशत), ईराक (97 प्रतिशत), जोर्डन (93 प्रतिशत), मोरक्को (98 प्रतिशत), पाकिस्तान (97 प्रतिशत), सीरिया (90 प्रतिशत) व संयुक्त अरब अमीरात (96 प्रतिशत) में देखा जा रहा है। इसे आप इस्लामिक साम्राज्यवाद का छठा चरण कह सकते है।
                             यूरोप के अनेक देशों में प्रजनन दर संसार के सभी देशों में सबसे कम हैं। ऐसे में भारी संख्या में मुस्लिम शरणार्थी उन देशों के पर धर्म के आधार जनसंख्या के समीकरण को किस प्रकार से प्रभावित करेंगे इसका अनुमान लगाना सरल हैं। किसी भी मुस्लिम देश ने जिनकी सीमा तक सीरिया से लगती थी एक भी शरणार्थी को अपने यहाँ पर शरण क्यों नहीं दी? क्या इसे इस्लामिक साम्राज्यवाद का फैलाव करने की सोची समझी साजिश नहीं कहा जायेगा?
मलेशिया में गैर मुसलमानों का जो उत्पीड़न आरम्भ हुआ है।  वह इसी इस्लामिक साम्राज्यवाद के फैलाव का अगला चरण ही है। जो जो देश इस्लामिक साम्राजयवाद के आरम्भिक चरणों में है।  उन्हें यह सोचना होगा कि भविष्य को लेकर उनकी रणनीति क्या होगी।
इसलिए भारत में इस्लामिक साम्राज्यवाद के विस्तार को अगर रोकना है तो हमारे देश के राजनेता सेक्युलरवाद और अल्पसंख्यकवाद की जहरीली सोच से  ऊपर उठकर सोचना होगा। यह तभी संभव है जब हमारे देश के के हिन्दू जात-पात, बाहुबल, दबंगई आदि से ऊपर उठकर वोट देना आरम्भ करेंगे।
अंत में समझदार को ईशारा ही बहुत होता है।

