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From Pramod Agrawal < >

 

शरीर के 7 चक्र बनाते हैं चमकदार,

आप भी कर सकते हैं उन्हें सक्रिय

 

  1. मूलाधार चक्र:

 

यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाला यह ‘आधार चक्र’ है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।

 

मंत्र : लं

चक्र जगाने की विधि : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है- यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।

 

प्रभाव :  इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।

 

  1. स्वाधिष्ठान चक्र-

 

यह वह चक्र है, जो लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर स्थित है जिसकी 6 पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है तो आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।

 

मंत्र : वं

कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।

 

प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश

होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हों तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।

 

  1. मणिपुर चक्र :

 

नाभि के मूल में स्थित यह शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो 10 कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।

 

मंत्र : रं

कैसे जाग्रत करें : आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।

 

प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं।

आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।

 

  1. अनाहत चक्र-

 

हृदयस्थल में स्थित द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही अनाहत चक्र है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं। आप चित्रकार, कवि, कहानीकार, इंजीनियर आदि हो सकते हैं।

 

मंत्र : यं  कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।

 

प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता है। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।

 

  1. विशुद्ध चक्र-

 

कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां विशुद्ध चक्र है और जो 16 पंखुरियों वाला है। सामान्य तौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होंगे।

 

मंत्र : हं   कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

 

प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर 16 कलाओं और 16 विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

 

  1. आज्ञाचक्र :

 

भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में आज्ञा चक्र है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। इसे बौद्धिक सिद्धि कहते हैं।

 

मंत्र : उ

कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।

 

प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति सिद्धपुरुष बन जाता है।

 

  1. सहस्रार चक्र :

 

सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।

 

मंत्र : ॐ

कैसे जाग्रत करें :  मूलाधार से होते हुए ही सहस्रार तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।

 

प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही मोक्ष का द्वार है।

From Pramod Agrawal < >

 

Scottish Diplomacy  (Slightly re-worded, and last item added by skanda987)
Jeff Foxworthy on Muslims:  1. If one refines heroin for a living,

but one has a moral objection to liquor.  One may be a Muslim  2. If one owns a £3,000 machine gun and £5,000 rocket launcher,

but one can’t afford shoes, One may be a Muslim  3. If one has more wives than teeth,  One may be a Muslim  4. If one wipes one’s butt with one’s bare hand,

but considers bacon unclean, One may be a Muslim  5. If one thinks vests come in two styles:

Bullet-proof and suicide,  One may be a Muslim  6. If one can’t think of anyone against whom

one hasn’t declared Jihad,  One may be a Muslim  7. If one considers television dangerous,

but routinely carries explosives in one’s clothing,  One may be a Muslim  8. If one was amazed to discover that cell phones

have uses other than setting off roadside bombs, One may be a Muslim 9. If one treats women not as human but a private property

and think every man should own at least four,  One may be a Muslim  10. If one find this offensive or racist

and doesn’t forward it,  One may be a Muslim

 

  1. If one joins a gang to rape non-Muslim females of any age in public and in daylight,

and kills one’s daughter, sister, or mother because she was found to have an affair with another man,

One may be a Muslim
 

 

From: Pramod Agrawal < >

 

ध्वनि तथा वाणी विज्ञान : सात सुरों का भारतीय संसार

लेखक – सुरेश सोनी

 

सृष्टि की उत्पत्ति की प्रक्रिया नाद के साथ हुई। जब प्रथम महास्फोट (बिग बैंग) हुआ, तब आदि नाद उत्पन्न हुआ। उस मूल ध्वनि को जिसका प्रतीक ‘ॐ‘ है, नादव्रह्म कहा जाता है। पांतजलि योगसूत्र में पातंजलि मुनि ने इसका वर्णन ‘तस्य वाचक प्रणव:‘ की अभिव्यक्ति ॐ के रूप में है, ऐसा कहा है। माण्डूक्योपनिषद्‌ में कहा है-

 

ओमित्येतदक्षरमिदम्‌ सर्वं तस्योपव्याख्यानं

भूतं भवद्भविष्यदिपि सर्वमोड्‌◌ंकार एवं

यच्यान्यत्‌ त्रिकालातीतं तदप्योङ्कार एव॥ – माण्डूक्योपनिषद्‌-१॥

 

अर्थात्‌ ॐ अक्षर अविनाशी स्वरूप है। यह संम्पूर्ण जगत का ही उपव्याख्यान है। जो हो चुका है, जो है तथा जो होने वाला है, यह सबका सब जगत ओंकार ही है तथा जो ऊपर कहे हुए तीनों कालों से अतीत अन्य तत्व है, वह भी ओंकार ही है।

 

वाणी का स्वरूप हमारे यहां वाणी विज्ञान का बहुत गहराई से विचार किया गया। ऋग्वेद में एक ऋचा आती है-

 

चत्वारि वाक्‌ परिमिता पदानि

तानि विदुर्व्राह्मणा ये मनीषिण:

गुहा त्रीणि निहिता नेङ्गयन्ति

तुरीयं वाचो मनुष्या वदन्ति॥ – ऋग्वेद १-१६४-४५

 

अर्थात्‌ वाणी के चार पाद होते हैं, जिन्हें विद्वान मनीषी जानते हैं। इनमें से तीन शरीर के अंदर होने से गुप्त हैं परन्तु चौथे को अनुभव कर सकते हैं। इसकी विस्तृत व्याख्या करते हुए पाणिनी कहते हैं, वाणी के चार पाद या रूप हैं-

