Feeds:
Posts
Comments

Archive for the ‘Islam’ Category

From: Pramod Agrawal < >

हलाल से हलाला तक !!

इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में “हलाल , और “हलाला ” यह ऐसे दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है . दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं .यह बात तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ “अवर्जित ” होता है . लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों वैवाहिक जीवन और कुरान के महिला .विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले , मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं
इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के प्रति घोर नफ़रत , और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है,मुसलमानों में दो दो , तीन तीन औरतें रखना साधारण सी बात है . और फिर मुसलमान रिश्ते की बहिनों से भी शादियाँ कर लेते हैं .और अक्सर संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं .इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं. और कभी पति गुस्से में पत्नी को तलाक भी दे देता है . चूंकि अल्लाह की नजर में औरतें पैदायशी अपराधी होती है , इसलए कुरान में पति की जगह पत्नी को ही सजा देने का नियम है .यद्यपि तलाक देने के कई कारण और तरीके हो सकते हैं , लेकिन सजा सिर्फ औरत को ही मिलती है . इसे विस्तार से प्रमाण सहित बताया गया है .जो कुरान और हदीसों पर आधारित है .
1-तलाक कैसे हो जाती है 
यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार “तलाक ” शब्द का उच्चारण कर दे , या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए , तो तलाक हो जाती है ..क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है .जैसा की कुरान ने कहा है ,
” और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा “सूरा – मायदा 5 :89
तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
-“इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ , तब भी तलाक वैध मानी जाएगी .और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है.(Rawdha al-talibeen 7/73” 

“فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك

-“इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं . लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो , फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi 3/122 
إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“

2-अल्लाह की तरकीब 
ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है , क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं , और बच्चे भी पालती हैं . कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है . इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है .
” हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे ” सूरा -अत तलाक 65 :1
और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है ,वह औरतों के लिए शर्मनाक है
3-हलाला 
तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका(तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे.हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया , तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा . जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले .फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे . तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा “सूरा – बकरा 2 :230

“فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ 2:230

(नोट -इस आयत में अरबी में ” تحلّل لهُ ‘तुहल्लिल लहु”शब्द आया है , मुस्लिम इसका अर्थ “wedding ” करते हैं , जबकि sexual intercourse सही अर्थ होता है .
इसी से ” हलालाह حلالہ ” शब्द बना है . अंगरेजी के एक अनुवाद में है “uptill she consummated intercourse with another person “यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती .)और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को ” रजअ رجع” कहा जाता है .
हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है।
बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं , देखिये (विडिओ )
Teen Talaaq aur Halala part 1

http://www.youtube.com/watch?v=APVNOo5pVg8

4-हलाला का असली उद्देश्य 
हलाला का उद्देश्य पति पत्नी में सुलह कराना नहीं , बल्कि तलाक दी गयी औरत से वेश्यावृत्ति करना है , जो इन हादिसों से साबित होता है ,
-“आयशा ने कहा कि रसूल के पास रिफ़ा अल कुरैजी कि पत्नी आई और बोली , रीफा ने मुझे तलक दे दिया था . और मैंने अब्दुर रहमान बिन अबू जुबैर से शादी कर ली , लेकिन वह नपुंसक है , अब मैं वापिस रिफ़ाके पास जाना चाहती हूँ . रसूल ने कहा जब तक अब्दुर रहमान तुम्हारे साथ विधिवत सम्भोग नहीं कर लेता , तुम रिफ़ा के पास वापिस नहीं जा सकती .
“إلا إذا كان لديك علاقة جنسية كاملة مع “
Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 186
-“उम्मुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तीन बार तलाक कह दिया , और फिर से अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा प्रकट की . रसूल ने कहा ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है .. और जब तक उसकी पत्नी किसी दुसरे मर्द का शहद और वह उसके शहद का स्वाद नहीं चख लेते .
“حتى انها ذاق العسل من الزوج الآخر وذاقه العسل لها “
Abu Dawud, Book 12, Number 2302
5-हलाला व्यवसाय 
जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं ,वहां मुल्ले मुफ्ती अपने दफ्तर बना लेते हैं , और साथ में दस बीस मुस्टंडे भी रखते हैं .इनका काम फतवे देना होता है . चूँकि इस विज्ञानं के युग में नेट , फोन ,और फेक्स जैसे साधन सामान्य है , और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चला है . कई बार मेल या फेक्स से औरत को तलाक की सूचना नहीं मिलती फिर भी मुल्ले तलाक मानकर हलाला तय कर देते हैं .
देखिये देवबंद का फतवा
अगर इंसान शराब के नशे में अपनी बीवी को फोन पर तीन बार तलाक बोल दे, लेकिन बाद में उसे पछतावा हो और वह तलाक न चाहता हो …तो क्या ऐसी सूरत में भी तलाक हो जाएगा’दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता से। इस पर मुफ्तियों ने फतवा जारी किया है कि अगर तलाक नशे की हालत में दिया गया हो, तो भी पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाएगा। फोन पर दिया गया तलाक भी मान्य है। अगर ऐसा शख्स अपनी बीवी के साथ रहना चाहता है तो हलाला के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
the Qazi can separate them both after analyzing the case. Reference Sahih Bukhari 7:63:227 & 231