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From: Vindo Kumar Gupta < >

“अल्पसंख्यकवाद ” के दुष्परिणाम…

▶इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि अल्पसंख्यकवाद  की  राजनीति ने हमारे राष्ट्र को अभी भी दिग्भर्मित किया हुआ है। जबकि यह स्पष्ट होता आ रहा है कि ‘अल्पसंख्यकवाद’ की अवधारणा  अलगाववाद व आतंकवाद की अप्रत्यक्ष पोषक होने से राष्ट्र की अखण्डता व साम्प्रदायिक सौहार्द के लिये एक बड़ी चुनौती है। सन 1947 में लाखों निर्दोषो और मासूमों की लाशों के ढेर पर हुआ अखंड भारत का विभाजन और पाकिस्तान का निर्माण इसी साम्प्रदायिक कटुता का प्रमाण था और है ।
▶आज परिस्थिति वश यह कहना भी गलत नही कि “अल्पसंख्यकवाद” से देश समाजिक, साम्प्रदायिक व मानसिक स्तर पर भी विभाजित होता जा रहा है। विश्व के किसी भी देश में अल्पसंख्यको को बहुसंख्यकों से अधिक अधिकार प्राप्त नही होते क्योंकि बहुसंख्यकों की उन्नति से ही देश का विकास संभव है न कि अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण अथवा उनके सशक्तिकरण से। अल्पसंख्यकों को सम्मान देना एक बात है लेकिन उनका तुष्टिकरण करना अर्थात उनकी अनुचित बातों को मानना और उनके कट्टरवाद को समर्थन देना बिल्कुल अव्यवहारिक व अनुचित है ।
▶क्या यह विरोधाभास हमको चेतावनी नही देता कि जब कभी बहुसंख्यक हिन्दुओं , उनकी सभ्यता और संस्कृति के विरुद्ध  एवं उनके महापुरुषों के सम्मान के विपरीत कहा जाय तो स्वीकार्य है परंतु यदि कोई प्रश्न या प्रकरण अल्पसंख्यकों की वास्तविकता से जुड़ा हो, उनके मुल्ला-मौलवियों से जुड़ा हो या उनकी विद्याओं और पैग़म्बर से संबंधित हो तो उसे सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के विरुद्ध घोषित करके अपराधी बनाने के लिए सारे यत्न किये जाते है ?
▶हमारे देश की संविधानिक विडंबना भी यह है कि अल्पसंख्यक कहे जाने वाले मुसलमान आदि अपने धार्मिक  व नागरिक दोहरे अधिकारों से लाभान्वित होते आ रहें है , जबकि संविधान के अनुच्छेद  25  से  30  में बहुसंख्यक हिदुओं को उनके शिक्षा संबंधित धार्मिक अधिकारों से वंचित रखा हुआ है। इसप्रकार  किसी धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म आधारित अल्पसंख्यको व बहुसंख्यको में भेदभाव करना क्या सर्वथा अनुचित नही है ? ध्यान रहें कि विश्व में कही भी अल्पसंख्यकों के अनुसार कानून नहीं बनाये जाते। वहां के कानून बहुसंख्यक भूमि पुत्रो के धार्मिक रीति-रिवाज़ों व संस्कृति पर आधारित होते है । इन्ही कानूनों के अनुसार अल्पसंख्यकों को अपने रीति रिवाज़ों को अपनाते हुए वहां के मूल निवासियों के साथ मिलजुल कर रहना होता है। इसीलिये ‘अल्पसंख्यक कौन और क्यों’ पर एक बड़ी बहस आज अत्यंत आवश्यक हो गयी है।
▶दशकों से अल्पसंख्यकवाद  की राजनीति ने हमारे राष्ट्र को कर्तव्यविमुख कर दिया है । इसलिए जो कट्टरवाद के समर्थक है और अलगाववाद व आतंक को कुप्रोत्साहित करते है उन्हें दंडित करने में भी अनेक समस्यायें आ जाती है ।वर्षो से आई.एस.आई. व अन्य आतंकवादी संगठनों ने अपने स्थानीय सम्पर्को से मिल कर सारे देश में देशद्रोहियों का जाल फैला रखा है। जिसके कारण देश के अधिकांश नगरो और कस्बो में आतकियों के अड्डे मिले तो कोई आश्चर्य नहीं होगा ?
▶अल्पसंख्यकवाद की राजनीति ने केवल राजनीतिज्ञों को ही पथभ्रष्ट नहीं किया बल्कि राष्ट्र का चेतन समाज भी पथभ्रष्ट होता जा रहा है।राष्ट्रवाद व हिंदुत्व की निंदा को हम पंथ/धर्म निरपेक्षता मानने लगे है । हम बहुसंख्यक हिन्दू आत्मनिन्दा करते हुए थकते ही नहीं, एक भयानक स्थिति बन चुकी है। आज हिंदुत्व विरोध को प्रगतिशीलता और आतंकवाद के विरोध को साम्प्रदायिकता समझने की आम धारणा बन गई है। जिस बंग्लादेशी मुस्लिम आदि घुसपैठ को सर्वोच्च न्यायालय ने “राष्ट्र पर आक्रमण” माना था उसे न केवल यथावत जारी रहने दिया गया, बल्कि उसका विरोध करने वालों को सांप्रदायिक माना जाने लगा। वही प्रवृति देश की बर्बादी के नारे लगाने वालों को देशद्रोही कहना तथाकथित बुद्धिजीवियों व सेक्युलर नेताओं को अस्वस्थ बना देती है।
▶इसी अल्पसंख्यकवाद का दुष्परिणाम है कि प्रखर राष्ट्रवाद को हिन्दू कट्टरवाद व साम्प्रदायिक कहा जाने लगा है । अल्पसंख्यकवाद के पोषण से हमारी वसुधैवकुटुंब्कम की संस्कृति व सर्व धर्म समभाव की धारणा निरंतर आहत हो रही है। निसंदेह हमारी संस्कृति किसी से बदला लेने या उस पर आक्रामक होने की नहीं है, फिर भी हम आतंकवादियों और कट्टरपंथियों को संरक्षण देने वालों को देश का शुभचिंतक नहीं मान सकते ? आक्रान्ताओं की जिहादी संस्कृति जो मानवता विरोधी है और विश्व शांति के लिए एक भयंकर चुनौती है , समाज में अलगाववाद का विष ही घोल रही है। अतः राष्ट्रीय सुरक्षा व विकास के लिए अति अल्पसंख्यकवाद से सावधान रहना चाहिये। यह सत्य है कि भूमि पुत्र बहुसंख्यकों की अवहेलना करके कोई राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता।
▶यह विचित्र है कि आज इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में समर्पित राजनीतिज्ञ , सामाजिक व धार्मिक नेता  अलग-थलग पड़ते जा रहें है। आधुनिकता की चकाचौंध ने सभी को राष्ट्रनीति के स्थान पर राजनीति के चक्रव्यूह में फंसा दिया है । जिससे अल्पसंख्यकवाद की पोषित राजनीति ने राष्ट्र को अपने मानवीय मूल्यों, नैतिक आधारो, धर्म व संस्कृति आदि को ही धीरे धीरे तिलांजलि देने को विवश कर दिया है।
मुस्लिम पोषित राजनीति का पर्याय बन चुका “अल्पसंख्यकवाद ” आज अपनी एकजुट वोटो के सहारे भारत ही नही सारे संसार में जहां जहां लोकतंत्र है वहां वहां अपनी संख्या के बल पर पर प्रभावी होता जा रहा है। आज जब विश्व मे इन जिहादियों के वीभत्स अत्याचारो से सारी मानवता त्राहि-त्राहि कर रही है,  फिर भी विश्व के अनेक शक्तिशाली नेता धैर्य रखो और देखते रहो की नीतियों पर चलना चाहते है।
▶अनेक गणमान्य लोगों का मानना है कि इन कट्टरपंथी मुसलमानों का सर्वमान्य एक ही लक्ष्य है  “दारुल-इस्लाम” …अतः इनकी कितनी ही उदार सहायता करते रहो फिर भी इनकी अनन्त मांगे कभी पूरी नहीं होंगी। इनकी स्पष्ट मान्यता है कि जब तक इस्लाम है तब तक जिहाद रुकेगा नही और जो विश्व के इस्लामीकरण से कम में संतुष्ट होने वाला नहीं है। इसके लिए बगदादी और जाकिर नाईक जैसे इस्लाम के हज़ारों प्रवर्तक वर्षो से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से सक्रिय है।
▶इसलिये तटस्थ रहकर विचार करना होगा कि  इस्लामिक  जिहाद से त्रस्त भारत सहित विश्व के अनेक देश इस नफरत व घृणास्पद वैचारिक जड़ता को मिटाने के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों की कितनी ही आर्थिक व समाजिक सहायता करते रहें , फिर भी क्या वे उस राष्ट्र की मुख्य धारा से कभी जुड़ेंगे ? साथ ही इन कट्टरपंथी जिहादियों को सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे भी नियंत्रित नहीं किया जा सकता । अतः मानवता की रक्षा के लिए अल्पसंख्यक मुसलमानों का अतिरिक्त पोषण बंद करना होगा और इनकी शिक्षाओ व दर्शन में आवश्यक संशोधन करवाने होंगे ।

विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक एवं लेखक)
गाज़ियाबाद

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Also read an article at: https://skanda987.wordpress.com/2015/02/16/defects-of-democratic-constitutions/

 

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From: Pramod Agrawal < >

 

काली कमाई के रास्ते खत्म कर दिए जाएँ .

 

मैं एक डॉक्टर हूं, और इस लिए ” सभी ईमानदार डॉक्टर्स से क्षमा सहित प्रार्थना …! ”

 

  • आपके पिता जी को ” हार्ट अटैक ” हो गया …डॉक्टर कहता है – Streptokinase इंजेक्शन ले के आओ … 9,000/= रु का … इंजेक्शन की असली कीमत 700 – 900/- रु के बीच है .., पर उसपे MRP 9,000/= का है ! आप क्या करेंगे ?

 

  • आपके बेटे को टाइफाइड हो गया … डॉक्टर ने लिख दिया – कुल 14 Monocef लगेंगे ! होल – सेल दाम 25/= रु है … अस्पताल का केमिस्ट आपको 53/= रु में देता है … आप क्या करेंगे ??

 

  • आपकी माँ की किडनी फेल हो गयी है .., हर तीसरे दिन Dialysis होता है .., Dialysis के बाद एक इंजेक्शन लगता है – MRP शायद 1800 रु है ! आप सोचते हैं की बाज़ार से होलसेल मार्किट से ले लेता हूँ ! पूरा हिन्दुस्तान आप खोज मारते हैं , कही नहीं मिलता … क्यों ? कम्पनी सिर्फ और सिर्फ डॉक्टर को सप्लाई देती है !! इंजेक्शन की असली कीमत 500/= है , पर डॉक्टर अपने अस्पताल में MRP पे यानि 1,800/= में देता है … आप क्या करेंगे ??

 

  • आपके बेटे को इन्फेक्शन हो गया है .., डॉक्टर ने जो Antibiotic लिखी , वो 540/= रु का एक पत्ता है .., वही Salt किसी दूसरी कम्पनी का 150/= का है और जेनेरिक 45/= रु का … पर केमिस्ट आपको मना कर देता है .., नहीं जेनेरिक हम रखते ही नहीं , दूसरी कम्पनी की देंगे नहीं .., वही देंगे , जो डॉक्टर साहब ने लिखी है … यानी 540/= वाली ? आप क्या करेंगे ??

 

  • बाज़ार में Ultrasound Test 750/= रु में होता है .., चैरिटेबल डिस्पेंसरी 240/= रु में करती है ! 750/= में डॉक्टर का कमीशन 300/= रु है ! MRI में डॉक्टर का कमीशन Rs. 2,000/= से 3,000/= के बीच है !

डॉक्टर और अस्पतालों की ये लूट , ये नंगा नाच , बेधड़क , बेखौफ्फ़ देश में चल रहा है ! Pharmaceutical कम्पनियों की Lobby इतनी मज़बूत है , की उसने देश को सीधे – सीधे बंधक बना रखा है ! डॉक्टर्स और दवा कम्पनियां मिली हुई हैं ! दोनों मिल के सरकार को ब्लैकमेल करते हैं …!!

सबसे बडा यक्ष प्रश्न … मीडिया दिन रात क्या दिखाता है ?

 

गड्ढे में गिरा प्रिंस .., बिना ड्राईवर की कार , राखी सावंत , Bigboss , सास बहू और साज़िश , सावधान , क्राइम रिपोर्ट , Cricketer की Girl Friend , ये सब दिखाता है , किंतु … Doctor’s, Hospital’s और Pharmaceutical company कम्पनियों की , ये खुली लूट क्यों नहीं दिखाता ?

 

मीडिया नहीं दिखाएगा , तो कौन दिखाएगा ?

मेडिकल Lobby की दादागिरी कैसे रुकेगी ?

इस Lobby ने सरकार को लाचार कर रखा है ?