 

१. परा, २. पश्यन्ती, ३. मध्यमा, ४. वैखरी

 

वाणी की उत्पत्ति –

वाणी कहां से उत्पन्न होती है, इसकी गहराई में जाकर अनुभूति की गई है। इस आधार पर पाणिनी कहते हैं, आत्मा वह मूल आधार है जहां से ध्वनि उत्पन्न होती है। वह इसका पहला रूप है। यह अनुभूति का विषय है। किसी यंत्र के द्वारा सुनाई नहीं देती। ध्वनि के इस रूप को परा कहा गया।

 

आगे जब आत्मा, बुद्धि तथा अर्थ की सहायता से मन: पटल पर कर्ता, कर्म या क्रिया का चित्र देखता है, वाणी का यह रूप पश्यन्ती कहलाता है, जिसे आजकल घ्त्ड़द्यदृद्धत्ठ्ठथ्‌ कहते हैं। हम जो कुछ बोलते हैं, पहले उसका चित्र हमारे मन में बनता है। इस कारण दूसरा चरण पश्यन्ती है।

 

इसके आगे मन व शरीर की ऊर्जा को प्रेरित कर न सुनाई देने वाला ध्वनि का बुद् बुद् उत्पन्न करता है। वह बुद् बुद् ऊपर उठता है तथा छाती से नि:श्वास की सहायता से कण्ठ तक आता है। वाणी के इस रूप को मध्यमा कहा जाता है। ये तीनों रूप सुनाई नहीं देते हैं। इसके आगे यह बुद्बुद् कंठ के ऊपर पांच स्पर्श स्थानों की सहायता से सर्वस्वर, व्यंजन, युग्माक्षर और मात्रा द्वारा भिन्न-भिन्न रूप में वाणी के रूप में अभिव्यक्त होता है। यही सुनाई देने वाली वाणी वैखरी कहलाती है और इस वैखरी वाणी से ही सम्पूर्ण ज्ञान, विज्ञान, जीवन व्यवहार तथा बोलचाल की अभिव्यक्ति संभव है।

 

वाणी की अभिव्यक्ति –

यहां हम देखते हैं कि कितनी सूक्ष्मता से उन्होंने मुख से निकलने वाली वाणी का निरीक्षण किया तथा क से ज्ञ तक वर्ण किस अंग की सहायता से निकलते हैं, इसका उन्होंने जो विश्लेषण किया वह इतना विज्ञान सम्मत है कि उसके अतिरिक्त अन्य ढंग से आप वह ध्वनि निकाल ही नहीं सकते हैं।

 

क, ख, ग, घ, ङ – कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है।

च, छ, ज, झ,ञ – तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ लालू से लगती है।

ट, ठ, ड, ढ , ण – मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है।

त, थ, द, ध, न – दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है।

प, फ, ब, भ, म – ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है।

 

स्वर विज्ञान –

सभी वर्ण, संयुक्ताक्षर, मात्रा आदि के उच्चारण का मूल ‘स्वर‘ हैं। अत: उसका भी गहराई से अध्ययन तथा अनुभव किया गया। इसके निष्कर्ष के रूप में प्रतिपादित किया गया कि स्वर तीन प्रकार के हैं।

 

उदात्त- उच्च स्वर

अनुदात्त- नीचे का स्वर

स्वरित- मध्यम स्वर

 

इनका और सूक्ष्म विश्लेषण किया गया, जो संगीत शास्त्र का आधार बना। संगीत शास्त्र में सात स्वर माने गए जिन्हें सा रे ग म प ध नि के प्रतीक चिन्हों से जाना जाता है। इन सात स्वरों का मूल तीन स्वरों में विभाजन किया गया।

 

उच्चैर्निषाद, गांधारौ नीचै ऋर्षभधैवतौ।

शेषास्तु स्वरिता ज्ञेया:, षड्ज मध्यमपंचमा:॥

 

अर्थात्‌ निषाद तथा गांधार (नि ग) स्वर उदात्त हैं। ऋषभ और धैवत (रे, ध) अनुदात्त। षड्ज, मध्यम और पंचम (सा, म, प) ये स्वरित हैं।

 

इन सातों स्वरों के विभिन्न प्रकार के समायोजन से विभिन्न रागों के रूप बने और उन रागों के गायन में उत्पन्न विभिन्न ध्वनि तरंगों का परिणाम मानव, पशु प्रकृति सब पर पड़ता है। इसका भी बहुत सूक्ष्म निरीक्षण हमारे यहां किया गया है।

 

विशिष्ट मंत्रों के विशिष्ट ढंग से उच्चारण से वायुमण्डल में विशेष प्रकार के कंपन उत्पन्न होते हैं, जिनका विशेष परिणाम होता है। यह मंत्रविज्ञान का आधार है। इसकी अनुभूति वेद मंत्रों के श्रवण या मंदिर के गुंबज के नीचे मंत्रपाठ के समय अनुभव में आती है।

 

हमारे यहां विभिन्न रागों के गायन व परिणाम के अनेक उल्लेख प्राचीनकाल से मिलते हैं। सुबह, शाम, हर्ष, शोक, उत्साह, करुणा-भिन्न-भिन्न प्रसंगों के भिन्न-भिन्न राग हैं। दीपक से दीपक जलना और मेघ मल्हार से वर्षा होना आदि उल्लेख मिलते हैं। वर्तमान में भी कुछ उदाहरण मिलते हैं।

 