मुल्ले मुफ्ती फ़ोन से या इशारे से दी गयी तलाक को जिन हदीसों का हवाला देते हैं , उन में से एक यह है ,
-“आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने सिर्फ तीन तलाक देने का इशारा ही किया था , और तलाक हो गयी , फिर उसकी पत्नी ने दुसरे आदमी से शादी कर ली .और अपने पहले पति के पास जाने की इच्छा प्रकट की . क्या ऐसा संभव है ? रसूल ने कहा जब तक उसका दूसरा व्यक्ति उसे तीसरे आदमी से सहवास नहीं नहीं करा देता , औरत पूर्व पति के पास नहीं जा सकती .Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 187
6-हलाली मुल्लों की हकीकत 
चूँकि हलाला करवाने वाली औरत को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ सम्भोग करना और उसका सबूत भी प्रस्तुत करना जरूरी होता है , और फिर ऐसे व्यक्ति को खोजना होता है , जो बाद में उसे तलाक भी दे दे, तभी वह औरत अपने पहले पति के पास जा सकती है . इस लिए इन मुल्लों ने बेकार जवान पाल रखे हैं , जो रुपये लेकर हलाला का धंदा करते है . यह लोग जासूसी करते हैं और जहाँ भी कोई शराब पीकर भी औरत से तलाक बोल देता है वहीँ हलाला करने धमक जाते हैं . विवश होकर मुर्ख मुसलमान अपनी पत्नियाँ हलाला करा लेते है, कई बार तो यह मुफ्ती फर्जी तलाकनामे भी जारी कर देते हैं .दिल्ली के पास बवाना गाँव में यही होता है .ऐसी औरतें जिनका हलाला हो जाता है , वह अल्लाह का हुक्म समझकर चुप रहती है .और मुल्लों को औरत के साथ दौलत भी मिलती है .कुछ लोग इसे बुरा भी कहते हैं , देखिये ,
Halala Nikah s of 6 time a Mosque Imam s wife( video)

http://www.youtube.com/watch?v=tqIbskjydRY

7-लखनऊ की सत्य घटना 
दिनांक 8 मार्च 2011 इतवार को India Times की लखनऊ संवाद दाता मंजरी मिश्रा ने एक चौंकाने वाली खबर दी थी . जिसने मुताबिक दोपहर के समय करीब 200 मुस्लिम महिलाये , सिर्फ दुपट्टा सर पर डाले हुए मुस्लिम वूमेन पर्सनल बोर्ड के दफ्तर में घुस गयीं . वह नारे लगा रही थी की मुस्लिम ख्वातीन को मुल्लों से बचाया जाए , जो फर्जी तलाकनामे बनाकर उनको हलाला करवाने पर दवाब डालते रहते है, या तलाक को रद्द करने के लिए रूपया मांगते हैं . उन औरतों का नेतृत्व शाइस्ता अम्बर कर रही थी .कुछ औरतों ने ऐसे मुल्लों की धुनाई भी कर दी थी .

दिल्ली के पास बवाना गाँव में यही होता है .ऐसी औरतें जिनका हलाला हो जाता है , वह अल्लाह का हुक्म समझकर चुप रहती है .और मुल्लों को औरत के साथ दौलत भी मिलती है





Attachments area

Read Full Post »

Cruelty in the Quran

From: Rajput < >

Cruelty in the Quran

They will wish to come forth from the Fire, but they will not come forth from it. Theirs will be a lasting doom. — 5:37

  1. Don’t bother to warn the disbelievers. Allah has blinded them. Theirs will be an awful doom. 2:6
  2. Allah has sickened their hearts. A painful doom is theirs because they lie. 2:10
  3. A fire has been prepared for the disbelievers, whose fuel is men and stones. 2:24
  4. Disbelievers will be burned with fire. 2:39, 90
  5. “Whosoever hath done evil and his sin surroundeth him; such are rightful owners of the Fire. ” 2:81
  6. If you believe in only part of the Scripture, you will suffer in this life and go to hell in the next. 2:85
  7. Jews are the greediest of all humankind. They’d like to live 1000 years. But they are going to hell. 2:96
  8. For disbelievers is a painful doom. 2:104
  9. For unbelievers: ignominy in this world, an awful doom in the next. 2:114
  10. “And thou wilt not be asked about the owners of hell-fire. ” (They are the non-muslims. ) 2:119
  11. Allah will leave the disbelievers alone for a while, but then he will compel them to the doom of Fire. 2:126
  12. The doom of the disbelievers will not be lightened. 2:162
  13. Allah is severe punishment! 2:165-6
  14. They will not emerge from the Fire. 2:167
  15. Those who hide the Scripture will have their bellies eaten with fire. Theirs will be a painful doom. 2:174
  16. How constant are they in their strife to reach the Fire! 2:175
  17. “Fight in the way of Allah. ” 2:190, 2:244
  18. Believers must retaliate. Those who transgress will have a painful doom. 2:178
  19. Kill disbelievers wherever you find them. If they attack you, then kill them. Such is the reward of disbelievers. (But if they desist in their unbelief, then don’t kill them. ) 2:191-2
  20. “Guard us from the doom of Fire. ” 2:201
  21. Those who fail in their duty to Allah are proud and sinful. They will all go to hell. 2:206
  22. War is ordained by Allah, and all Muslims must be willing to fight, whether they like it or not. 2:216
  23. Those who die in their disbelief will burn forever in the Fire. 2:217
  24. Those who marry unbelievers will burn in the Fire. 2:221
  25. Disbelievers worship false gods. The will burn forever in the Fire. 2:257
  26. “Those who swallow usury . . . are rightful owners of the Fire. ” 2:275
  27. Those who disbelieve the revelations of Allah, theirs will be a heavy doom. 3:4
  28. Those who disbelieve will be fuel for the Fire. 3:10
  29. Those who disbelieve shall be overcome and gathered unto Hell. 3:12
  30. “Guard us from the punishment of Fire. ” 3:16
  31. Those who disbelieve, promise them a painful doom. 3:21
  32. “They [Christians and Jews] say: The Fire will not touch us save for a certain number of days. That which they used to invent hath deceived them regarding their religion. ” (The Fire will burn them forever. ) 3:24
  33. Theirs will be a painful doom. 3:77
  34. All non-Muslims will be rejected by Allah after they die. 3:85
  35. Disbelievers will be cursed by Allah, angels, and men. They will have a painful doom. 3:87-88
  36. Disbelievers will have a painful doom. And they will have no helpers. 3:91
  37. “Ye were upon the brink of an abyss of fire, and He did save you from it. ” 3:103
  38. Disbelievers will have their faces blackened on the last day. They will face an awful doom. 3:105-6
  39. Those who disbelieve will be burnt in the Fire. 3:116
  40. The Fire is prepared for disbelievers. 3:131
  41. We shall cast terror into the hearts of those who disbelieve. Their habitation is the Fire 3:151
  42. “Is one who followeth the pleasure of Allah as one who hath earned condemnation from Allah, whose habitation is the Fire?”