Media क्यों चुप है ?

 

20/-  रु मांगने पर रिक्सा वाले को , तो आप कालर पकड़ के मारेंगे , ..! डॉक्टर साहब का क्या करेंगे ???

यदि आपको ये सत्य लगता है , तो कर दो फ़ॉरवर्ड , सब को ! जागरूकता लाइए और दूसरों को भी जागरूक बनाने में अपना सहयोग दीजिये !!!

 

The Makers of Ideal Society

एक सोच बदलाव की . .

 

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From: N Sehgal < >

Debate and Conclusion: Sikhs are Hindus – No Doubt

FOLLOWING ARE THE EXCERPTS FROM THE DISCUSSIONS WITH MILITANT SIKHS IN THE USA AND ENGLAND.

 

Must read very carefully as each has word has lot of meaning. The louder Militant Sikhs spoke, more effectively Acharyaji spoke back with documentation. It was a very heavy quick response discussion.

Every Hindu must be prepared for their mischief in the name of Sikhism.

In this hot discussion, the words of Acharyaji were like the Baans of Arjun’s Gandiv. Louder Militants denounced India, Hindus, and RSS, more stronger and firmly was given the message.

BBC Television and other media had always criticized RSS and when Sikh militants spoke the same language against RSS, then your guess is as good as ours – who are behind these militant Sikhs in the USA hating RSS? This is very essential for BJP to understand this very hot discussion.

After examining the attachments and the following loud discussion, India can win back Sikhs and Punjab – they have been spilling too much poison that started during the period of British Raj  by puffing them up and they are not settled yet – Acharyaji blasted big loud mouth Sikh Militants (SOLUTION GIVEN THE END OF DISCUSSION:

 

Singh was the title given to Hindu army. Everyone fought against Muslims were addressed “Singh” meaning lion. It had nothing to do with cast and creed. Yet Guru Gobind last name was Rai.

 

With this, very addition Rai against Guru Gobind, Militant Sikhs got terribly offended.

 

  1. a) If militant Sikhs reminded the full name of Guru Gobind like Guru Gobind Rai (Singh), they became fanatically extremely furious because they are desperately trying to forsake any links with the Hindus or Hinduism. They just want Singh no Rai.

 

Our quick response to militant Sikhs: “Well then you must not like either Gobind name if you hate so much Rai – Gobind is also Hindu name – Hope you are not ready to give your sons’ name Mohammad Tuglak or Mohammad Timur.”

 

  1. b) Militants refused to accept that Guru Gobind Rai Singh ever performed 40 days Yagana in Anantpur

 

  1. c) Militant Sikhs have discarded books where Guru Gobind Rai Singh had spoken the truth and his reasons for the army of Singhs:

 

Asking militants about Panth Prakash!

 

Militant answers, no we do not believe this book

 

What about Vichita Natak, Kali Avtar – Guruji had spoken?

 

  1. d) Militant Sikhs, “We do not believe in these books and they are fabricated.

 

Why militants do not want to believe?

 

ANSWER: Because militants face the realistic truth as was stated by Guru Gobind Rai Singh in these books?

 

Guruji had clearly spoken that there had sprung out sects in the country who do not want to honor the Vedas but spread desperate teachings. Exactly this was the warning to militants by Guruji

 

FACT: these books connect them with their Hindu past which is very poisonous to present day militant Sikhs.

 

  1. f) Militant Sikhs speak: “We only believe in Granth Sahib, not any other books.”

 

We asked militants, “how many times Bhagwan Sri Ram’s name appeared in Granth Sahib?”

 

Militant Sikhs replied: “No, no no that was not the same Ram that Hindus worship.”

 

We ask the question from militant Sikhs, “can you identify that particular Ram that is being mentioned over 20,000 times in Granth Sahib?

 

Militant Sikhs have no answer.

 

Then again, the question was raised asking militant Sikhs, “Was that a newly created Ram, not the same Ram Hindus worship; just during the inception of Sikhism (500 years ago). Do you have any proof of any 10 Gurus stating that they had found a new Ram for Sikhs?”

 

THE VERY FIRST NINE Sikh Gurus did not even known the word Sikhism and the 10th Guru had organized Hindus to stand to fight against Muslims, so where did a new Ram appear after Guru Gobind Rai had decreed Hindus on the Symbol of SINGH? Even those past 9 Gurus must have not known another Ram will be appearing upon the foundation of Sikh army, especially, for militant Sikhs. Who are those poisonous snakes feeding you poison against Hindus and against your basic existence for Sikh Dharm?

 

Now you new militant Sikhs saying that Ram in Granth Sahib is not the same of Hindu’s Ram but the first nine Sikh Gurus 100% had confirmed that there was no other Ram except Ayodhya Nagari Ram because they had not heard the word Sikhism – Because of the reason of Sikhism, you have decided to separate from Hinduism.

TO MILITANT SIKHS: “You said you only believe in Granth Sahib but you found out now that Bhagwan Sri Ram’s name appears almost in every page of Granth Sahib. You also denied Guru Gobind Rai Singh’s words spoken through Panth Prakash, Kali Avtar, after all your contradictions, it is important to know the truth with the documentation stated in Granth Sahib which you said that you trusted only Granth Sahib. That is what you all Militants arguing here have agreed. Is this the final answer?