कुछ अनुभव –

(१) प्रसिद्ध संगीतज्ञ पं. ओंकार नाथ ठाकुर १९३३ में फ्लोरेन्स (इटली) में आयोजित अखिल विश्व संगीत सम्मेलन में भाग लेने गए। उस समय मुसोलिनी वहां का तानाशाह था। उस प्रवास में मुसोलिनी से मुलाकात के समय पंडित जी ने भारतीय रागों के महत्व के बारे में बताया। इस पर मुसोलिनी ने कहा, मुझे कुछ दिनों से नींद नहीं आ रही है। यदि आपके संगीत में कुछ विशेषता हो, तो बताइये। इस पर पं. ओंकार नाथ ठाकुर ने तानपूरा लिया और राग ‘पूरिया‘ (कोमल धैवत का) गाने लगे। कुछ समय के अंदर मुसोलिनी को प्रगाढ़ निद्रा आ गई। बाद में उसने भारतीय संगीत की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा रॉयल एकेडमी ऑफ म्यूजिक के प्राचार्य को पंडित जी के संगीत के स्वर एवं लिपि को रिकार्ड करने का आदेश दिया।

 

२. आजकल पाश्चात्य जीवन मूल्य, आचार तथा व्यवहार का प्रभाव पड़ने के साथ युवा पीढ़ी में पाश्चात्य पॉप म्यूजिक का भी आकर्षण बढ़ रहा है। पॉप म्यूजिक आन्तरिक व्यक्तित्व को कुंठित और निम्न भावनाओं को बढ़ाने का कारण बनता है, जबकि भारतीय संगीत जीवन में संतुलन तथा उदात्त भावनाओं को विकसित करने का माध्यम है। इसे निम्न अनुभव प्रयोग स्पष्ट कर सकते हैं।

 

पांडिचेरी स्थित श्री अरविंद आश्रम में श्रीमां ने एक प्रयोग किया। एक मैदान में दो स्थानों पर एक ही प्रकार के बीज बोये गये तथा उनमें से एक के आगे पॉप म्यूजिक बजाया गया तथा दूसरे के आगे भारतीय संगीत। समय के साथ अंकुर फूटा और पौधा बढ़ने लगा। परन्तु आश्चर्य यह था कि जहां पॉप म्यूजिक बजता था, वह पौधा असंतुलित तथा उसके पत्ते कटे-फटे थे। जहां भारतीय संगीत बजता था, वह पौधा संतुलित तथा उसके पत्ते पूर्ण आकार के और विकसित थे। यह देखकर श्रीमां ने कहा, दोनों संगीतों का प्रभाव मानव के आन्तरिक व्यक्तित्व पर भी उसी प्रकार पड़ता है जिस प्रकार इन पौधों पर पड़ा दिखाई देता है।

 

(३) हम लोग संगीत सुनते हैं तो एक बात का सूक्ष्मता से निरीक्षण करें, इससे पाश्चात्य तथा भारतीय संगीत की प्रकृति तथा परिणाम का सूक्ष्मता से ज्ञान हो सकता है। जब कभी किसी संगीत सभा में पं. भीमसेन जोशी, पं. जसराज या अन्य किसी का गायन होता है और उस शास्त्रीय गायन में जब श्रोता उससे एकाकार हो जाते हैं तो उनका मन उसमें मस्त हो जाता है, तब प्राप्त आनन्द की अनुभूति में वे सिर हिलाते हैं। दूसरी ओर जब पाश्चात्य संगीत बजता है, कोई माइकेल जैक्सन, मैडोना का चीखते-चिल्लाते स्वरों के आरोह-अवरोह चालू होते हैं तो उसके साथ ही श्रोता के पैर थिरकने लगते हैं। अत: ध्यान में आता है कि भारतीय संगीत मानव की नाभि के ऊपर की भावनाएं विकसित करता है और पाश्चात्य पॉप म्यूजिक नाभि के नीचे की भावनाएं बढ़ाता है जो मानव के आन्तरिक व्यक्तित्व को विखंडित कर देता है।

 

ध्वनि कम्पन (च्दृद्वदड्ड ज्त्डद्धठ्ठद्यत्दृद) किसी घंटी पर प्रहार करते हैं तो उसकी ध्वनि देर तक सुनाई देती है। इसकी प्रक्रिया क्या है? इसकी व्याख्या में वात्स्यायन तथा उद्योतकर कहते हैं कि आघात में कुछ ध्वनि परमाणु अपनी जगह छोड़कर और संस्कार जिसे कम्प संतान-संस्कार कहते हैं, से एक प्रकार का कम्पन पैदा होता है और वायु के सहारे वह आगे बढ़ता है तथा मन्द तथा मन्दतर इस रूप में अविच्छिन्न रूप से सुनाई देता है। इसकी उत्पत्ति का कारण स्पन्दन है।

 

प्रतिध्वनि : विज्ञान भिक्षु अपने प्रवचन भाष्य अध्याय १ सूत्र ७ में कहते हैं कि प्रतिध्वनि (कड़ण्दृ) क्या है? इसकी व्याख्या में कहा गया कि जैसे पानी या दर्पण में चित्र दिखता है, वह प्रतिबिम्ब है। इसी प्रकार ध्वनि टकराकर पुन: सुनाई देती है, वह प्रतिध्वनि है। जैसे जल या दर्पण का बिम्ब वास्तविक चित्र नहीं है, उसी प्रकार प्रतिध्वनि भी वास्तविक ध्वनि नहीं है।

 