Unbelievers will burn forever in the Fire. 3:162

  1. Theirs will be an awful doom. 3:176
  2. Disbelievers do not harm Allah, but will have a painful doom. 3:177
  3. Disbelievers will have a shameful doom. 3:178
  4. Whoso is removed from the Fire and is made to enter paradise, he indeed is triumphant. ” (The rest will burn forever in the Fire. ) 3:185
  5. Those who brag about doing good will go to hell. 3:188
  6. “Preserve us from the doom of Fire. ” 3:191
  7. “Our Lord! Whom Thou causest to enter the Fire: him indeed Thou hast confounded. For evil-doers there will be no helpers. ” 3:192
  8. Disbelievers will go to Hell. 3:196
  9. Don’t steal from orphans (or Allah will burn you forever in hell). 4:10
  10. Those who disobey Allah and his messenger will be burnt with fire and suffer a painful doom. 4:14
  11. For the disbelievers and those who make a last-minute conversion, Allah has prepared a painful doom. 4:18
  12. “We shall cast him into Fire, and that is ever easy for Allah. ” 4:30
  13. For disbelievers, We prepare a shameful doom. 4:37
  14. Hell is sufficient for their burning. 4:55
  15. Unbelievers will be tormented forever with fire. When their skin is burned off, a fresh skin will be provided. 4:56
  16. Allah will bestow a vast reward on those who fight in religious wars. 4:74
  17. Believers fight for Allah; disbelievers fight for the devil. So fight the minions of the devil. 4:76
  18. Have no unbelieving friends. Kill the unbelievers wherever you find them. 4:89
  19. If the unbelievers do not offer you peace, kill them wherever you find them. Against such you are given clear warrant. 4:91
  20. Believers who kill believers will face the awful doom of hell. 4:93
  21. “Their habitation will be hell, an evil journey’s end. ” 4:97
  22. Those who oppose the messenger and become unbelievers will go to hell. 4:115
  23. Allah will lead them astray and they will go to hell. 4:119-121
  24. Those who believe, then disbelieve, then believe and disbelieve again will never be forgiven by Allah. 4:137
  25. For the hypocrites there will be a painful doom. 4:138
  26. Allah will gather hypocrites and disbelievers into hell. 4:140
  27. The hypocrites will be in the lowest part of hell and no one will help them there. 4:145
  28. You must believe everything Allah and his messengers tell you. Those who don’t are disbelievers and will face a painful doom. 4:150-151
  29. For the wrongdoing Jews, Allah has prepared a painful doom. 4:160-1
  30. God will guide disbelievers down a road that leads to everlasting hell. 4:168-169
  31. If you don’t do good works, Allah will punish you with a painful doom. 4:173
  32. Those who deny Islam will be losers in the Hereafter. 5:5
  33. Disbelievers are the rightful owners of Hell. 5:10
  34. “The owners of the fire. That is the reward of evil-doers. ” 5:29
  35. Those who make war with Allah and his messenger will be killed or crucified, or have their hands and feet on alternate sides cut off, or will be expelled out of the land. That is how they will be treated in this world, and in the next they will have an awful doom. 5:33
  36. Disbelievers will have a painful doom. 5:36
  37. Disbelievers will want to come out of the Fire, but will not. Their will be a lasting doom. 5:37
  38. Cut off the hands of thieves. It is an exemplary punishment from Allah. 5:38
  39. Allah makes some people sin. He will not cleanse their hearts. They will have ignominy in this world, and in the Hereafter an awful doom. 5:41
  40. Life for life, eye for eye, nose for nose, ear for ear, and tooth for tooth. Non-muslims are wrong doers. 5:45
  41. Christians will be burned in the Fire. 5:72
  42. Christians are wrong about the Trinity. For that they will have a painful doom. 5:73
  43. Muslims that make friends with disbelievers will face a doom prepared for them by Allah. 5:80
  44. Disbelievers will be owners of hell-fire. 5:86
  45. Allah will test believers to see if they are afraid. Those who fail a second test will suffer a a painful doom. 5:94
  46. Many generations have been destroyed by Allah. 6:6
  47. Disbelievers will say when they see the Fire that they would have believed if they had known the truth. But they are all liars. 6:27-28
  48. Allah will torment those how deny his revelations. 6:49
  49. Those who disbelieve will be forced to drink boiling water, and will face a painful doom. 6:70
  50. When nonbelievers die, the angels will deliver to them doom and degradation. 6:93
  51. Allah allows some to disbelieve in the afterlife, and to take pleasure in their disbelief, so that he can torment them forever after they die. 6:113
  52. Allah chooses to lead some astray, and he lays ignominy on those who disbelieve. 6:125
  53. Allah will send everyone the Fire, except those he chooses to deliver. 6:128
  54. Let the idolaters kill their children. It is Allah’s will. 6:137
  55. The worst thing anyone can do is deny the revelations of Allah. Those who do so will be awared an evil doom. 6:157
  56. How many a township have We destroyed! As a raid by night, or while they slept at noon, Our terror came unto them. 7:4-5
  57. Allah banishes Iblis and promises to fill hell with those who are mislead by him. 7:18
  58. Disbelievers are the rightful owners of the Fire. 7:36
  59. Entire nations have entered the Fire. Some get a double torment. 7:38
  60. “Taste the doom for what ye used to earn. ” 7:39
  61. Disbelievers will be excluded from heaven. Theirs will be a bed of hell. 7:40-41
  62. Those in the fire will be taunted by those in the Garden. “So how’s it going down there? Are you enjoying the warmth of the Fire?” 7:44
  63. Those in the Garden will plead with Allah not to be cast into the Fire. 7:47
  64. Those in the Fire will cry out to those in heaven, saying: “Pour water on us. ” But Allah has forbidden that to disbelievers. 7:50
  65. “Why preach ye to a folk whom Allah is about to destroy or punish with an awful doom?” 7:164
  66. Allah has already sent many people and jinn to hell. They were worse than cows: they couldn’t see or hear and were neglectful. 7:179
  67. Allah will throw fear into the hearts of the disbelievers, and smite their necks and fingers. 8:12
  68. Disbelievers will be tormented in the Fire. 8:14
  69. When you fight with disbelievers, do not retreat. Those who do will go to hell. 8:15-16
  70. Those that the Muslims killed were not really killed by them. It was Allah who did the killing.