All Sikh Militants spoke with one voice “YES” and they thought that they were no longer linked to Hindus which all those Western operatives are poisoning their minds by twisting confusing these lost Sikhs. All militants present  their felt their militancy was loudly accepted and heard.

Here Acharyaji read loudly from Granth Sahib so militants were assured that Acharyaji did not falsify another persuasion in convincing militants their solid Hindu background:

Guru Granth Sahab: “The Vedas are revealed by OMKAR – how one can praise the holy Vedas! They are endless. How can their end be found!” …. (1:1 and 10:3)

Guru Nanak, the first Sikh Guru, sang the glory of the Vedas regarding them as revealed by God in the following passages of the Granth Sahib: “The Vedas were made or revealed by God.” “The Vedas were revealed under the orders of God, so that human beings could distinguish between sins and merits.” “Sam Ved, Rig Ved, Yajur Ved and Atharv Ved have been revealed by God. No one can evaluate their importance. They are inestimable and eternal.” “How can one praise the holy Vedas? They are endless. How can their end be found?” “As there can be no darkness under the candle, so the study of the Vedas destroys all sinful thoughts of the intellect.” “Though there are numberless books, the recitation and study of the Vedas stands first in order of merits.”  (GS 1:1, Mehla 5, Mehla 1:17, Vasant Asthpadiya 1:3, GS10:3)

So listen and pay attention, what you are contradicting your very own foolish mind under the influence of very many evil hateful. How much are you being funded from CIA for doing this desperate separation and poisoning the minds of gullible Sikhs in India?

 

You do not believe a word what Guru Gobind Rai Singh he had spoken in books. You do not believe those books. You believe only in Granth Sahib now we have proved document in Granth Sahib praising Vedas and as well as praised by Guru Nanak Ji. Now tell us now where is your position with Sikhism? You are outcast and just putting hypocrite show of religion as if you are Sikhs but the truth is that you are totally outside of Sikhism using local Indian Sikhs for combined CIA operation by all sorts of falsification for destabilization Punjab and India. That is your true mission which you get funding. For making dollars, you are raping your own Mother Source. Nobody can deny.

 

Then Acharyaji spoke GREAT WORDS OF WISDOM OF OUR Guru Gobind Rai (Singh), the tenth Sikh’s Guru (Panth Prakash, Niwas –25, Page 201-202): “Ours is ancient Arya Dharm. All the good qualities linked with truth and which have been described in the Vedas come back into operation in the world on methodically following Vedic system. Let the Khalsa Panth (Religion of the Pure) reverberate in the entire world, and the Hindu Dharm awaken in every nook and corner. I have come to this world to protect Dharma and to destroy the evildoers. I shall restore the honor of Veda-Dharma in the world and shall wipe out the crime of cow killing. He writes with pain in ‘Kali Avtar’: There have sprung up section that does not honor the Vedas but spread desperate teachings.”

This clearly means, you even defy everything what Sikh Guru Gobind Rai Singh wanted you to follow.

 

MILITANT SIKH: “No we are not like Hindus doing Murti Puja.”

 

But you got Gurus pictures in every Gurdwara.

 

Militant: “We do not believe in pictures now.”

 

WE SPOKE: “Without the pictures, how do you determine between Nanak and Tegh Bahdur?”

 

Are you favoring Islam proving you are more militant than those terrorists against Hindus are?

 

The following were reminded to militant Sikhs:

 

HOWEVER, REMEMBER, terrorist Muslims of Pakistan, called Taliban, and had destroyed Seventy (70) Gurdwaras in Afghanistan.

 

Sikh women and girls were forced to wear Burkhas;

 

Sikh girls were not allowed to attend schools in Afghanistan.

 

Over 60,000 Sikhs were sent letters in Kashmir by Pakistan terrorists stating in those letters either to convert to Islam or leave Kashmir.

 

Sikhs were beaten up by white Americans right after 9-11;

 

In Wisconsin, a white racist attacked Gurdwara where many Sikhs were murdered and injured.

 

Right after 9/11, many Americans refused to sit in cabs, driven by Sikhs, in New York.

 

Young Americans covered Sikhs in Jute Bags and carried to police stations for five million rewards, thinking they had caught Bib laden.

 

QUESTION TO MILITANT SIKHS: “Now coming to the point – when you see the picture of your father and mother, what you all see?”

 

You will say, you see through those pictures your past with your mother and father when you were a baby – how did they give you love and hug? Isn’t the truth?

 

That is the reason for pictures – each picture of Sikh Guru relates to his past but not overlapping each other past in all the pictures. Therefore, you have 10 Gurus and each Guru had exhibited great qualities with great morals and valor, and, therefore you adore them.

 

Sure, you are not going to say dog or cat has no image. How will you know one is a dog and another is a cat. So you have been terribly fooled by Muslim criminals always have made fun of Hindu deities. Instead of beating every one of those con artists for making mockery of Hindu deities, you Sikh militant have joined hands with the goons and thus terribly insulting Hindus for installing deities in Hindu temples.