रूपवत्त्वं च न सामान्य त: प्रतिबिम्ब प्रयोजकं

शब्दास्यापि प्रतिध्वनि रूप प्रतिबिम्ब दर्शनात्‌॥ – विज्ञान भिक्षु, प्रवचन भाष्य अ. १ सूत्र-४७

 

घ्त्ड़ण्‌ क्ष्दद्यड्ढदद्मत्द्यन्र्‌ ठ्ठदड्ड च्र्त्थ्र्डद्धड्ढ – वाचस्पति मिश्र के अनुसार ‘शब्दस्य असाधारण धर्म:‘- शब्द के अनेक असाधारण गुण होते हैं। गंगेश उपाध्याय जी ने ‘तत्व चिंतामणि‘ में कहा – ‘वायोरेव मन्दतर तमादिक्रमेण मन्दादि शब्दात्पत्ति।‘ वायु की सहायता से मन्द-तीव्र शब्द उत्पन्न होते हैं।

 

वाचस्पति, जैमिनी, उदयन आदि आचार्यों ने बहुत विस्तारपूर्वक अपने ग्रंथों में ध्वनि की उत्पत्ति, कम्पन, प्रतिध्वनि, उसकी तीव्रता, मन्दता, उनके परिणाम आदि का हजारों वर्ष पूर्व किया जो विश्लेषण है, वह आज भी चमत्कृत करता है।

 

From Pramod Agrawal < >

 

वकास अब्दुल्लाह ने एक पोस्ट में लिखा है कि.., वे RSS के स्कूल में पढ़ते थे जिसका नाम सरस्वती विद्या मंदिर है…

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वकास ने लिखा है कि – “मैं अपनी क्लास के चारों सेक्शन में 1 ही मुस्लिम विद्यार्थी था , मैंने राम स्तुति , शिव स्तुति , हनुमान चालीसा भोजन मन्त्र और सभी हिन्दू रीती रिवाजों को सिखा और उनके बारे में जाना और मैंने अपने हिन्दू दोस्तों के साथ हिन्दुओं के सभी त्यौहार धूमधाम से मनाये …”

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“मैं कुछ अध्यापकों का सबसे ज्यादा चाहा जाने वाला विद्यार्थी बन गया था , मुझे गणित विषय में दिक्कत होती थी तो मेरे टीचर मुझे एक्स्ट्रा टाइम देकर पढ़ाते थे, यहाँ तक कि रविवार के दिन वो मुझे अपने घर बुलाकर पढ़ाते थे पर उन्होंने मुझसे कभी 1 पैसा नही माँगा …”

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“मैं परीक्षा में 80 % अंकों के साथ पास हुआ था उसके बाद मैंने MCA किया और मुझे अपना कोर्से खतम होने से पहले ही अच्छी नौकरी मिल गयी थी | ये सब इसलिए संभव हो पाया क्यूंकि मेरे गणित के अध्यापक ने मेरी इतनी मदद की थी | मैं एक मुस्लिम बच्चा था वे चाहते ( RSS वाले ) तो आसानी से मेरी उपेक्षा कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नही किया मैंने हिन्दू दोस्त बनाये , अध्यापक मुझे इतना प्यार करते थे कि कभी मुझे दुसरे मजहब का हूँ ये महसूस ही नही होने दिया …”

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“मैं भारत को छोड़कर किसी अन्य देश में ये कल्पना भी नही कर सकता जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक ना हों, मुझे अपने देश , अपने स्कूल और अपने अध्यापकों पर गर्व है और मैं अपने माता पिता का भी शुक्रगुजार हूँ कि उन्होंने बिना किसी की बात पर ध्यान दिए मुझे इस RSS के स्कूल में दाखिल करवाया | मैं भगवान का भी धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने इस स्कूल में दाखिला दिलवाकर मुझे ऐसा मौका दिया कि मैं बेहतर बन सका और सीख पाया कि कोई भी मजहब मानवता से बेहतर नही होता ….”

 

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वकास के अनुभव से साफ़ पता चलता है कि RSS के क्या संस्कार है और वो दुसरे मजहब वालों को भी क्या सिखाते हैं और क्या देते हैं , , हम वकास अब्दुल्लाह का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने अपने अनुभव साँझा किये इससे RSS के बारे भारतीय लोगों में कुछ भ्रान्ति दूर होने में मदद मिलेगी ….

अधिकतर जज है वामपंथी,

सिफारिशों से बने है जज, कांग्रेस ने अदालतों को भी बना दिया है हिन्दू विरोधी

 

भारतीय न्यायालय के आँखों देखे व्रतांत-

 

-वकील सर ये दारा सिंह है इसने गौ और हिन्दू हित में आवाज उठाई है।

कोर्ट- जेल में डाल के सड़ा दो इसे।

 

वकील-सर ये साध्वी प्रज्ञा है इसने हिंदुओं को एक करना का काम किया है।

कोर्ट-जेल में ठूंस के अमानवीय अत्याचार करो इसके साथ।

 

वकील-सर ये स्वामी असीमानंद हैं इन्होंने भी हिन्दू हित में काम किया है।

कोर्ट- डालो जेल में जल्दी।

 

वकील-सर ये कर्नल पुरोहित हैं ये देशभक्त और हिन्दू हितैषी हैं।

कोर्ट-फैंको जेल में जल्दी।

 

वकील-सर ये धनंजय देसाई है ये हिंदुओं के समर्थन में बोलते हैं।

कोर्ट-फैंको जेल में इसको।

 

वकील-सर ये कमलेश तिवारी हैं ये हिंदुओं को कोई गाली दे तो उसका जवाब दे देते हैं।

कोर्ट-इतनी हिम्मत,ठूंस दो जेल में।

 