8:17

  • “Rain down stones on us or bring on us some painful doom!” 8:32
  • Taste of the doom because ye disbelieve. 8:35
  • Those who disbelieve will be gathered into hell. 8:36
  • “The wicked will He place piece upon piece, and heap them all together, and consign them unto hell. ” 8:37
  • The angels smite the face and backs of disbelievers, saying: “Taste the punishment of burning!” 8:50
  • The worst beasts in Allah’s sight are the disbelievers. 8:55
  • Don’t let the disbelievers think they can escape. They are your enemy and the enemy of Allah. 8:59-60
  • Had it not been for an ordinance of Allah which had gone before, an awful doom had come upon you. ” 8:68
  • Give tidings (O Muhammad) of a painful doom to those who disbelieve. 9:3
  • Slay the idolaters wherever you find them. 9:5
  • Don’t let idolaters tend the sanctuaries. Their works are in vain and they will be burned in the Fire. 9:17
  • Give tidings (O Muhammad) of a painful doom to the rich and greedy Christian monks and Jewish rabbis. 9:34
  • Those who are tormented in the Fire will have their foreheads and backs branded. 9:35
  • If you refuse to fight, Allah will afflict you with a painful doom. 9:39
  • Disbelievers go to hell. 9:49
  • “Allah will afflict you with a doom from Him or at our hands. ” 9:52
  • Those who vex the Prophet, for them there is a painful doom. 9:60
  • Those who oppose Allah and His messenger will burn in the fire of hell. 9:63
  • Allah promises hypocrites and disbelievers the fire of hell. Allah curses them. They will have a lasting torment. 9:68
  • Fight the disbelievers and hypocrites. Be harsh with them. They are all going to hell anyway. 9:73
  • Allah will afflict disbelievers with a painful doom in this world and the Hereafter. 9:74
  • “Theirs will be a painful doom. ” 9:79
  • Those who refuse to give their wealth and lives to Allah will face the fire of hell. 9:81-83
  • For disbelievers there will be a painful doom. 9:90
  • Non-muslim who pretend to believe (so they won’t be killed by Muslims) are unclean and will go to hell. 9:95
  • The unbelieving Arabs will be punished by Allah with an evil fortune. 9:97-98
  • “We shall chastise them twice; then they will be relegated to a painful doom. ” 9:101
  • Those that ignore Allah will be thown into the fire of hell. 9:109
  • Believers must fight for Allah. They must kill and be killed , and are bound to do so by the Torah, Gospel, and Quran. But Allah will reward them for it. 9:111
  • Don’t pray for idolaters (not even for your family) after it is clear they are people of hell-fire. 9:113
  • Fight disbelievers who are near you, and let them see the harshness in you. 9:123
  • Disbelievers will have a boiling drink and a painful doom. 10:4
  • Those who neglect Allah’s revelations will make their home in the Fire. 10:7-8
  • Allah has destroyed entire generations. 10:13
  • “Such are rightful owners of the Fire. ” 10:27
  • On the last day Allah will kill all the disbelievers (and then he will torture them forever in hell). 10:45
  • “His doom cometh unto you as a raid by night. ” 10:50
  • The damned will feel remorse for what they have done, but it will not save them from the doom that Allah has prepared. 10:54
  • Those who disbelieved will face a dreadful doom. 10:70
  • Allah drowned those who disbelieved his revelations. 10:73
  • Moses asked Allah to harden the hearts of the Egyptians so that they would not believe until they saw the painful doom. 10:88
  • If you deny the revelations of Allah, you will be among the losers and will “see the painful doom. ” 10:95-97
  • “The doom cannot be averted from them, and that which they derided will surround them. ” 11:8
  • Allah sent a lasting doom on those who mocked Noah. 11:39
  • Allah will send a painful doom on several nations. 11:48
  • “Lo! there cometh unto them a doom which cannot be repelled. ” 11:76
  • Allah killed everyone in Sodom and Gomorrah by dropping burning stones on them. 11:82-83
  • Lo! Is fear for you the doom of a besetting Day. ” 11:84
  • “Ye will soon know on whom there cometh a doom that will abase him. ” 11:93
  • “He . . . will lead them to the Fire for watering-place. ” 11:98
  • “The doom of the Hereafter” 11:103
  • Those in the Fire will suffer as long as the heavens and earth endure. 11:106-7
  • “Incline not toward those who do wrong lest the Fire touch you. ” 11:113
  • Allah will fill hell with humans and jinn. 11:119
  • “What shall be his reward, who wisheth evil to thy folk, save prison or a painful doom?” 12:25
  • Disbelievers are the rightful owners of the Fire 13:5
  • Those who do not answer Allah’s call will go to hell. 13:18
  • Disbelievers will be tormented in this life, and suffer even more pain in the Hereafter. 13:33-34
  • The reward for disbelievers is the Fire. 13:35
  • “When Allah doometh there is none that can postpone His doom. ” 13:41
  • Woe unto the disbelievers. Theirs will be an awful doom. 14:2
  • Those who are in hell will be forced to drink festering water which they can hardly swallow. They will want to die, but they will not be able to. Theirs is a harsh doom. 14:16-17
  • There is no escape from Allah’s doom. 14:21
  • “Lo! for wrong-doers is a painful doom. ” 14:22
  • Allah leads wrong-doers astray and then sends them to hell. 14:27-29
  • “They set up rivals to Allah that they may mislead (men) from His way. Say: Enjoy life (while ye may) for lo! your journey’s end will be the Fire. ” 14:30
  • “Warn mankind of a day when the doom will come upon them. ” 14:44
  • Those in hell will be chained together. Their clothing will be made of pitch and fire will cover their faces. 14:49-50
  • Iblis will lead humans astray. Only perfect Muslims will be safe from him. The rest will go to hell. 15:39-43
  • Allah’s doom is a dolorous doom. 15:50
  • Allah made a roof fall in to kill unbelievers. “And the doom came on them whence they knew not. ” 16:26
  • Disbelievers are evil and will dwell in hell forever. 16:27-29
  • Allah “will cause the earth to swallow” those who plan ill-deeds. the doom will come on them when they least expect it. 16:45
  • Theirs will be the Fire, and they will be abandoned. ” 16:62
  • “Theirs will be a painful doom. ” 16:63
  • “The Hour of Doom is but a twinkling of the eye. ” 16:77
  • “When those who did wrong behold the doom, it will not be made light for them. “

Read Full Post »


From: Pramod Agewal < >

आप इन इस्लाम छोङने वाले लोगो की बेबसाईट जरुर पढ़े ..