 

Now you understand very well where does Islam stand after they had chased all Sikhs from Afghanistan?

 

Where did you all run after Taliban had chased Sikhs?

 

Answer lies in the Mother India.

 

After the year 1990, Sikhs had left Afghanistan and most of them had settled in Bharat Mata land – KUTE KI DUM KABHI SIDHI NAHI HOTI. After seeing all these ISIS, Pakistan terrorism, Militant Sikhs in Militant Gurdwaras in USA and England, militant Sikhs continue to speak India is our Number one enemy.

 

Their position is “DHOBI KA KUTA NA GHAR KA NA GHAT KA.”

 

We have told very clearly point-blank as loud as they could hear: “Do not break India into pieces under the influence of poisonous snakes as they will leave you no where.”

 

One more thing was spoken to militant Sikhs: “Don’t you all know that Golden Gurdwara was called HAR MANDIR until 1930 and Hindu Brahmins did the Pooja?

 

They started arguing and we spoke loudly you hateful war mongers ready to destroy your own foundation by separating from Hinduism.

 

Militant Sikh finally spoke: “Oh we have learned something from you.”

 

One last piece of advice to all of you militant Sikhs: “In our discussion, did you realize how much you are trying to disunite from Hindus and India? Did you realize that how much Hindus are trying to embrace you as together with one common goal on Dharm, Karm, Bhajan, Yog on OM. Is any Karm, Dharm, Devotion, Bhajan, Mediation, picture made of the same five elements: water, fir, air, ether and earth and so is the statue with same elements, ARE THEY DIFFERENT IN YOUR NEWLY MILITANT SIKHISM?

 

TO MILITANT SIKHS: We do not find any difference between the pure teachings of Guru Gobind Rai’s Sikhism and Hinduism.

 

Asking militant Sikhs, “Do you respect Holy Cows?”

 

Here militant Sikhs were first reluctant and Acharyaji felt something they had been programmed in the West against closing of slaughterhouses in UP, Gujarat. We firmly spoke very loud by stating seems like you want to oppose Hindus on this issue as well. There they go against – militant Sikhs accept with reluctance, not with the same zeal Guru Ji had spoken as follows (also print from attachment).

 

Sri Guru Gobind Rai Singh spoke: “I will restore the honor of Ved Dharm in the whole world and shall wipe out the crime of cow-killing from every nook and corner of the world.”

 

So you militant Sikhs do not even honor and respect the words of Guru Gobind Rai Singh so all of you are heading to burning hellish planets – there is no deliverance for you.

 

In the process of discussion with the militant Sikhs, they were reminded that they were in the company of illiterate bad boys and they will destroy you like Bhinderwala had butchered Hindus by pulling them from trains and buses for the demand to create Khalistan.

 

We also reminded these militants, that this Bhinderwala terrorist had agreed with CIA and Pakistan that Khalistan would be under the supervision of Islamic Pakistan in order to get funding through CIA operatives.

 

Now listen carefully, you militant Sikh boys, with utmost attention: “That was around the year 1984 when Bhinderwala and his militant gang had created havoc in Punjab…

 

If say Bhinderwala and his militant gang had succeeded to separate Punjab to build Khalistan, under the jurisdiction of Pakistan, as was the condition of operation, by now Pakistan terrorists would have walked all over Khalistan. That is the fact. – Just like you have found out six years later Pakistan’s Islamic Taliban terrorists in Afghanistan cleaned/cleared out Sikhs – Taliban are the Islamic trained terrorists from Pakistan and CIA created them all from USA’s backing.

 

MILITANTS, Realize your position in the world and do not remain Dhobi Ka Kuta Na Gher Ka Na Ghat Ka.

 

BEST ADVICE: “IF YOU MILITANT ARE SO ANXIOUS, WHY DON’T YOU CREATE KHALISTANS IN CANADA, USA, AUSTRALIA, AND ENGLAND?

 

Let us show your total guts and we will love to watch your great success and endeavor. I am sure everyone in India will be happy for your efforts. CIA has trained Sikh militants in Pakistan during Bhinderwala and even during the Air India flight originated from Canada where more than 400 people were murdered. Well go on with your militancy and now you will not be saved as militant Sikhs were saved by Canada’s judges’ falsification for not hanging militant Sikhs connected to downing Air India flight.

 

Militant Sikh speaks: “Sikhs saved Hindus otherwise entire India would be Muslim.”

 

TO MILITANT SIKHS: “You mean to say, Hindus were waiting for Nanak Guru or other coming Gurus to save Hindus?”

 

What about Prithivi Chowan? What about Rana Sangha? What about Mahrana Pratap? Did you hear about Shivaji? Did you know about Baji Rao that even Napoleon was no match to Baji Rao. So come out from limited space of Punjab and learn what great Hindu warriors were doing much before Guru Nanak came. Do you know Chandr Gupt Maurya?

 

How Sikhs could save Hindus when that Sikh army was made of Hindus to save Hindus?