वकील-सर ये स्वामी यशवीर हैं ये भी हिंदुओं में एकता करके धर्मरक्षा करना चाहते हैं।

कोर्ट- इसका बाहर क्या काम?,डालो जेल में।

 

वकील-सर ये ओवेसी है ये भगवान राम को गाली और हिंदुओं के कत्लेआम की धमकी दे रहा है।

कोर्ट- कोई बात नहीं मुकदमा ही नहीं बनता छोड़ो इन् साहब को।

 

वकील-सर ये आजम खान है भारत माता को गाली देता है,हिंदुओं का धर्मपरिवर्तन कराता है।(आजमगढ़)

कोर्ट-चुप !!! जाने दो इन साहब को।

 

वकील-सर ये इमाम बुखारी है इसके भी भारत के विरुद्ध किये गए अपराध बहुत ज्यादा हैं।

कोर्ट- बाईज्जत बरी करो इनको।

 

वकील-ये याकूब मेमन है इसने बम से बहुत हिंदुओं को मारा है।

कोर्ट-इस बेचारे के लिए आज रात को कोर्ट खोलेंगे हम।

 

वकील-सर ये JNU के जिहादी लड़के हैं भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी की कसम खा रहे हैं।

कोर्ट-अरे प्यारे बच्चे हैं छोड़ो मासूमों कोई बात नहीं।

 

वकील-सर ये कन्हैया है भारत की सेना को बलात्कारी कह रहा है।

कोर्ट-जाने दो इस प्यारे से बच्चे को।

 

वकील-सर ये सलमान खान है इसने दुर्लभ प्रजाति के हिरण को मारा है और सोये हुए लोगों पर दारू पी कर गाड़ी चढ़ा कर मार दिया।

कोर्ट-कोई बात नहीं उन्हें तो मौत आई ही हुई थी। बरी करो इन साहब को।

 

वकील-सर ये कश्मीर के जिहादी हैं भारत की सेना पर पत्थर और गोलीबारी करते हैं, इस्लामिक स्टेट के झण्डे लहराते हैं,भारत माता को गाली देते हैं,आतंकवाद का समर्थन करते हैं,कश्मीर को भारत से तोडना चाहते हैं।

कोर्ट-खबरदार जो इन पर कोई पैलेट गन चलाई तो आदेश है ये हमारा।

 

वकील-सर ये जाकिर है हिन्दू धर्म का अपमान करता है आतंवाद को बढ़ावा देता है।

कोर्ट-इन बेचारे को हम कुछ नहीं कह सकते।

 

वकील- ये तो अन्याय है जुल्म है जज साहब।

कोर्ट-खामोश!!!! तू बताएगा हमें कैसे न्याय करना है///

 

ये सेक्युलर कोर्ट है भारत का यहाँ का न्याय सेक्युलर संविधान से चलेगा। भारत की अदालतों का यही हाल है क्योंकि ये सेक्युलर संविधान से लेकर वामपंथी और सेक्युलर जज जो सिफारिशों से बिठाये गए हैऔर इनके आये दिन आने वाले फैसलों से भी ये बात साबित होती है,

 

ये बकरीद पर चूप रहते है पर जल्लीकट्टू पर फैसला करते है,पुरे तंत्र को ही कांग्रेस हिन्दू विरोधी बना चुकी है जिसे ठीक करने में नरेंद्र मोदी को समय भी चाहिए और जनता का साथभी!

Proving Universality of Vedic Dharma

Please share with others.

-skanda987

From: Pramod Agrawal < >

 

Valmikis’ stunningly accurate account:

The facts about Ram…

The story of Shri Rams’ life was first narrated by Maharishi Valmiki in the Ramayana, which was written after Shri Ram was crowned as the king of Ayodhya. Maharishi Valmiki was a great astronomer as he has made sequential astronomical references on important dates related to the life of Shri Ram indicating the location of planets vis-a-vis zodiac constellations and the other stars (nakshatras).

Needless to add that similar position of planets and nakshatras is not repeated in thousands of years.

By entering the precise details of the planetary configuration of the important events in the life of Shri Ram as given in the Valmiki Ramayan in the software named “Planetarium” corresponding exact dates of these events according to the English calendar can be known.

Mr Pushkar Bhatnagar, of the Indian Revenue Service, had acquired this software from the US. It is used to predict the solar/lunar eclipses and distance and location of other planets from earth. He entered the relevant details about the planetary positions narrated by Maharishi Valmiki and obtained very interesting and convincing results, which almost determine the important dates starting from the birth of Shri Ram to the date of his coming back to Ayodhya after 14 years of exile. Maharishi Valmiki has recorded in Bal Kaand, sarga 19 and shloka eight and nine (1/18/8,9), that Shri Ram was born on ninth tithi of Chaitra month when the position of different planets vis-a-vis zodiac constellations and nakshatras (visible stars) were:

  1. i) Sun in Aries; ii) Saturn in Libra; iii) Jupiter in Cancer; iv) Venus in Pisces; v) Mars in Capricorn; vi) Lunar month of Chaitra; vii) Ninth day after no moon; viii) Lagna as Cancer (cancer was rising in the east); ix) Moon on the Punarvasu (Gemini constellation & Pllux star); x) Day time (around noon).

This data was fed into the software. The results indicated that this was exactly the location of planets/stars in the noon of January 10, 5114 BC. Thus, Shri Ram was born on January 10, 5114 BC (7121 years back). As per the Indian calendar, it was the ninth day of Shukla Paksha in Chaitra month and the time was around 12 to 1 noontime. This is exactly the time and date when Ram Navmi is celebrated all over India.