चूँकि इस्लाम तर्कहीन , निराधार और कपोल कल्पित मान्यताओं पर ही टिका हुआ है , जिसे ईमान के नाम पर मुस्लिम बच्चों पर थोप दिया जाता है , जिस से उनकी सोचने समझने की बुद्धि कुंद हो जाती है और बड़े होकर वह कट्टर जिहादी बन जाते हैं , लेकिन जब भी किसी बुद्धिमान को इस्लाम के भयानक और मानव विरोधी असली रूप का पता चल जाता है ,वह तुरंत इस्लाम के अंधे कुएं से बाहर निकल जाता है . कुछ सौभाग्य शाली प्रसिद्ध लेखकों ,मानवता वादी का संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा है ,

1-इब्ने वर्राक (ابن وراق‎ )-इनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था . यह उनका असली नाम नहीं है , इनके नाम का अर्थ है ” कागज बनाने वाले का बेटा ” क्योंकि उनके पिता कागज बनाते थे . इन्होने इस्लाम की पोल खोलने के लिए कई किताबें और लेख प्रकाशित किये हैं ,इनको दूसरा सलमान रश्दी भी कहा जाता है . इनकी साईट है SecularIslam.org

2-तस्लीमा नसरीन( তসলিমা নাসরিন ) -इनका जन्म बंगला देश में 25 अगस्त सन 1962 में हुआ था . यह इस्लाम छोड़कर नास्तिक ( Atheist) बन गयी , इनकी किताब “लज्जा “पर मुल्लों ने इनकी हत्या करवाने का फतवा दिया था ,इनकी साईट का पता है ,
TaslimaNasrin.com

3-अली सीना ( علي سينا )-इनका जन्म ईरान में हुआ था , यह भी इस्लाम से आजाद होकर नास्तिक (Atheist) बन गए और इस्लाम के महान आलोचक और लेखक हैं ,इनकी किताबों और लेखों के कारन इनको कई बार गिरफ्तार भी किया गया था . लेकिन इनके तर्कों और प्रमाणों के सामने मुल्ले निरुत्तर हो गए ,इन की साईट का नाम है , FaithFreedom.org

4-डॉ ,परवीन दारबी (پروین دارابی )-इनका जन्म ईरान की राजधानी तेहरान में सन 1941 में हुआ था , यह भी इस्लाम को ठुकरा कर नास्तिक बन गई और अमेरिका में बस वहाँगयी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास रत हैं . इन्होने भी कई किताबें और लेख प्रकाशित किये जिन में इस्लाम को बेनकाब किया गया है इनकी साईट है .Homa.org

I5-नौनी दरवेश ( نوني درويش‎ )-इनका जन्म सन 1949 में मध्य एशिया में हुआ था . इन्होने मिस्र में अमेरिका और मिस्र की तरफ से एक मानव अधिकार रक्षक की तरह काम किया था , इन्होने भी इस्लाम छोड़ कर ईसाई धर्म अपना लिया है . इनकी प्रसिद्ध किताब ” Now They Call Me Infidel ” पर भी फतवा जारी हुआ है ,)-NonieDarwish.com

6-अनवर शेख -इनका जन्म एक कश्मीरी पंडित के घर हुआ था , जिसे बल पूर्वक मुसलमान बना दिया था इन्होने अरबी फ़ारसी के साथ इस्लाम का अध्यन किया था . लेकिन इस्लाम की हकीकत पता होजाने पर यह हिन्दू बन गए और अपना नाम अनिरुद्ध ज्ञान शिखा रख लिया . इनकी साईट का नाम है
http://www.islam-watch.org

Read Full Post »

  From: Tilak Shrestha < >
1. Female Muslim Professor Says Rape Is Okay With Allah Against Non Muslim women

2. Muslim Woman claims they can rape non Muslim women #349

3. Brother Rasheed : Allah of Islam legalizes raping Non-Muslim women

 

Read Full Post »

From: Pramod Agrawal < >

कुरान नफरत सिखाती है .

 

दिल्ली की मेट्रोपोलियन मजिस्ट्रेट-2 जैड़ एस लाहोट ने कुरान पर अपना निर्णय देते हुए कहा कि ” कुरान का गहन अध्ययन करने के पश्चात यह स्पष्ट हो जाता है कि कुरान नफरत सिखाती है, यह मानव को दो भागो मे विभक्त करती है 1.मोमिन तो 2. गैर मोमिन अर्थात काफिर ।” कुरान के आधार पर “काफिर जहन्नुम की आग मे जलाने का ईंधन, जाजिया वसुली का जरिया, काफिरो के धर्म स्थल तोड़ कर अपनी मस्जिदे खड़ी करने की जगहे, काफिरो की “स्त्रिया और सम्पतिया गनीमत का माल” कुरान के इन पंथीय आदेशो को मुसलमान कितना मानते है ये अलग विषय हो सकता है चर्चा और प्रमाणित करने का परन्तु समस्त भारतीय राजनीतिक दल ( अखिल भारत हिन्दू महासभा, राम राज्य परिषद एव प्रजाशक्ति पार्टी के अतिरिक्त ) अवश्य कुरान के इन पंथीय आदेशो को शिरोधार्य कर कार्य कर रही है वही देश का “तथाकथित संविधान जो आज तक भारत की चुनी हुई संसद मे आज तक पारित नही हुआ, भी ” देश की कुरान ही प्रमाणित होती है ।” जिस प्रकार कुरान मानव जाति को मोमिन और काफिर के रूप मे विभक्त करती है उसी प्रकार देश का तथाकथित संविधान देश की मानव जाति को बहुसंख्यक और अल्प संख्या के नाम से विभक्त करता है । जिस प्रकार कुरान के अनुसार “जो ईमान पर इस्लाम और नमाज कुबूल नही करता वह काफिर है और काफिर जहन्नुम की आग मे जलाने का ईंधन है, टीक उसी प्रकार जो देश का इस तथाकथित संविधान की किसी अतार्किक और पक्षपातपूर्ण अधिनियम या उपनियम के विरूद्ध अपना मुँह खोले उसे कानून की “जहनुनुमी आग मे झोंक दो ” । जिस प्रकार कुरान मे ” समस्त अधिकार मोमिनो को हो प्राप्त है ठीक उसी प्रकार देश के इस तथाकथित संविधान मे भी ” अल्पसंख्यको को “विशिष्ट मानते हुए सभी क्षेत्रो मे विशाष्ट अधिकार प्राप्त है ” । जिस प्रकार कुरान के अनुसार ” गनीमत के माल मे से जकेत दो ठीक उसी प्रकार बहुसंख्यको को लूटो और लूटने गये उस “गनीमत के माल माल मे से अल्पसंख्यको को जकात दो”…..देश का बहुसंख्यक (काफिर) जहन्नुम (घोर प्रताड़ना और उपेक्षा ) की आग मे जलाने का ईंधन है और इस ईंधन पर अपनी “राजनीतिक रोटिया सेकती रही है हर सरकार , हर राजनीतिक दल । यदि बहुसंख्यक अपने हितो या अपने अधिकारो को प्राप्त करने, अथवा संविधानिक पक्षपात के विरूद्ध आवाज उठाए तो ” देश के ग्रंथ इस तथाकथित इस संविधान मे निहित विभिन्न आपराधिक धाराओ की जंजीरो मे फाँस कर जेल मे ड़ाल दो और उसका वो हश्र कर दो जिसे देख कर ” बहुसंख्यक इतना आतंकित कर दो कि फिर कोई भी बहुसंख्यक विरोध की शक्ति जुटाने से पूर्व अनेक बार सोचे …। शेष अगली पोस्ट मे जारी है ।

