Feeds:
Posts
Comments

Archive for the ‘Poems’ Category

From: Kumar Arun < >

~~मोदी और ओबामा में फर्क नजर नहीं आता है ~~

मोदी के चलते ही बी जे पी भी प्यारा लगने लगा था
दिन रात एक कर गरीबों में एक आशा जगने लगा था

जो जिंदगी में बोट नहीं डाले ओ भी लम्बी कतारों में खड़े थे
वाजपेयी और आडवाणी को किनारे कर मोदी के लिए बढे थे

आज मोदी बड़े शान से प्रधान बने हैं
हिन्दुओं के दिल में आशा के केंद्र बने हैं

देख हालत के हिन्दुओं के पतन की सिर्फ रोना आता है
सोनिआ के आगे मोदी कुयूं झुकते यह समझ नहीं आता है

कब हिन्दुओं के अच्छे दिन, भारत-माता की आन-बाण बढ़ेगी
कब मोदी बी जे पी के हाथो से इंडिया भी हिन्दुस्थान बनेगी

डॉ. कुमार अरुण
मई २१ , २०१८

Read Full Post »

 

Shrikrishna Pandey < >

April 7 at 11:03pm

 

ये कविता किसने लिखी है, मुझे नहीं मालूम, पर जिसने भी लिखी है उसको नमन करता हूँ।

आरक्षण के मुद्दे पर बहुत ही प्रभावी अभिव्यक्ति है…..

 

करता हूँ अनुरोध आज मैं, भारत की सरकार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

वर्ना रेल पटरियों पर जो, फैला आज तमाशा है,

जाट आन्दोलन से फैली, चारो ओर निराशा है…

 

अगला कदम पंजाबी बैठेंगे, महाविकट हडताल पर,

महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर…

राजपूत भी मचल उठेंगे, भुजबल के हथियार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

निर्धन ब्राम्हण वंश एक दिन परशुराम बन जाएगा,

अपने ही घर के दीपक से, अपना घर जल जाएगा…

भड़क उठा गृह युध्द अगर, भूकम्प भयानक आएगा,

आरक्षण वादी नेताओं का, सर्वस्व मिटाके जायेगा…

 

अभी सम्भल जाओ मित्रों, इस स्वार्थ भरे व्यापार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है,

जो सवर्ण है पर गरीब है, उनका क्या अपराध है…

 

कुचले दबे लोग जिनके, घर मे न चूल्हा जलता है,

भूखा बच्चा जिस कुटिया में, लोरी खाकर पलता है…

समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से,

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

जाति गरीबी की कोई भी, नही मित्रवर होती है,

वह अधिकारी है जिसके घर, भूखी मुनिया सोती है…

भूखे माता-पिता , दवाई बिना तडपते रहते है,

जातिवाद के कारण, कितने लोग वेदना सहते है…

 

उन्हे न वंचित करो मित्र, संरक्षण के अधिकार से

प्रतिभाओं को मत काटो, आरक्षण की तलवार से…

 

I got this post from what’s app.

This is best poetry in my view. Please share it.

 

Read Full Post »

A Poem हवा लगी पश्चिम की

By Vinod Gupta < >

 

हवा लगी पश्चिम की , सारे कुप्पा बनकर गए फूल।

ईस्वी सन तो याद रहा , पर अपना संवत्सर गए भूल ।।

 

चारों तरफ नए साल का , ऐसा मचा है हो-हल्ला ।

बेगानी शादी में नाचे , जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।

 

धरती ठिठुर रही सर्दी से , घना कुहासा छाया है ।

कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है ।।

 

सूनी है पेड़ों की डालें , फूल नहीं हैं उपवन में ।

पर्वत ढके बर्फ से सारे , रंग कहां है जीवन में ।।

 

बाट जोह रही सारी प्रकृति , आतुरता से फागुन का ।

जैसे रस्ता देख रही हो , सजनी अपने साजन का ।।

 

अभी ना उल्लासित हो इतने , आई अभी बहार नहीं ।

हम अपना नववर्ष मनाएंगे , न्यू ईयर हमें स्वीकार नहीं ।।

 

लिए बहारें आँचल में , जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।

फूलों का श्रृंगार करके , धरती दुल्हन बन जाएगी ।।

 

मौसम बड़ा सुहाना होगा , दिल सबके खिल जाएँगे ।

झूमेंगी फसलें खेतों में , हम गीत खुशी के गाएँगे ।।

 

उठो खुद को पहचानो , यूँ कबतक सोते रहोगे तुम ।

चिन्ह गुलामी के कंधों पर , कबतक ढोते रहोगे तुम ।।

 

अपनी समृद्ध परंपराओं का , आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।

आर्यवृत के वासी हैं हम , अब अपना नववर्ष मनाएंगे ।।

 

💐वंदे मातरम💐

Read Full Post »

From: Pramod Agrawal < >

मोहम्मद शहज़ाद खान की कलम से.

 

नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम,

जो जानवरों का गोश्त खाये,

और पाँच वक्त नमाज़ को जाए. नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम.

 

औरत बच्चों का गला कटवाये,

और खुद बाबर कहलाये. नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम.

 

जो मजहब के नाम पर,

मूक जानवर कुर्बान कराये. नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम.

 

जो इंसान किसी इंसान को मारे,

नही चाहिये मुझे ऐसा इंसान. नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम.

 

जो ईमान बेचकर कर खाये,

और खुद को मुसलमान बताये. नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम.