Shri Ram was born in Ayodhya. This fact can be ascertained from several books written by Indian and foreign authors before and after the birth of Christ – Valmiki Ramayan, Tulsi Ramayan, Kalidasas’ , Baudh and Jain literature, etc.

These books have narrated in great detail the location, rich architecture and beauty of Ayodhya which had many palaces and temples built all over the kingdom. Ayodhya was located on the banks of the Saryu river with Gangaand Panchal Pradesh on one side and Mithila on the other side.

Normally 7,000 years is a very long period during which earthquakes, storms, floods and foreign invasions change the course of rivers, destroy the towns/buildings and alter the territories. Therefore, the task of unearthing the facts is monumental.

The present Ayodhya has shrunk in size and the rivers have changed their course about 40 km north/south. Shri Ram went out of Ayodhya in his childhood

(13th year as per Valmiki Ramayan) with Rishi Vishwamitra who lived in Tapovan (Sidhhashram). From there he went to Mithila, King Janaks’ kingdom. Here, he married Sita after breaking Shiv Dhanusha.

Researchers have gone along the route adopted by Shri Ram as narrated in the Valmiki Ramayan and found 23 places which have memorials that commemorate the events related to the life of Shri Ram. These include:

Shringi Ashram,

Ramghat,

Tadka Van,

Sidhhashram,

Gautamashram,

Janakpur (now in Nepal),

Sita Kund, etc.

Memorials are built for great men and not for fictitious characters. Date of exile of Shri Ram: It is mentioned in Valmiki Ramayans’ Ayodhya Kand (2/4/18) that Dashratha wanted to make Shri Ram the king because Sun, Mars and Rahu had surrounded his nakshatra and normally under such planetary configuration the king dies or becomes a victim of conspiracies.

Dashrathas’ zodiac sign was Pisces and his nakshatra was Rewati.

This planetary configuration was prevailing on the January 5, 5089 BC,

and it was on this day that Shri Ram left Ayodhya for 14 years of exile.

Thus, he was 25 years old at that time (5114-5089).

There are several shlokas in Valmiki Ramayan which indicate that Shri Ram

was 25-years-old when he left Ayodhya for exile. Valmiki Ramayan refers to the solar eclipse at the time of war with Khardushan in later half of 13th year of Shri Rams’ exile. It is also mentioned it was amavasya day and Mars was in the middle. When this data was entered, the software indicated that there was a solar eclipse on October 7, 5077 BC, (amavasya day) which could be seen from Panchvati.

The planetary configuration was also the same – Mars was in the middle,

on one side were Venus and Mercury and on the other side were Sun and Saturn.

On the basis of planetary configurations described in various other chapters, the date on which Ravana was killed works out to be December 4, 5076 BC, and Shri Ram completed 14 years of exile on January 2, 5075 BC, and that day was also Navami of Shukla Paksha in Chaitra month. Thus, Shri Ram had come back to Ayodhya at the age of 39 (5114-5075).

A colleague, Dr Ram Avtar, researched on places visited by Shri Ram during his exile, and sequentially moved to the places stated as visited by Shri Ram in the Valmiki Ramayan, starting from Ayodhya he went right upto Rameshwaram.

He found 195 places which still have the memorials connected to the events narrated in the Ramayana relating to the life of Shri Ram and Sita These include Tamsa Tal (Mandah), Shringverpur (Singraur), Bhardwaj Ashram (situated near Allahabad), Atri Ashram, Markandaya Ashram (Markundi), Chitrakoot, Pamakuti (on banks of Godavari), Panchvati, Sita Sarovar, Ram Kund in Triambakeshwar near Nasik, Shabari Ashram, Kishkindha (village Annagorai), Dhanushkoti and Rameshwar temple. In Valmiki Ramayan it is mentioned that Shri Rams’ army constructed a bridge over the sea between Rameshwaram and Lanka.

After crossing this bridge, Shri Rams’ army had defeated Ravana. Recently,

NASA put pictures on the Internet of a man-made bridge, the ruins of which are lying submerged in Palk Strait between Rameshwaram and Sri Lanka.

Recently the Sri Lankan Government had expressed the desire to develop Sita Vatika as a tourist spot. Sri Lankans believe this was Ashok Vatika where Ravana had kept Sita as a prisoner (in 5076 BC).

Indian history has recorded that Shri Ram belonged to the Suryavansh and he was the 64th ruler of this dynasty. The names and other relevant particulars of previous 63 kings are listed in Ayodhya ka Etihaas written about 80 years ago by Rai Bahadur Sita Ram. Professor Subhash Kak of Lousiana University, in his book, The Astronomical Code of the Rig Veda, has also listed 63 ancestors of Shri Ram

who ruled over Ayodhya.

Sri Rams’ ancestors have been traced out as: Shri Ram, King Dashratha, King Aja, King Raghu, King Dilip and so on. From Kashmir to Kanyakumari and from Bengal to Gujarat, everywhere people believe in the reality of Shri Rams’ existence, particularly in the tribal areas of Himachal, Rajasthan, Madhya Pradesh and the North-East.

Most of the festivals celebrated in these areas revolve around the events in the life of Shri Ram and Shri Krishna. The events and places related to the life of Shri Ram and Sita are true cultural and social heritage of every Indian irrespective of caste and creed. Therefore, it is common heritage.

After all, Shri Ram belonged to the period when Prophet Mohammed or Jesus Christ were not born and Muslim or Christian faiths were unknown to the world.