 

  • मुकुल मिश्रा ।

Read Full Post »

From: Pramod Agrawal < > wrote:

इन मुस्लिम केअपनी पत्नियों पर किए ज़ुल्म का कालाचिट्ठा पढ़कर आपके होश उड़ जाएँगे !!

शादी के बाद तीन अक्षरों का शब्द तलाक महिला की ज़िन्दगी को तबाह कर देता है. मुस्लिम समाज में यह अक्सर देखने को मिलता है. शादी जैसे पवित्र रिश्ते को एक कठपुतली का खेल समझा जाता है. मुस्लिम समाज में पहले बेगम बनाया जाता है. फिर उन्हें पैर की घिसी हुई जूती की तरह घर से बहार फैंक दिया जाता है. इस बर्ताव से बड़े हैं. इस बात की हकीकत नीचे दी बातों से समझ आ जानी चाहिए.

उमर अब्दुल्ला ने पहले पायल नाथ को बेगम बनाया. फिर बच्चे पैदा किये और बाद में अपनी मर्जी से तलाक दे कर उसे गुमनाम राह पर छोड़ दिया. इमरान ने भी शीला दीक्षित की बेटी लतिका के साथ शादी की. कुछ देर बाद मारपीट कर उसे तलाक दे दिया.

बालीवुड के खानों में टॉप पर चल रहे आमिर खान की पहली पत्नी हिन्दू थी. उसे छोड़ दिया और फिर से एक हिन्दू लड़की से शादी कर ली.

नवाब पटौदी के पुत्र सैफ अली खान ने अमृता सिंह को इस लिए छोड़ दिया क्योंकि उन्हें अपने से बहुत कम उम्र की अभिनेत्री से इश्क हो गया था. यह सिसिला यू हीं बढ़ता रहा जब अमृता राव को अरबाज़ खान ने तलाक के तीन शब्द कह खुद से हमेशा के लिए अलग कर दिया.

अपने समय की बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक रीना रॉय भी मोहसिन खान की पत्नी बनी. मगर यह रिश्ता भी जल्दी तलाक पर ख़त्म हो गया. कांग्रेस विधायक रूबी नाथ असाम की विधायक थी. उनकी कहानी तो और भी दिल दहलाने वाली है. उन्होंने दूसरी शादी एक मुसलमान से की. वो उसे बांग्लादेश ले गया और तलाक देकर वैश्यावृत्ति में धकेल दिया.
बात यही नहीं ख़त्म होती. एक राष्ट्रीय स्टार की शूटर तारा सहदेव से रकीबुल हसन खान ने रणजीत कोहली बन कर पहले शादी की. फिर उसे मुसलमान बना कर तलाक दे दिया. इस फेहरिस्त में बॉलीवुड की नामचीन अभिनेत्री संगीता बिजलानी भी शामिल हैं. जिन्होंने मुल्स्लिम क्रिकेटर अजरूदीन से शादी की. अंत मगर तलाक ही रहा.

इन सभी वाक्यों से यह तो साफ़ नज़र आता है की मुस्लिम समाज में जब भी किसी गैर धर्म की स्त्री ने शादी की, तो उसका अंजाम तकलीफदेह ही रहा. महिलाओं के साथ-साथ उनके बच्चों का भविष्य भी ख़ाक में मिल कर रह गया ।

जब इस लेवल पर जाकर भी मुस्लिम औरतों पर ज़ुल्म करते हैं तो आम समाज में क्या होता होगा ?

 रूमाना सिद्दीक़ी जी लिखती हैं की ,
कब आँखे खोलोगे मुसलमानो ??