 

कभी गजनबी कभी बाबर, कभी ओरंगजेब बनकर,

इंसानियत का खून बहाया है, कभी हिंदुओं का तो कभी,

अपने ही भाइयों को मारा, जिहाद के नाम पर इंसानियत का,

क़त्ल कर रहे ये हैवान, अगर यही कहता है इस्लाम,

नही चाहिये मुझे ऐसा इस्लाम. (अच्छी बात है। तो इस्लाम छोड दो। – स्कन्द९८७)

 

ए खुदा मुझे अपनी पनाह में ले ले,

इस जिन्दा रूह को शैतान से इंसान बना दे,

नही चाहिये मुझे किसी पीर फकीर की रहमत,

मुझे अकबर बादशाह (नहिं पर) also was very cruel ———

अब्दुल कलाम सा बना दे.

 

इस बहाने इस जमीन का कुछ कर्ज तो चुका पाउँगा,

नही तो मरकर अल्ला को क्या मुँह दिखलाऊंगा.

 

ऐ मेरे परवरदिगार मौत के बाद, मुझे 2 गज जमीं नशीं करना,

जिनने खून बहा ये जमीं हासिल की, उन सब गुनहगारों को माफ़ (ना) करना.

 

अल्ला के नेक बन्दों, मेरी बात एक दिल से लगा लेना,

जिस दौलत पे तुम इतराते हो, उसे असली हकदार को लौटा देना,

खुदा के पास जाने से पहले, अपने सारे गुनाह चुका देना.

 

खुदा के घर किसी का गुनाह माफ़ नही होते.

क्योकिं वहाँ पर झूटे इन्साफ नही होते.

 

यदि मेरे किसी मुसलमान भाई के दिल तक मेरी बात पहुंच जाए,

तो इस ईद पर किसी जानवर की कुर्बानी मत देना, उसकी जगह मिठाई खाना और ख़िलाना.

 

सभी देशवासियों से गुजारिश है इस पोस्ट सहीसलामत आगे भेजें.

 

Read Full Post »

छोडो छोडो          छोडो छोडो।

जन गण मन को छोडो छोडो ॥

 

अंगरेजी राज चला गया है ।

पंचम ज्योर्ज भी नहिं रहा है ॥

 

हमारा विधाता हम हैं अब ।

भारतके चिधाता हम हैं अब ॥

 

तो जन मन गण गायें क्युं हम ?

वंदे मातरम् ही गायेंगे हम ॥

 

वंदे .. .. .. मातरम् ।

वंदे .. .. .. मातरम् ।

==x==

जन मन गण छोडने के कारण निचे की लिंक पर बताये गये हैं।

https://skanda987.wordpress.com/2016/09/03/%e0%a5%a5-%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a5%a5/

Suresh Vyas

www.skanda987.wordpress.com

Read Full Post »

From: Capt. S B Tyagi < >

Poem: । कोलाहल है गद्दारों का ।

 

घाटी मे कोलाहल है, कोलाहल है गद्दारों का ।
मौसम बना हुआ है देखो आतंकी त्यौहारों का ।
मौत हुई  है आतंकी  की  लाखों चेहरे रोए हैं ।
हम तो केवल दाल टमाटर के भावों मे खोए हैं ।
आतंकी का एक जनाजा मानो कोई जलसा है ।
लाखों लोग उमड़ आए हैं जैसे कोई फरिश्ता है ।
सेना पे पथराव किया है अफ़जल के दामादों ने ।
फिर से थाने फूँक दिए हैं धरती के जल्लादों ने ।
सीधा मतलब साथ निभाने वाले भी आतंकी है ।
इन  सबकी  वजह से पूरी घाटी ही आतंकित है ।
दूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के साँपों को ।
चौराहों  पे गोली  मारो साठ साल के पापों को ।
सौ सौ बार नमन् सेना को डटी रही है घाटी मे ।
आतंकी को मिला रही है काट काट के माटी मे ।
सेना को अब आतंको की छाती पे चढ़ जाने दो ।
साथ निभाने वालों पे भी अब गोली बरसाने दो ।
एक बार अब श्वेत बर्फ पे लाल रंग चढ़ जाने दो ।
लाश बिछा दो गद्दारों की सेना को बढ़ जाने दो ।
एक परीक्षण नये बमों का गद्दारों पे कर डालो ।
दहशतगर्दों के सीने मे तुम भी दहशत भर डालो ।
भूलो गिनती गद्दारों की लाश बिछाना शुरू करो ।
वंदे मातरम् भारत माँ की जय तराने शुरू करो ।
देशप्रेमियों की सैनिकों पूरी मन्नत कर डालो ।
नर्क भेज के गद्दारों को भूमि जन्नत कर डालो ।

 

Read Full Post »

From: Pramod Agrawal < >

भारत का नया राष्ट्रगीत
New National Song of India

आओ बच्चों तुम्हे दिखायें,
शैतानी शैतान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

बड़े-बड़े नेता शामिल हैं,
घोटालों की थाली में।

सूटकेश भर के चलते हैं,
अपने यहाँ दलाली में।।

देश-धर्म की नहीं है चिंता,
चिन्ता निज सन्तान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

चोर-लुटेरे भी अब देखो,
सांसद और विधायक हैं।

सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये,
सचमुच के खलनायक हैं।।

भिखमंगों में गिनती कर दी,
भारत देश महान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

जनता के आवंटित धन को,
आधा मन्त्री खाते हैं।

बाकी में अफसर-ठेकेदार,
मिलकर मौज उड़ाते हैं।।

लूट-खसोट मचा रखी है,
सरकारी अनुदान की।

नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की।।

थर्ड क्लास अफसर बन जाता,
फर्स्ट क्लास चपरासी है।

होशियार बच्चों के मन में,
छायी आज उदासी है।।

गंवार सारे मंत्री बन गये,
मेधावी आज खलासी है।

आओ बच्चों तुम्हें दिखायें,
शैतानी शैतान की।।

नेताओं से बहुत दुखी है,.
जनता हिन्दुस्तान की।

Read Full Post »

Older Posts »