The words Hindu (resident of Hindustan) and Indian (resident of India) were synonymous. India was also known as Bharat (land of knowledge) and Aryavarta (where Aryans live) and Hindustan (land of “Hindus” – derived from word Indus). During Ram Rajya, the evils of caste system based on birth were non-existent. In fact, Maharishi Valmiki is stated to be of Shudra class (scheduled caste), still Sita lived with him as his adopted daughter after she was banished from Ayodhya.

Luv and Kushgrew in his ashram as his disciples. We need to be proud of the fact that Valmiki was perhaps the first great astronomer and that his study of planetary configurations has stood the test of times. Even the latest computer software have corroborated his astronomical calculations, which proves that he did not commit any error. Error! Filename not specified.

Shabri is stated to be belonging to the Bheel tribe. Shri Rams’ army, which succeeded in defeating Ravana, was formed by various tribals from Central and South India.

The facts, events and all other details relating to the life of Shri Ram are the common heritage of all the Indians including scheduled castes, scheduled tribes, Muslims, Christians, etc.

Prophet Mohammad was born 1,400 years ago.

Jesus Christ was born 2,000 years back.

Gautam Buddha was born 2,600 years back,

whereas Ram was born 7,000 years back.

Hence, discovering the details relating to Shri Rams’ life would be lot more difficult as destruction caused by floods, earthquakes and invasions etc., would be far greater. But, should that stop our quest for learning more about our cultural heritage? Error! Filename not specified.

As Indians, let us all take pride in the fact that the Indian civilization is the most ancient civilization today. It is certainly more than 10,000 years old. Therefore, let us reject the story of Aryan invasion in Indiain 1,500 BC as motivated implantation.

In fact, Max Mueller, who was the creator of this theory had himself rejected it.

Let us admit that during the British Rule, we were educated in the schools based on Macaulay school of thinking which believed that everything Indian was inferior and that entire “Indian literature was not worth even one book rack in England.” If there were similarities in certain features of Indian people and people from Central Europe, then automatic inference drawn was that the Aryans coming from Europe invaded India and settled here.

No one dared of thinking in any other way. Therefore, there is urgency for the historians and all other intellectuals to stop reducing Indian history to myth.

There is need to gather, dig out, search, unearth and analyze all the evidences,

which would throw more light on ancient Indian civilization and culture. There is need for the print and the electronic media to take note of these facts and create atmosphere which would motivate our young and educated youth to carry out research and unearth true facts about the ancient Indian civilization and wisdom and would also encourage them to put across the results of their research before the people fearlessly and with a sense of pride!

 

From:

Adapted from Dr. Peter Hammond’s book: Slavery, Terrorism and Islam: The Historical Roots and Contemporary Threat

Islam is not a religion, nor is it a cult. In its fullest form, it is a complete, total, 100% system of life.

Islam has religious, legal, political, economic, social, and military components. The religious component is a beard for all of the other components.

Islamization begins when there are sufficient Muslims in a country to agitate for their religious privileges.

When politically correct, tolerant, and culturally diverse societies agree to Muslim demands for their religious privileges, some of the other components tend to creep in as well.

Here’s how it works:

As long as the Muslim population remains around or under 2% in any given country, they will for the most part be regarded as a peace-loving minority, and not as a threat to other citizens. This is the case in:

United States — Muslim 0.6%

Australia — Muslim 1.5%

Canada — Muslim 1.9%

China — Muslim 1.8%

Italy — Muslim 1.5%

Norway — Muslim 1.8%

 

At 2% to 5%, they begin to proselytize from other ethnic minorities and disaffected groups, often with major recruiting from the jails and among street gangs. This is happening in:

Denmark — Muslim 2%

Germany — Muslim 3.7%

United Kingdom — Muslim 2.7%

Spain — Muslim 4%

Thailand — Muslim 4.6%

From 5% on, they exercise an inordinate influence in proportion to their percentage of the population. For example, they will push for the introduction of halal (clean by Islamic standards) food, thereby securing food preparation jobs for Muslims. They will increase pressure on supermarket chains to feature halal on their shelves — along with threats for failure to comply. This is occurring in:

France – Muslim 8%

Philippines – Muslim 5%

Sweden – Muslim 5%

Switzerland – Muslim 4.3%

The Netherlands – Muslim 5.5%

Trinidad & Tobago – Muslim 5.8%

At this point, they will work to get the ruling government to allow them to rule themselves (within their ghettos) under Sharia, the Islamic Law. The ultimate goal of Islamists is to establish Sharia law over the

entire world.

When Muslims approach 10% of the population, they tend to increase lawlessness as a means of complaint about their conditions. In Paris, we are already seeing car-burnings. Any non-Muslim action offends Islam and results in uprisings and threats, such as in Amsterdam, with opposition to Mohammed cartoons and films about Islam. Such tensions are seen daily, particularly in Muslim sections in:

Guyana – Muslim 10%

India – Muslim 13.4%

Israel – Muslim 16%

Kenya – Muslim 10%

Russia – Muslim 15%

After reaching 20%, nations can expect hair-trigger rioting, jihad militia formations, sporadic killings, and the burnings of Christian churches and Jewish synagogues, such as in:

Ethiopia — Muslim 32.8%

At 40%, nations experience widespread massacres, chronic terror attacks, and ongoing militia warfare, such as in:

Bosnia – Muslim 40%

Chad – Muslim 53.1%

Lebanon – Muslim 59.7%

From 60%, nations experience unfettered persecution of non-believers of all other religions (including non-conforming Muslims), sporadic ethnic cleansing (genocide), use of Sharia Law as a weapon, and Jizya, the tax placed on infidels, such as in:

Albania – Muslim 70%

Malaysia – Muslim 60.4%

Qatar – Muslim 77.5%

Sudan – Muslim 70%

After 80%, expect daily intimidation and violent jihad, some State-run ethnic cleansing, and even some genocide, as these nations drive out the infidels, and move toward 100% Muslim, such as has been experienced and in some ways, is on-going in:

Bangladesh – Muslim 83%

Egypt – Muslim 90%

Gaza – Muslim 98.7%

Indonesia – Muslim 86.1%

Iran – Muslim 98%

Iraq – Muslim 97%

Jordan – Muslim 92%

Morocco – Muslim 98.7%

Pakistan – Muslim 97%

Palestine – Muslim 99%

Syria – Muslim 90%

Tajikistan – Muslim 90%

Turkey – Muslim 99.8%

United Arab Emirates – Muslim 96%

100% will usher in the peace of ‘Dar-es-Salaam’ — the Islamic House of Peace. Here there’s supposed to be peace, because everybody is a Muslim, the Madrassas are the only schools, and the Koran is the only word, such as in:

Afghanistan – Muslim 100%

Saudi Arabia – Muslim 100%

Somalia – Muslim 100%

Yemen – Muslim 100%

Unfortunately, peace is never achieved, as in these 100% states the most radical Muslims intimidate and spew hatred, and satisfy their blood lust by killing less radical Muslims, for a variety of reasons.

‘Before I was nine, I had learned the basic canon of Arab life. It was me against my brother; me and my brother against our father; my family against my cousins and the clan; the clan against the tribe; the tribe

against the world, and all of us against the infidel. – Leon Uris, ‘The Haj’

It is important to understand that in some countries, with well under 100% Muslim populations, such as France, the minority Muslim populations live in ghettos, within which they are 100% Muslim, and within which they live by Sharia Law. The national police do not even enter these ghettos. There are no national courts, nor schools, nor non-Muslim religious facilities. In such situations, Muslims do not integrate into the community at large. The children attend madrassas. They learn only the Koran. To even associate with an infidel is a crime punishable with death. Therefore, in some areas of certain nations, Muslim Imams and extremists exercise more power than the national average would indicate.

Today’s 1.5 billion Muslims make up 22% of the world’s population. But their birth rates dwarf the birth rates of Christians, Hindus, Buddhists, Jews, and all other believers. Muslims will exceed 50% of the

world’s population by the end of this century.

Well, boys and girls, today we are letting the fox guard the henhouse. The wolves will be herding the sheep!

Obama appoints two devout Muslims to Homeland Security posts. Doesn’t this make you feel safer already?

 

Obama and Janet Napolitano appoint Arif Alikhan, a devout Muslim, as Assistant Secretary for Policy Development.

DHS Secretary Janet Napolitano swore in Kareem Shora, a devout Muslim who was born in Damascus , Syria , as ADC National Executive Director as a member of the Homeland Security Advisory Council (HSAC).

NOTE: Has anyone ever heard a new government official being identified as a devout Catholic, a devout Jew or a devout Protestant…? Just wondering.

Devout Muslims being appointed to critical Homeland Security positions? Doesn’t this make you feel safer already??

That should make the US ‘ homeland much safer, huh!! Was it not “Devout Muslim men” that flew planes into U.S. buildings eight years ago?

Was it not a Devout Muslim who killed 13 at Fort Hood?

Also: This is very interesting and we all need to read it from start to finish. Maybe this is why our American Muslims are so quiet and not speaking out about any atrocities. Can a good Muslim be a good American? This question was forwarded to a friend who worked in Saudi Arabia for 20 years. The following is his reply:

Theologically – no – Because his allegiance is to Allah, The moon God of Arabia

Religiously – no – Because no other religion is accepted by His Allah except Islam (Quran 2:256) (Koran)

Scripturally – no – Because his allegiance is to the five Pillars of Islam and the Quran.

Geographically – no – Because his allegiance is to Mecca , to which he turns in prayer five times a day.

Socially – no – Because his allegiance to Islam forbids him to make friends with Christians or Jews.

Politically – no – Because he must submit to the mullahs (spiritual leaders), who teach annihilation of Israel and destruction of America, the great Satan.

Domestically – no – Because he is instructed to marry four Women and beat and scourge his wife when she disobeys him (Quran 4:34)

Intellectually – no – Because he cannot accept the American Constitution since it is based on Biblical principles and he believes the Bible to be corrupt.

Philosophically – no – Because Islam, Muhammad, and the Quran do not allow freedom of religion and expression. Democracy and Islam cannot co-exist. Every Muslim government is either dictatorial or autocratic.

Spiritually – no – Because when we declare ‘one nation under God,’ the Christian’s God is loving and kind, while Allah is NEVER referred to as Heavenly father, nor is he ever called love in The Quran’s 99 excellent names.

 

Therefore, after much study and deliberation…Perhaps we should be very suspicious of all Muslims

in this country. Clearly, they cannot be both ‘good’ Muslims and good Americans.

Call it what you wish, it’s still the truth. You had better believe it. The more who understand this, the better it will be for our country and our future. The religious war is bigger than we know or understand.

Can a Muslim be a good soldier??? Army Maj. Nidal Malik Hasan, opened fire at Ft. Hood and Killed 13. He is a good Muslim!!!

Footnote: The Muslims have said they will destroy us from within.

SO, FREEDOM IS NOT FREE.