 

You mean to say Aurangzeb and his gang of Muslim murderers had participated in Sikh army to defend Hindus from the atrocities of Muslims! For your very weird ideas, you think we must not ask you in the similar weird ways.

 

Also, remember there was no Sikh Turban before Guru Gobind Rai Singh.

 

That is why you call Nanak not Nanak Singh or you call Tegh Bahdur, not Tegh Badhur Singh who was father of Gobind Rai.

 

TO SIKH MILITANT: “Do not play games with you, with your families and good meaning Sikhs for your desperation of leadership by militancy.  You will sink their ship just like Taliban sent you out Sikhs from Afghanistan. They will never be with you. Hope you do not have planned to join ISIS? Back off and join hands with Bharat Mata and get back rest of West Punjab and Nanaka. That should be your right aim.”

 

Well, do you have the history knowledge just limited to Punjab? We have much greater respect of Guru Gobind Rai Singh Ji than you militants do. He was not saving Sikhs but his purpose was to form the SINGH ARMY to save the Hindus – it was in defense to Hinduism.

 

You are trying to tell as if Tegh Badhur was not a Hindu yet he was also trying to help Hindus so they could be protected as well. However, there was no Sikhism.

 

This is the top most foolish statement. The truth is that Sri Tagh Bahdur had challenged Aurangzeb for the discussion. Upon that agreement Sri Tegh Bahdur, himself a staunch Hindu, had taken forty Hindu Brahmins to discuss Dharm with demon Aurangzeb.

 

What this Muslim demon Aurangzeb did? He arrested Sri Tegh Bahdur with all those forty learned Hindu Brahmins and put them in Jail.

 

Sri Tegh Bahdur’s head was cut off in Sisganj Gurdwara, Chandni Chowk, Delhi by this evil fanatic Muslim Aurangzeb.

 

MILITANT SIKHS TRYING ANOTHER SEPERATION BY THIS STATEMENT: “Nanak did not want his followers to wear Janoi and no mantras.”

 

OUR REPLY TO MILITANT SIKHS: “When Sikh Bhajani doing Bhajans, what is the purpose? When Sikhs do meditation on OMKAR, what is the underlying mission of Sikhism?

 

Mantras contain the sacred Sanskrit words either they can be recited or sung as Bhajans – same OM can be repeated in meditation, or recited in resonance or can be put into the Bhajan format: Jai Hari OM, OM, OM, Jai Hari OM..

 

You utmost militant fools, you have lost your total understanding and, therefore, we do not find an iota of Sikh Dharm in your consciousness. So do not claim to be Sikh as you are greedy desperate to control certain portion of land for your leadership anxiousness by misleading pure Sikhs in India.

 

HERE IS ANOTHER EXAMPLE AFTER THE GURU HAD LEFT: “Well Arya Samaj followers broke the Hindu deities after passing away of Sri Dayanand Swami. If the fools try their own separation, was that the teaching of any good meaning guru? You militant so puffed-up as if Nanak created a new Karm, New Dharm, new Yoga, new Om, new Devotion for his followers, isn’t what you have been telling?”

 

Is Karm of a Sikh, Hindu, Christian or Muslim on an Universal Platform different as per according to one’s belief?

 

The intrinsic universal law applies very minutely and precisely to all conscious souls – no difference!

 

Yogi Bhajan did yoga on OMKAR.

 

Acharyaji asked him 37 years ago, where did originate OM?

 

Then Acharyaji explained that Bhagwan Sri Krishn explains to Arjun over 5,200 years ago:  “I am the father of this universe, the mother, the support, and the grandsire. I am the object of knowledge, the purifier and the syllable OM. I am also the Rk, the Sama, and the Yajur [Vedas].” Bhagavad-Gita Chapter 9:17

 

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Advice to Hindus, RSS, BJP, VHP:

 

Print three pages from attachment and drop millions of copies over the Punjab areas from airplanes.  This way, they will find the culprits who are misleading Sikhs terribly.

 

Punjab will be the victory for BJP as those feeding the poison to local Indian Sikhs are sitting in the USA, Canada, Punjab. They want to use them so these militants from outside run the operations with the help of CIA etc.

 

This is the best solution: keep on printing millions of copies and distribute all over Punjab without fail.

 

Did USA throw food during war in Afghanistan from airplanes?

 

That was food for the body.

 

WHAT ABOUT FOOD FOR THE MIND, CONSCIOUSNESS AND SOUL’S REALIZATION?

 

So throw millions of pages in Punjab so those turning militants will realize between the truth and fiction.