1. आप 1400 से ज्यादा सालोँ से अपने हक के लिए लड़े जा रहे है, अल्लाह जाने कौन सा हक़ है जो पूरी दुनियाँ आपको 1400 सालों से नही दे पा रही…
2. आप सिर्फ लड़ने के लिए ही पैदा हुए, जहाँ गैर मुस्लिम है वहां आप उनसे लड़ रहे है, जहाँ गैर मुस्लिम नही है वहां आप आपस में ही लड़ रहे है…
3. आप लड़ना बन्द नही कर सकते इसलिए कम से कम लड़ाई के तरीके बदलिए ताकि आप की हार जीत में बदल सके… आप मेरे देखते देखते 2014 के बाद से भारत में लगातार राजनैतिक रूप से हार रहे है… आप के योगदान के बिना सरकारें बन रही, आपकी मर्जी के खिलाफ पीएम और सीएम बन रहे है… लोग आपको आपकी विचारधारा को नकार रहे हैं… अपने खिलाफ ये नकारात्मक माहौल आपका खुद का बनाया हुआ है…
4. सच्चर कमेटी की रिपोर्ट कहती है मुसलमानो की हालात सबसे खराब है देश में, लाखो मुस्लिम बेघर है, शिक्षा के आभाव में पंचर बना रहे, न आप बड़े उद्योगपति है, न देश में होटल आपके, न मॉल, न हॉस्पिटल आपके, न आपके बैंक एकाउंट न एकाउंट में पैसा लेकिन नोटबन्दी के खिलाफ आप इतने मुखर थे जैसे सबसे बड़ा घाटा आपका ही हुआ, जैसे आपके लाखो करोड़ो के नोट बर्बाद हो गए, जैसे बेरोजगार सिर्फ मुस्लिम ही हुए हो…
5. आप खुद ही कहते रहे की बूचड़खाने भाजपा के हिन्दू नेताओ और जैनियों के है, सिर्फ 14% मांस मुस्लिम खाते है बाकी का हिन्दू खाते है… और अवैध बूचड़खानों पर सबसे ज्यादा कपड़े आप ही फाड़ रहे… तो आप खुद ही अपने झूठ का पर्दाफाश कर के अपने खिलाफ नकरात्मक माहौल बनाते है फिर इलज़ाम दूसरों पर क्यों लगाते है… बूचड़खानों पर या तो आप कल झूठ बोल रहे थे या आज झूठ बोल रहे है…
6. एंटीरोमियो स्क्वाड पर भी आपकी आपत्ति बेवज़ह है… आप अपनी बहू बेटियों को बुर्के में रखते है ताकि बुरी नज़र से बचाया जा सके, महिलाओं को अकेले बाहर जाने की इज़ाज़त नही इस्लाम में, आप पञ्च वक्त के नमाज़ी और ईमान वाले है, आपको भी नज़र के पर्दे का हुक्म है , चरित्रहीन महिला को संगसार करने की सज़ा है इस्लाम में , फिर एंटीरोमियो स्क्वाड का विरोध आप किस लॉजिक के आधार पर कर रहे…?
7. साल भर आप जय भीम जय मीम करते है, भीम भी आपके साथ ब्राह्मणों को गरियाता है और चुनाव के वक्त मीम को छोड़ के भगवा थाम लेता है। आपको ईवीएम टेम्परिंग का झुनझुना पकड़ा दिया जाता है और आप बजाते रह जाते हैं।”
8. देश का नाम भारत है, हिंदुस्तान है पहले आर्यव्रत, रीवा भी था मतलब संस्कृत और हिंदी नाम ही रहे, भारत में साधू संत देवी देवता जन्मे, विद्वान् महापुरुष जन्मे, कोई हिन्दू राजा शाशक कभी इराक ईरान सीरिया सऊदी मिस्र नही गया राज़ करने युद्ध लड़ने अपनी धौस जमाने जैसे की यहाँ भारत में बाबर, हुमांयू, अकबर, ओरंगजेब, गजनबी सहित हजारो मुगल शाशक आए! भारत भूमि का कण कण कहता है की ये राष्ट हिन्दुओ का था और मुस्लिम बाहरी थे फिर भी हिन्दुओ ने मुस्लिमो को स्वीकार किया! हिन्दुओ के लाखो मन्दिर प्राचीनकाल में मुगलो ने तोड़े उनमे से एक राम मन्दिर भी था जिसको बाबर ने मस्जिद का रूप दिया! सीरिया पाक इराक ईरान तालिबान में हजारो मस्जिद बम से उड़ा दी जेहादियो आतंकियों ने उनके लिए कभी रोए नही और यहाँ राम मन्दिर की जंगह, एक मस्जिद के लिए लड़े मरे जा रहे हो! 

रूमाना सिद्दीक़ी

Read Full Post »

From:

Adapted from Dr. Peter Hammond’s book: Slavery, Terrorism and Islam: The Historical Roots and Contemporary Threat

Islam is not a religion, nor is it a cult. In its fullest form, it is a complete, total, 100% system of life.

Islam has religious, legal, political, economic, social, and military components. The religious component is a beard for all of the other components.

Islamization begins when there are sufficient Muslims in a country to agitate for their religious privileges.

When politically correct, tolerant, and culturally diverse societies agree to Muslim demands for their religious privileges, some of the other components tend to creep in as well.

Here’s how it works:

As long as the Muslim population remains around or under 2% in any given country, they will for the most part be regarded as a peace-loving minority, and not as a threat to other citizens. This is the case in:

United States — Muslim 0.6%

Australia — Muslim 1.5%

Canada — Muslim 1.9%

China — Muslim 1.8%

Italy — Muslim 1.5%

Norway — Muslim 1.8%

 

At 2% to 5%, they begin to proselytize from other ethnic minorities and disaffected groups, often with major recruiting from the jails and among street gangs. This is happening in:

Denmark — Muslim 2%

Germany — Muslim 3.7%

United Kingdom — Muslim 2.7%

Spain — Muslim 4%

Thailand — Muslim 4.6%

From 5% on, they exercise an inordinate influence in proportion to their percentage of the population. For example, they will push for the introduction of halal (clean by Islamic standards) food, thereby securing food preparation jobs for Muslims. They will increase pressure on supermarket chains to feature halal on their shelves — along with threats for failure to comply. This is occurring in:

France – Muslim 8%

Philippines – Muslim 5%

Sweden – Muslim 5%

Switzerland – Muslim 4.3%

The Netherlands – Muslim 5.5%

Trinidad & Tobago – Muslim 5.8%

At this point, they will work to get the ruling government to allow them to rule themselves (within their ghettos) under Sharia, the Islamic Law. The ultimate goal of Islamists is to establish Sharia law over the

entire world.