 

Hari Bolo

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From: Vivek Arya < >

मनु की छवि चमकाएगा संघ
नवभारत टाइम्स हिंदी समाचार पत्र दिल्ली संस्करण में दिनांक 9 मई 2017 को यह समाचार छपा है। संघ से सम्बंधित संस्कार भारती के अमीर चंद द्वारा मनुवाद के सम्बन्ध में प्रचलित भ्रांतियों के निवारण करने का संकल्प लिया गया है। हम उनके इस निर्णय का स्वागत करते है। मनुस्मृति के सम्बन्ध में प्रचलित सभी भ्रांतियों का निवारण करने के लिए स्वामी दयानन्द के दृष्टिकोण को समझना अत्यंत आवश्यक हैं।
स्वामी दयानन्द एवं आर्यसमाज का मनुस्मृति के सम्बन्ध में सम्बंधित दृष्टिकोण
1. मनु स्मृति सृष्टि के प्रथम आदि राजा मनु द्वारा रचित प्रथम संविधान है।
2. स्वामी दयानन्द आधुनिक भारत के प्रथम ऐसे विचारक है जिन्होंने यह सिद्ध किया कि वर्तमान में उपलब्ध मनुस्मृति मनु की मूल कृति नहीं है।  उसमें बड़े पैमाने पर मिलावट हुई हैं। यही मिलावट मनुस्मृति के सम्बन्ध में प्रचलित भ्रांतियों का मूल कारण है।
3. मनुस्मृति पर सबसे बड़ा आक्षेप जातिवाद को समर्थन देने का लगता है। जबकि सत्य यह है कि मनुस्मृति जातिवाद नहीं अपितु वर्ण व्यवस्था की समर्थक है। वर्ण का निर्धारण शिक्षा की समाप्त होने के पश्चात निर्धारित होता था न कि जन्म के आधार पर होता था। मनु के अनुसार एक ब्राह्मण का पुत्र अगर गुणों से रहित होगा तो शूद्र कहलायेगा और अगर एक शूद्र का पुत्र ब्राह्मण गुणों वाला होगा तो ब्राह्मण कहलायेगा। यही व्यवस्था प्राचीन काल में प्रचलित थी। प्रमाण रूप में मनुस्मृति 9/335 श्लोक देखिये। शरीर और मन से शुद्ध- पवित्र रहने वाला, उत्कृष्ट लोगों के सानिध्य में रहने वाला, मधुरभाषी, अहंकार से रहित, अपने से उत्कृष्ट वर्ण वालों की सेवा करने वाला शूद्र भी उत्तम ब्रह्म जन्म और द्विज वर्ण को प्राप्त कर लेता है।
4. मनुस्मृति पर दूसरा बड़ा आक्षेप नारी जाति को निम्न दर्शाने का लगता है। सत्य यह है कि मनुस्मृति नारी जाति को पुरुष के बराबर नहीं अपितु उससे श्रेष्ठ मानती है। संसार की कोई भी धर्म पुस्तक में ऐसा मनु के विषय में विधान नहीं है। प्रमाण रूप में मनुस्मृति 3/56 श्लोक देखिये। जिस समाज या परिवार में स्त्रियों का आदर – सम्मान होता है, वहां देवता अर्थात् दिव्यगुण और सुख़- समृद्धि निवास करते हैं और जहां इनका आदर – सम्मान नहीं होता, वहां अनादर करने वालों के सभी काम निष्फल हो जाते हैं भले ही वे कितना हीश्रेष्ट कर्म कर लें, उन्हें अत्यंत दुखों का सामना करना पड़ता है|
5. मनुस्मृति पर तीसरा आक्षेप यह है कि मनुस्मृति पशु हिंसा की समर्थक है।यह भी एक भ्रान्ति है।  मनुस्मृति 5/15 का प्रमाण देखिए। अनुमति देने वाला, शस्त्र से मरे हुए जीव के अंगों के टुकड़े–टुकड़े करने वाला, मारने वाला, खरीदने वाला, बेचने वाला, पकाने वाला, परोसने या लाने वाला और खाने वाला यह सभी जीव वध में घातक–हिंसक होते हैं।
6. मनुस्मृति हमें धर्म-अधर्म, पञ्च महायज्ञ, चतुर्थ आश्रम व्यवस्था, समाज व्यवस्था के विषय में मार्गदर्शन करता है।  इसलिए वह आज भी प्रासंगिक है।
7. वर्तमान मनुस्मृति में 2685 श्लोकों में से 1471 श्लोक मिलावटी और 1214 श्लोक ही मौलिक हैं। यही मिलावटी श्लोक मनु स्मृति के विषय में भ्रांतियों का कारण है।  इसलिए इन मिलावटी श्लोकों को हटाकर सत्य श्लोकों को स्वीकार कीजिये। डॉ अम्बेडकर द्वारा मिलावट किये हुए 1471 श्लोकों में से 88 प्रतिशत श्लोकों का प्रयोग अपने लेखन में हुआ है। इससे यही सिद्ध होता है कि डॉ अम्बेडकर की मनुस्मृति के विषय में मान्यताएं मिलावटी अशुद्ध मनुस्मृति पर आधारित है।
8. आर्यसमाज के विद्वान् डॉ सुरेंदर कुमार द्वारा मनुस्मृति के विशुद्ध स्वरुप का भाष्य इस कार्य को जनकल्याण के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। हमारे देश के सभी बुद्धिजीवियों को निष्पक्ष होकर उसे स्वीकार करना चाहिए।
मनुवाद, ब्राह्मणवाद चिल्लाने से कुछ नहीं होगा। बुद्धिपूर्वक यत्न करने में सभी का हित है।
डॉ विवेक आर्य

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