When Muslims approach 10% of the population, they tend to increase lawlessness as a means of complaint about their conditions. In Paris, we are already seeing car-burnings. Any non-Muslim action offends Islam and results in uprisings and threats, such as in Amsterdam, with opposition to Mohammed cartoons and films about Islam. Such tensions are seen daily, particularly in Muslim sections in:

Guyana – Muslim 10%

India – Muslim 13.4%

Israel – Muslim 16%

Kenya – Muslim 10%

Russia – Muslim 15%

After reaching 20%, nations can expect hair-trigger rioting, jihad militia formations, sporadic killings, and the burnings of Christian churches and Jewish synagogues, such as in:

Ethiopia — Muslim 32.8%

At 40%, nations experience widespread massacres, chronic terror attacks, and ongoing militia warfare, such as in:

Bosnia – Muslim 40%

Chad – Muslim 53.1%

Lebanon – Muslim 59.7%

From 60%, nations experience unfettered persecution of non-believers of all other religions (including non-conforming Muslims), sporadic ethnic cleansing (genocide), use of Sharia Law as a weapon, and Jizya, the tax placed on infidels, such as in:

Albania – Muslim 70%

Malaysia – Muslim 60.4%

Qatar – Muslim 77.5%

Sudan – Muslim 70%

After 80%, expect daily intimidation and violent jihad, some State-run ethnic cleansing, and even some genocide, as these nations drive out the infidels, and move toward 100% Muslim, such as has been experienced and in some ways, is on-going in:

Bangladesh – Muslim 83%

Egypt – Muslim 90%

Gaza – Muslim 98.7%

Indonesia – Muslim 86.1%

Iran – Muslim 98%

Iraq – Muslim 97%

Jordan – Muslim 92%

Morocco – Muslim 98.7%

Pakistan – Muslim 97%

Palestine – Muslim 99%

Syria – Muslim 90%

Tajikistan – Muslim 90%

Turkey – Muslim 99.8%

United Arab Emirates – Muslim 96%

100% will usher in the peace of ‘Dar-es-Salaam’ — the Islamic House of Peace. Here there’s supposed to be peace, because everybody is a Muslim, the Madrassas are the only schools, and the Koran is the only word, such as in:

Afghanistan – Muslim 100%

Saudi Arabia – Muslim 100%

Somalia – Muslim 100%

Yemen – Muslim 100%

Unfortunately, peace is never achieved, as in these 100% states the most radical Muslims intimidate and spew hatred, and satisfy their blood lust by killing less radical Muslims, for a variety of reasons.

‘Before I was nine, I had learned the basic canon of Arab life. It was me against my brother; me and my brother against our father; my family against my cousins and the clan; the clan against the tribe; the tribe

against the world, and all of us against the infidel. – Leon Uris, ‘The Haj’

It is important to understand that in some countries, with well under 100% Muslim populations, such as France, the minority Muslim populations live in ghettos, within which they are 100% Muslim, and within which they live by Sharia Law. The national police do not even enter these ghettos. There are no national courts, nor schools, nor non-Muslim religious facilities. In such situations, Muslims do not integrate into the community at large. The children attend madrassas. They learn only the Koran. To even associate with an infidel is a crime punishable with death. Therefore, in some areas of certain nations, Muslim Imams and extremists exercise more power than the national average would indicate.

Today’s 1.5 billion Muslims make up 22% of the world’s population. But their birth rates dwarf the birth rates of Christians, Hindus, Buddhists, Jews, and all other believers. Muslims will exceed 50% of the

world’s population by the end of this century.

Well, boys and girls, today we are letting the fox guard the henhouse. The wolves will be herding the sheep!

Obama appoints two devout Muslims to Homeland Security posts. Doesn’t this make you feel safer already?

 

Obama and Janet Napolitano appoint Arif Alikhan, a devout Muslim, as Assistant Secretary for Policy Development.

DHS Secretary Janet Napolitano swore in Kareem Shora, a devout Muslim who was born in Damascus , Syria , as ADC National Executive Director as a member of the Homeland Security Advisory Council (HSAC).

NOTE: Has anyone ever heard a new government official being identified as a devout Catholic, a devout Jew or a devout Protestant…? Just wondering.

Devout Muslims being appointed to critical Homeland Security positions? Doesn’t this make you feel safer already??

That should make the US ‘ homeland much safer, huh!! Was it not “Devout Muslim men” that flew planes into U.S. buildings eight years ago?

Was it not a Devout Muslim who killed 13 at Fort Hood?

Also: This is very interesting and we all need to read it from start to finish. Maybe this is why our American Muslims are so quiet and not speaking out about any atrocities. Can a good Muslim be a good American? This question was forwarded to a friend who worked in Saudi Arabia for 20 years. The following is his reply:

Theologically – no – Because his allegiance is to Allah, The moon God of Arabia

Religiously – no – Because no other religion is accepted by His Allah except Islam (Quran 2:256) (Koran)

Scripturally – no – Because his allegiance is to the five Pillars of Islam and the Quran.

Geographically – no – Because his allegiance is to Mecca , to which he turns in prayer five times a day.

Socially – no – Because his allegiance to Islam forbids him to make friends with Christians or Jews.

Politically – no – Because he must submit to the mullahs (spiritual leaders), who teach annihilation of Israel and destruction of America, the great Satan.

Domestically – no – Because he is instructed to marry four Women and beat and scourge his wife when she disobeys him (Quran 4:34)

Intellectually – no – Because he cannot accept the American Constitution since it is based on Biblical principles and he believes the Bible to be corrupt.

Philosophically – no – Because Islam, Muhammad, and the Quran do not allow freedom of religion and expression. Democracy and Islam cannot co-exist. Every Muslim government is either dictatorial or autocratic.

Spiritually – no – Because when we declare ‘one nation under God,’ the Christian’s God is loving and kind, while Allah is NEVER referred to as Heavenly father, nor is he ever called love in The Quran’s 99 excellent names.

 

Therefore, after much study and deliberation…Perhaps we should be very suspicious of all Muslims

in this country. Clearly, they cannot be both ‘good’ Muslims and good Americans.

Call it what you wish, it’s still the truth. You had better believe it. The more who understand this, the better it will be for our country and our future. The religious war is bigger than we know or understand.

Can a Muslim be a good soldier??? Army Maj. Nidal Malik Hasan, opened fire at Ft. Hood and Killed 13. He is a good Muslim!!!

Footnote: The Muslims have said they will destroy us from within.

SO, FREEDOM IS NOT FREE.

Read Full Post »

Older Posts »